उत्तर प्रदेश पुलिस के 'हाफ एनकाउंटर' पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. श्रावस्ती के इकौना में अलाउद्दीन नाम के आरोपी को दोनों पैरों में गोली लगने के मामले में कोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने जांच एजेंसी से कहा है कि वह तत्कालीन SHO अश्विनी कुमार दुबे की निशानेबाजी और शूटिंग क्षमता की भी जांच करे. CBI को तीन महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी.
मामला 9 मई 2025 का है. श्रावस्ती के इकौना थाना क्षेत्र में एक नाबालिग बच्ची के अपहरण की FIR दर्ज हुई थी. इसके तीन दिन बाद 12 मई को तत्कालीन SHO अश्विनी कुमार दुबे की ओर से एक और FIR दर्ज कराई गई. इसमें पुलिस ने दावा किया कि अपहरण का आरोपी अलाउद्दीन नेपाल भागने की फिराक में था.
पुलिस की कहानी के मुताबिक, रात करीब 11 बजे पुलिस टीम ने सुनसान इलाके में अलाउद्दीन को घेर लिया. पुलिस का दावा था कि आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी. उसे सरेंडर करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने असलहा दोबारा लोड करते हुए पुलिसकर्मियों को जान से मारने की धमकी दी. इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी.
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FIR में यह भी दावा किया गया कि इकौना थाने की पुलिस टीम के साथ SWAT टीम के जवान भी मौजूद थे. कुल 23 पुलिसकर्मियों के घेराबंदी में होने की बात सामने आई. यहीं से हाई कोर्ट ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाए. कोर्ट ने पूछा कि अगर आरोपी 23 पुलिसकर्मियों से घिरा हुआ था और उसने पुलिस पर फायरिंग की, तो एक भी पुलिसकर्मी घायल क्यों नहीं हुआ? कोर्ट ने रात 11 बजे, अंधेरे और सुनसान जगह पर महज 15 मीटर की दूरी से की गई पुलिस की फायरिंग को लेकर भी सवाल किया.
सबसे अहम सवाल SHO की निशानेबाजी को लेकर उठा. कोर्ट ने कहा कि CBI अपनी जांच के दौरान यह भी पता लगाए कि तत्कालीन SHO की शूटिंग क्षमता कैसी थी. आखिर अंधेरे में 15 मीटर की दूरी से सिर्फ असलहा लोड किए जाने की आवाज के आधार पर गोली चलाने पर दोनों गोलियां आरोपी के दोनों पैरों में ही कैसे लगीं?
हाई कोर्ट ने पुलिस की गाड़ी को लेकर भी सवाल खड़े किए. पुलिस के मुताबिक, इंस्पेक्टर समेत 13 पुलिसकर्मी एक ही वाहन में मौजूद थे. कोर्ट ने कहा कि इंस्पेक्टर, पांच सब-इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और छह कॉन्स्टेबल यानी कुल 13 लोगों का एक जीप में बैठना संभव कैसे है? कोर्ट ने टिप्पणी की कि इतनी संख्या में पुलिसकर्मी तभी एक गाड़ी में बैठ सकते हैं, जब वह मिनी बस हो.
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कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि पुलिस द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली SUV या MUV में भी आम तौर पर 13 लोगों के बैठने की क्षमता नहीं होती. ऐसे में आखिर SHO की टीम के 13 पुलिसकर्मी एक ही गाड़ी में कैसे पहुंचे?
इन सवालों के आधार पर हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने श्रावस्ती के इस कथित 'हाफ एनकाउंटर' की कहानी की जांच जरूरी मानी और CBI को जांच सौंपने का आदेश दिया. कोर्ट ने CBI को तीन महीने में अपनी जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं.
अब जांच में न सिर्फ उस रात हुई पूरी कार्रवाई की पड़ताल होगी, बल्कि पुलिस की ओर से बताए गए घटनाक्रम, SHO की शूटिंग क्षमता, फायरिंग की परिस्थितियों और पुलिस टीम की मौके पर मौजूदगी से जुड़े दावों की भी जांच होगी. कोर्ट के आदेश के बाद यह मामला यूपी पुलिस की एनकाउंटर कार्रवाई और उसके आधिकारिक दावों पर उठे गंभीर सवालों के बीच पहुंच गया है.
संतोष शर्मा