लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में धर्मांतरण और महिला डॉक्टरों के कथित उत्पीड़न का मामला अब संस्थान के प्रोफेसरों और अन्य कर्मचारियों तक पहुंच गया है. STF की जांच रिपोर्ट में कई डॉक्टरों, प्रोफेसरों और कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. जांच में प्रोफेसरों को दोषी भी पाया गया है. रिपोर्ट में धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने, महिला डॉक्टरों को ब्लैकमेल करने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और शिकायतों को दबाने जैसे आरोपों का जिक्र है. अब शासन ने जांच रिपोर्ट में चिह्नित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
इस मामले में आजतक ने अपनी पड़ताल में सबसे पहले खुलासा किया था कि कथित धर्मांतरण नेटवर्क में प्रोफेसरों समेत संस्थान के अन्य स्टाफ की भी भूमिका हो सकती है. STF की जांच में भी कई विभागों के डॉक्टरों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है. जांच रिपोर्ट में पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और गांधी वार्ड से जुड़े मामलों का विस्तार से उल्लेख किया गया है.
विभागाध्यक्ष और एडिशनल प्रोफेसर पर भी गंभीर आरोप
STF ने पैथोलॉजी विभाग की फैकल्टी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश बाबू और एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुमायरा कयूम पर पीड़ित डॉक्टरों की शिकायतों को दबाने, आरोपी डॉक्टर का पक्ष लेने और शिकायतकर्ताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए हैं.
इस मामले में दो एफआईआर को जांच का आधार बनाया गया. पहली एफआईआर 23 दिसंबर 2025 को पैथोलॉजी विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. देवारती मित्रा की शिकायत पर डॉ. रमीज मलिक के खिलाफ चौक थाने में दर्ज हुई थी. दूसरी एफआईआर 29 दिसंबर 2025 को नर्सिंग स्टाफ माविया की शिकायत पर रेजिडेंट डॉक्टर मोहम्मद आदिल के खिलाफ कैसरबाग थाने में दर्ज की गई थी.
STF की रिपोर्ट में डॉ. रमीज पर कई महिला डॉक्टरों को प्रेमजाल में फंसाने और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं. इसमें डॉ. देवारती मित्रा के अलावा डॉ. मानसी सक्सेना, डॉ. कृतिका पाण्डेय और डॉ. मुस्कान का भी उल्लेख है. रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. रमीज को 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया जा चुका है.
माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग में भी आरोप
माइक्रोबायोलॉजी विभाग की संविदा कर्मचारी ज्योति राव का मामला भी STF की रिपोर्ट में शामिल है. आरोप है कि कर्मचारी शफात अली खान के खिलाफ छेड़छाड़, पीछा करने और धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने की शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई. इसके उलट ज्योति राव की संविदा समाप्त कर दी गई.
रेडियोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रिजवान पर महिला डॉक्टरों को ब्लैकमेल करने और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकायत करने पर पीड़िताओं को परीक्षा में फेल करने और उनका करियर खराब करने की धमकी दी गई.
गांधी वार्ड में नर्सिंग स्टाफ के मामलों का भी जिक्र
STF की रिपोर्ट में गांधी वार्ड के नर्सिंग स्टाफ से जुड़े कथित उत्पीड़न के मामलों का भी उल्लेख है. नर्सिंग कर्मचारी नफीस पर ज्योति सिंह को प्रेमजाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन और निकाह करने का आरोप है. वहीं, फुरकान पर जागृति गुप्ता को धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए प्रेरित करने के आरोप लगाए गए हैं.
रिपोर्ट में KGMU के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. इसमें वीसी के पीएस एसए अब्बास, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अब्बास अली मेहंदी, प्रोफेसर उस्मान कौसर और बायोकेमिस्ट्री विभाग के कुछ फैकल्टी सदस्यों का नाम शामिल है. इन पर कुछ डॉक्टरों और कर्मचारियों को कथित तौर पर संरक्षण देने और विभागीय मामलों को प्रभावित करने के आरोप हैं.
विशाखा कमेटी ने भी डॉ. रमीज को पाया था दोषी
STF की रिपोर्ट में इस्लामिक मेडिकोज नामक समूह का भी उल्लेख किया गया है. जांच एजेंसी का दावा है कि एसएनएमसी आगरा और KGMU से जुड़े कुछ पूर्व और वर्तमान मेडिकल छात्रों के बीच एक नेटवर्क सक्रिय था. रिपोर्ट में कुछ डॉक्टरों के नाम और उनके कथित आपसी संपर्कों का भी जिक्र है.
STF ने डॉ. रमीज के सहयोगी डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की है. रिपोर्ट के मुताबिक, KGMU की विशाखा कमेटी ने भी डॉ. रमीज को संबंधित आरोपों में दोषी पाया था.
शासन ने 30 अक्टूबर को KGMU प्रशासन को भेजा पत्र
STF की जांच रिपोर्ट के बाद शासन ने भी कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं. 30 अक्टूबर 2026 को संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी की ओर से KGMU के कुलसचिव को पत्र भेजा गया. इसमें KGMU अधिनियम 2002 और परिनियमावली 2011 के तहत जांच रिपोर्ट में चिह्नित डॉक्टरों, शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है.
शासन ने KGMU प्रशासन से की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है. ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि STF की रिपोर्ट में नामजद और चिह्नित लोगों के खिलाफ संस्थान प्रशासन क्या कदम उठाता है.
आशीष श्रीवास्तव