तेज रफ्तार सफर और बेहतर कनेक्टिविटी के दावे के साथ शुरू हुआ कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज 20 दिन बाद ही सवालों के घेरे में आ गया है. एक्सप्रेसवे पर एक बार फिर सड़क की मरम्मत का काम चल रहा है. दावा किया जा रहा है कि उद्घाटन के बाद अब तक अलग-अलग हिस्सों में पांच से छह बार रिपेयरिंग करनी पड़ चुकी है. लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों ने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
उन्नाव के पास जिस हिस्से में इस समय सड़क की मरम्मत हो रही है, वहां से आज तक और इंडिया टुडे की ग्राउंड रिपोर्ट में एक्सप्रेसवे की मौजूदा स्थिति सामने आई है. जिस सड़क को तेज और सुगम सफर की पहचान बनना था, वहां उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद बार-बार मरम्मत की नौबत आ रही है. मौजूदा समय में एक्सप्रेसवे के करीब तीन किलोमीटर हिस्से में बैरिकेडिंग की गई है. इस दौरान ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है और करीब 200 से 300 मीटर लंबे हिस्से में सड़क की मरम्मत का काम जारी है. इससे इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
सबसे ज्यादा सवाल उस हिस्से को लेकर उठ रहे हैं, जहां दोबारा मरम्मत करनी पड़ रही है. इसी स्थान पर 26 जुलाई को भी सड़क की ऊपरी सतह खराब होने की शिकायत सामने आई थी. उस समय सड़क की मरम्मत कर दी गई थी, लेकिन करीब आठ से नौ दिन बाद उसी हिस्से में फिर से समस्या सामने आ गई. जानकारी के अनुसार, उन्नाव में कोरारी टोल प्लाजा से करीब एक किलोमीटर आगे लखनऊ की ओर किलोमीटर संख्या 64 के पास सड़क की ऊपरी सतह दबने और फटने की शिकायत मिली थी. इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने तत्काल मरम्मत का काम शुरू कराया. अब उसी हिस्से में फिर से मरम्मत किए जाने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं.
पहले जिस हिस्से की मरम्मत हुई, वहीं फिर आई खराबी
बार-बार सामने आ रही तकनीकी खामियों को देखते हुए एनएचएआई ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. शुरुआती कार्रवाई के तहत तीन इंजीनियरों को परियोजना से हटा दिया गया है. साथ ही उन्हें दो वर्ष के लिए एनएचएआई और उससे जुड़े उपक्रमों की किसी भी परियोजना में काम करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. कार्रवाई की जद में निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर-कम-डीजीएम (हाईवे) विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार शामिल हैं. एनएचएआई के अनुसार, इन अधिकारियों पर परियोजना की निगरानी में लापरवाही बरतने के आरोप में प्रशासनिक कार्रवाई की गई है.
एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि इन अधिकारियों को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड की किसी भी परियोजना में भाग लेने से प्रतिबंधित किया गया है. तकनीकी जांच में अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार सड़क की खराबी पुल के ढांचे में नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि समस्या ऊपरी बिटुमिनस लेयर और पेवमेंट में स्लिपेज की वजह से सामने आई है. शुरुआती जांच में पुल की नींव, सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर को पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है.
अब तकनीकी टीम यह पता लगाने में जुटी है कि सड़क की ऊपरी सतह बार-बार खराब क्यों हो रही है. जांच में निर्माण प्रक्रिया, इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता, डिजाइन और रखरखाव से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. मरम्मत के कारण एक्सप्रेसवे पर फिलहाल वाहनों को सिंगल लेन से निकाला जा रहा है. करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में बैरिकेडिंग होने से वाहन चालकों को धीमी गति से गुजरना पड़ रहा है. इससे यात्रा का समय भी बढ़ रहा है.
लगातार मरम्मत का असर अब यात्रियों की पसंद पर भी दिखाई देने लगा है. कुछ नियमित यात्रियों का कहना है कि सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई लोग अब एक्सप्रेसवे के बजाय पुराने कानपुर-लखनऊ मार्ग का इस्तेमाल करने लगे हैं. करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था.
पुल की संरचना को बताया गया पूरी तरह सुरक्षित
इसका उद्देश्य कानपुर और लखनऊ के बीच सफर को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना था. लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद लगातार सामने आ रही तकनीकी दिक्कतों ने इसकी गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सभी की नजरें एनएचएआई की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि आखिर उद्घाटन के महज 20 दिन के भीतर बार-बार मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ी और सड़क की खराबी के लिए जिम्मेदार कारण क्या रहे.
सिमर चावला