'जुर्माने का डर दिखाकर....', युवराज मेहता केस में डेवलेपर ने नोएडा अथॉरिटी को ठहराया जिम्मेदार

नोएडा सेक्टर-150 में टेक्नीशियन की मौत के मामले में डेवलपर ने कोर्ट को बताया कि विज्ञापन वाले बैरिकेड नोएडा अथॉरिटी के आदेश पर हटाए गए थे. कंपनी ने दावा किया कि उसने पहले ही सुरक्षा खतरे की चेतावनी दी थी.

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कोर्ट में डेवलपर ने दावा किया कि नोएडा अथॉरिटी के आदेश पर बैरिकेड हटे थे (Photo-ITG) कोर्ट में डेवलपर ने दावा किया कि नोएडा अथॉरिटी के आदेश पर बैरिकेड हटे थे (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:27 AM IST

नोएडा सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में चल रही कानूनी कार्यवाही के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है. इस मामले में डेवलपर ने ग्रेटर नोएडा की सूरजपुर कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए सारा दोष नोएडा अथॉरिटी पर मढ़ दिया है.

सूरजपुर कोर्ट में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने सुनवाई के दौरान डेवलपर के वकील ने बताया कि सेक्टर-150 स्थित उस प्लॉट पर पहले से बैरिकेडिंग की गई थी. हालांकि, जुलाई 2021 में नोएडा अथॉरिटी ने इन बैरिकेड्स पर लगे विज्ञापनों पर आपत्ति जताई और इन्हें तुरंत हटाने का निर्देश दिया.

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इतना ही नहीं, अवैध विज्ञापन के नाम पर कंपनी पर 6 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जिसके दबाव में आकर कंपनी को वहां से सुरक्षा घेरा (बैरिकेडिंग) हटाना पड़ा.

हादसे की चेतावनी को किया गया नजरअंदाज 
डेवलपर की ओर से कोर्ट में 14 मार्च 2022 का एक पत्र भी पेश किया गया, जो नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को लिखा गया था. इस पत्र में चेतावनी दी गई थी कि अथॉरिटी द्वारा संचालित मुख्य सीवर और ड्रेन लाइनों के टूटने के कारण सारा गंदा पानी उनके प्लॉट के बेसमेंट में भर रहा है. डेवलपर ने दावा किया कि उन्होंने अथॉरिटी को बताया था कि मिट्टी के कटाव के कारण बगल की मुख्य सड़क धंस रही है और किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है.

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अपने बयान में अथॉरिटी से क्षतिग्रस्त सीवर लाइनों को तुरंत ठीक करने और दुर्घटना को रोकने के लिए जमा पानी को पंप करके निकालने का आग्रह किया था. अधिकारियों ने बताया कि यह प्लॉट, जो शुरू में लोटस ग्रीन्स के स्वामित्व में था, 2019-20 में नोएडा अथॉरिटी की मंजूरी के बाद विजटाउन प्लानर्स को ट्रांसफर कर दिया गया था.

नोएडा अथॉरिटी का जवाब
 इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए नोएडा अथॉरिटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कार्रवाई सिर्फ अवैध विज्ञापनों के खिलाफ थी. अथॉरिटी ने कभी भी सुरक्षा मानकों से समझौता करने के लिए नहीं कहा. बिल्डर चाहता तो विज्ञापन हटाकर सादे बैरिकेड्स लगा सकता था, लेकिन उसने सुरक्षा की पूरी तरह अनदेखी की.

क्या था पूरा मामला? 
16-17 जनवरी 2026 की दरम्यानी रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार सेक्टर-150 में एक जलभराव वाले गहरे गड्ढे में गिर गई थी, जिसमें डूबने से उनकी मौत हो गई. इस घटना के बाद जनता में भारी आक्रोश फैल गया था, स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और डेवलपर्स और नोएडा अथॉरिटी पर लापरवाही के आरोप लगाए.

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इसके बाद पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या  की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (SIT) ने भी इस मामले की जांच कर रहा है.

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