दिल्ली बस रेप केस के बाद कानपुर पुलिस का 'ऑपरेशन अलर्ट', स्लीपर बसों में चेकिंग अभियान

कानपुर पुलिस ने ऑपरेशन अलर्ट अभियान शुरू किया है. इस अभियान के तहत स्लीपर और लंबी दूरी की बसों की सख्त जांच की जा रही है. इसमें ड्राइवर और कंडक्टर के दस्तावेजों की भी वेरिफिकेशन शामिल है. पुलिस ने बसों में लगे काले पर्दों को हटाने का निर्देश दिया है ताकि अंदर की गतिविधियां साफ तौर से देखी जा सकें.

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कानपुर पुलिस ने स्लीपर बसों में चेकिंग अभियान चलाया. (Photo-ITG) कानपुर पुलिस ने स्लीपर बसों में चेकिंग अभियान चलाया. (Photo-ITG)

सिमर चावला

  • कानपुर,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:57 PM IST

उत्तर प्रदेश के कानपुर में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने अभियान शुरू किया है. इसका नाम ‘ऑपरेशन अलर्ट’ रखा गया है. दरअसल, दिल्ली में स्लीपर बस के अंदर नाबालिग से गैंगरेप की घटना के बाद पुलिस ने यह कदम उठाया है. अभियान के तहत शहर के अलग-अलग इलाकों में स्लीपर और लंबी दूरी की बसों की जांच की जा रही है.

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पुलिस की टीमें सड़क पर उतरकर बसों को रोक रही हैं. बस के अंदर जाकर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था देखी जा रही है. ड्राइवर और कंडक्टर के दस्तावेज भी जांचे जा रहे हैं. इसके साथ ही बसों में लगे पर्दों पर भी पुलिस की नजर है.

‘ऑपरेशन अलर्ट’ के तहत पुलिस यह देख रही है कि बस के अंदर ऐसी कोई व्यवस्था तो नहीं है, जिससे बाहर से अंदर की गतिविधियां दिखाई ही न दें. जांच के दौरान कई बसों में लगे पर्दों को भी देखा गया.

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पुलिस ब्लैक फिल्म और नियमों के खिलाफ लगाए गए पर्दों पर कार्रवाई कर रही है. ऐसे पर्दे हटाए जा रहे हैं, जिनसे बस का अंदरूनी हिस्सा पूरी तरह ढक जाता है. पुलिस का मानना है कि बस के अंदर निगरानी जरूरी है. अगर अंदर का हिस्सा पूरी तरह ढका रहेगा, तो किसी आपराधिक घटना की जानकारी समय पर बाहर नहीं आ सकेगी.

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ड्राइवर और कंडक्टर का होगा पुलिस वेरिफिकेशन

अब बस चालकों और कंडक्टरों के पुलिस वेरिफिकेशन पर भी जोर दिया जा रहा है. पुलिस उनके पहचान से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी. इसके साथ ही उनका पिछला आपराधिक रिकॉर्ड भी देखा जाएगा.

पुलिस यह पता करेगी कि ड्राइवर या कंडक्टर के खिलाफ किसी थाने में मुकदमा दर्ज है या नहीं. अगर वेरिफिकेशन के दौरान किसी कर्मचारी का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस की ओर से बस संचालकों को भी निर्देश दिए जा रहे हैं. उनसे कहा जा रहा है कि ड्राइवर और कंडक्टर को नौकरी पर रखने से पहले उनका पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाए. इसके लिए परिवहन संचालकों को वेरिफिकेशन से जुड़े फॉर्म भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बस संचालकों को चालक और कंडक्टर के वेरिफिकेशन प्रोसेस जल्द पूरी करनी होगी. इसके लिए करीब एक हफ्ते का समय दिया गया है. पुलिस की टीमें अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बसों की जांच जारी रखेंगी.

एडिशनल डीसीपी क्राइम स्नेहा तिवारी ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता है. सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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पुलिस बस संचालकों को नियमों का पालन करने की हिदायत दे रही है. बस के अंदर ऐसी व्यवस्था नहीं करने को कहा जा रहा है, जिससे निगरानी मुश्किल हो. खास तौर पर स्लीपर बसों में सुरक्षा इंतजामों की जांच की जा रही है.

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