उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित उस बहुचर्चित बिल्डिंग को तोड़ने का काम कल से शुरू हो गया है, जहां 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड में 15 मासूम बच्चों की जलकर मौत हो गई थी. भूखंड संख्या-102 पर बनी इस इमारत के मालिक वीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला ने स्वयं भवन ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कराई है. हालांकि लखनऊ विकास प्राधिकरण पूरे काम पर कड़ी नजर बनाए हुए है.
भवन को एक झटके में गिराने के बजाय अत्यंत सावधानी के साथ ध्वस्त किया जा रहा है. भवन के ऊपरी हिस्से को ड्रिल मशीनों की मदद से छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ा जा रहा है, ताकि आसपास की इमारतों और लोगों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे. सुरक्षा के मद्देनजर पूरी बिल्डिंग को हरे रंग की जालीनुमा नेट से ढक दिया गया है.
बिल्डिंग मालिक को 25 जुलाई तक दिया गया था समय
एलडीए के मुताबिक भवन स्वामी स्वयं इमारत तुड़वा रहे हैं. एलडीए ने भवन ध्वस्तीकरण के लिए 15 दिन का समय दिया था, जिसकी अवधि 25 जुलाई को समाप्त होगी. यदि निर्धारित समय तक भवन पूरी तरह नहीं हटाया गया तो प्राधिकरण अपने स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा.
वहीं बीते दिनों अलीगंज अग्निकांड के आरोपी सुरेंद्र प्रसाद शुक्ला की अग्रिम जमानत जिला जज मलखान सिंह ने खारिज कर दी. अग्निकांड में 15 लोगों की जलकर मौत हुई थी, जिसकी वजह नियम-कानूनों की अनदेखी कर बनाई गई इमारत बताई गई है. अभियोजन के अनुसार आरोपी सुरेंद्र शुक्ला की उक्त भवन में हिस्सेदारी है.
अदालत ने कहा कि परिसर का संचालन आवश्यक कानूनी मंज़ूरी और सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना किया जा रहा था. कोर्ट ने माना कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड आरोपी की भूमिका को प्रथम दृष्टया दर्शाते हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी.
समर्थ श्रीवास्तव