'वो वृद्ध मां, जो कांपते हाथों से सिर छूकर आशीर्वाद दे गई', IAS दिव्या मित्तल ने इस्तीफे के दिन याद किया वो गांव, जहां 75 साल बाद पहुंचा पानी

IAS Divya Mittal News: IAS पद से इस्तीफा देने के बाद दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के लहुरियादह गांव की वृद्ध मां का जिक्र कर भावुक पोस्ट लिखी. जानिए 13 साल के उनके सफर की पूरी कहानी.

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IAS दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के लहुरियादह का किया जिक्र.(Photo:ITG) IAS दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के लहुरियादह का किया जिक्र.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ/मिर्जापुर,
  • 30 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:13 PM IST

उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अफसर दिव्या मित्तल ने 13 साल की सर्विस के बाद IAS से इस्तीफा देने का ऐलान किया. इसके बाद उनके भावुक संदेश की एक तस्वीर सबसे ज्यादा उभरकर सामने आई. वह है मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर मौजूद मिर्जापुर के पहाड़ी गांव लहुरियादह की एक वृद्ध महिला की. वह महिला, जिसने अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचने पर कुछ नहीं कहा, बल्कि कांपते हाथों से तत्कालीन जिलाधिकारी यानी DM दिव्या मित्तल के सिर पर हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद दिया.

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दिव्या मित्तल ने इस्तीफे के बाद अपने संदेश में लिखा, ''आज आभार से आंखें नम हैं. बस एक दृश्य इनमें बसा है. लहुरियादह की पहाड़ी की वो वृद्ध मां, जो अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचता देख कुछ नहीं बोली, बस कांपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई. पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा. और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है...''

दिव्या मित्तल के लिए मिर्जापुर का लहुरियादह सिर्फ एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके जीवन और सेवा के अनुभवों से जुड़ी एक ऐसी याद बन गया, जिसे उन्होंने IAS छोड़ने के दिन भी अपने शब्दों में सबसे खास जगह दी.

75 साल बाद गांव में पहुंचा था नल का पानी

30 अगस्त 2023 को तत्कालीन मिर्जापुर DM दिव्या मित्तल ने लहुरियादह गांव में पानी पहुंचने के बाद एक भावुक पोस्ट लिखी थी. उन्होंने बताया था कि आजादी के 75 साल बाद भी इस गांव के लोगों के पास पानी की सुविधा नहीं थी.

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मिर्जापुर के हलिया विकास खंड का लहुरियादह गांव यूपी-मध्य प्रदेश सीमा के पास पहाड़ी की चोटी पर स्थित है. भौगोलिक स्थिति के कारण यहां पानी पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता था.

दिव्या मित्तल ने उस समय लिखा था कि जब वह पहली बार गांव पहुंचीं तो गांव वालों के सामने अपनी पानी की बोतल से पानी पीने की भी हिम्मत नहीं हुई. गांव में पानी की इतनी किल्लत थी कि टैंकर से पानी वितरण के लिए आधार कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था.

उन्होंने लिखा था कि पानी की समस्या के कारण गांव की स्थिति ऐसी हो गई थी कि लोग अपनी बेटियों की शादी वहां नहीं करना चाहते थे.

15 लीटर पानी में गुजरता था दिन

लहुरियादह में पानी की समस्या वर्षों से ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी. गांव के लोगों को सीमित मात्रा में पानी मिलता था और ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी काफी परेशानी उठानी पड़ती थी.

पानी की कमी का असर सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं था. गांव में विवाह संबंधों पर भी इसका असर पड़ता था. ग्रामीणों के मुताबिक, पानी की समस्या के कारण कई लोगों की शादी में दिक्कत आती थी. जब गांव में किसी की शादी होती थी तो अलग से टैंकर से पानी मंगाना पड़ता था.

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9 महीने की मेहनत के बाद बदली तस्वीर

दिव्या मित्तल ने 2023 में अपनी पोस्ट में बताया था कि करीब 9 महीने की कड़ी मेहनत के बाद टीम ने भौगोलिक, आर्थिक और अन्य चुनौतियों का सामना करते हुए गांव तक पानी पहुंचाने का काम पूरा किया. उन्होंने बताया था कि 'हर घर जल' योजना के तहत गांव के घरों तक पाइप कनेक्शन के जरिए साफ और सुरक्षित पानी पहुंचाने की शुरुआत हुई.

पहली बार जब गांव में नल से पानी निकला तो लोगों की आंखों में खुशी के आंसू थे. दिव्या मित्तल ने लिखा था कि गांव में खुशी और जश्न का माहौल था और सैकड़ों परिवारों के जीवन में एक बुनियादी जरूरत पूरी होने से बड़ा बदलाव आया.

'मिर्जापुर ने सिखाया- असंभव कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है'

30 अगस्त 2026 को IAS से इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए दिव्या मित्तल ने अपने 13 साल के प्रशासनिक सफर को याद किया. उन्होंने लिखा कि साधारण परिवेश में पलते हुए उन्होंने एक अच्छे और सफल जीवन का सपना देखा था.

यह भी पढ़ें: 'मैं मूर्ख थी जो सोचा था कि...', इस्तीफे के बाद यूपी की IAS दिव्या मित्तल का भावुक पोस्ट, लिखा- आज आंखें नम हैं

IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ाई के बाद उन्हें लंदन में नौकरी मिली, लेकिन सब कुछ हासिल करने के बाद भी उन्हें कुछ अधूरा महसूस होता था. उन्होंने लिखा कि अपने देश से दूर होना उन्हें खलता था और उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताकत इस मिट्टी का कर्ज था. इसी सोच के साथ वह भारत लौटीं और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला.

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अपने सेवा काल के अनुभवों को याद करते हुए उन्होंने लिखा, ''देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है. मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है.''

'हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति है'

दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे के संदेश में लिखा कि सेवा के दौरान उन्हें बहुत कुछ करने और सीखने का मौका मिला. जरूरतमंद परिवारों, दिव्यांगों और किसानों के लिए काम करते हुए उन्होंने समझा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है.

उन्होंने लिखा कि असली सुकून उन्हें उस परिवार की आंखों में दिखा, जिसे पहली बार जमीन का हक मिला, उस दिव्यांग को मिला जिसे सम्मान के साथ जीने का अवसर मिला और उस किसान को मिला, जिसके खेत तक पानी पहुंचा.

'मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आई हूं'

अपने लंबे संदेश में दिव्या मित्तल ने बेहद भावुक शब्दों में लिखा, ''मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी ळूं. सच यह है कि सबसे ज्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज और भी बढ़ता गया.''

उन्होंने कहा कि लोगों ने उन्हें इतना प्यार, सम्मान और अपनापन दिया कि उनकी झोली भर गई. उन्होंने अपने साथ काम करने वाले अफसरों, कर्मचारियों और साथियों को भी अपने सफर का अहम हिस्सा बताया.

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देवरिया, संत कबीर नगर और मिर्जापुर में रहीं DM

दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को अपने 13 वर्षों के प्रशासनिक सफर को विराम देते हुए IAS से इस्तीफा देने की घोषणा की. वह उत्तर प्रदेश में देवरिया, संत कबीर नगर और मिर्जापुर की जिलाधिकारी रह चुकी हैं.

उनके इस्तीफे के भावुक संदेश में लहुरियादह गांव और वहां की उस वृद्ध महिला का जिक्र एक बार फिर सामने आया, जिसने पहली बार अपने गांव में पानी पहुंचने पर शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कांपते हाथों से IAS अधिकारी को आशीर्वाद दिया था.

दिव्या मित्तल के शब्दों में, पद भले ही छूट गया हो, लेकिन वह स्पर्श और देश के लिए देखा गया सपना जीवन भर उनके साथ रहेगा.

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