लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के घटिया निर्माण और बार-बार सड़क धंसने का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है. इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जनहित याचिका दाखिल की गई है.
हाईकोर्ट में जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीश शुक्ला की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई की. हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्रालय, NHAI के साथ-साथ MORTH से भी जवाब मांगा है. याचिका में सड़क निर्माण करने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक को भी पार्टी बनाया गया है.
हाईकोर्ट में लगाई गई PIL में देश के सबसे ज्यादा टोल लेने वाले एक्सप्रेसवे का बुरा हाल बताया गया है. याचिका में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को 4.37 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से टोल लेने वाला देश का सबसे महंगा एक्सप्रेसवे बताया गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के घटिया निर्माण को लेकर याचिका दायर की है.
13 दिनों में ही धंस गया था एक्सप्रेसवे
13 जुलाई को कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का बड़े जोर-शोर से उद्घाटन हुआ था. उस समय इसकी क्वालिटी की तुलना जर्मनी की वर्ल्ड क्लास सड़कों से की जा रही थी. हालांकि, उद्घाटन के महज 13 दिनों के भीतर ही यह एक्सप्रेसवे बड़े विवादों में घिर गया था. लगातार हो रही बारिश के बीच उन्नाव जिले के कोरारी के पास 6-लेन सड़क का एक बड़ा हिस्सा कई मीटर तक धंस गया था.
घटना के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने धंसे हुए एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था. वीडियो वायरल होने के बाद मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने BJP सरकार और NHAI के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए हमला बोला था.
4200 करोड़ की लागत से बना था एक्सप्रेसवे
करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से बने 63 किमी लंबे इस 6-लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का निर्माण PNC कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसे NHAI को सौंप दिया गया था. मामले के तूल पकड़ने और वीडियो वायरल होने के बाद कंस्ट्रक्शन कंपनी PNC तुरंत मौके पर मरम्मत कार्य में जुट गई थी. वहीं, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर सफाई जारी की थी.
संतोष शर्मा