उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के मर्चेंट नेवी कर्मी राकेश चौहान की वेनेजुएला में शिप पर ड्यूटी के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. नवंबर 2025 में फीटर के पद पर नौकरी शुरू करने वाले राकेश की 7 मई को मौत हुई, जिसके बाद 4 जून को उनका शव घर पहुंचा. पहले हादसे और फिर हार्ट अटैक की बात कहने वाली कंपनी ने परिजनों को बिना बताए शव का पोस्टमार्टम करा दिया था. डीएम के आदेश पर दोबारा पोस्टमार्टम होने पर राकेश के शरीर के सभी अंदरूनी अंग गायब मिले, जिससे यह पूरा मामला बेहद संदिग्ध हो गया है.
कंपनी के बदलते बयानों से बढ़ा शक
भलुअनी थाना क्षेत्र के भगवानपुर टोला निवासी राकेश के पिता रामदेव चौहान को 7 मई को फोन पर बताया गया कि शिप पर गिरने से राकेश को चोट लगी है. अगले दिन कंपनी ने हार्ट अटैक से मौत की बात कही. जब मृतक की पत्नी रंजना और पिता मुंबई स्थित कंपनी के दफ्तर पहुंचे, तो एक हफ्ते में शव भेजने का भरोसा दिया गया. करीब एक महीने बाद 4 जून को शव देवरिया पहुंचा, लेकिन कंपनी ने मौत के सही कारणों या पहले हुए पोस्टमार्टम की कोई लिखित जानकारी परिवार को नहीं दी.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उड़ाए सबके होश
घर पर पुलिस की मौजूदगी में डॉक्टरों ने पहले से पोस्टमार्टम होने की बात कहकर दोबारा पीएम करने से मना कर दिया. बाद में डीएम मधुसदन हुलगी के आदेश पर जब डॉक्टरों ने दोबारा पोस्टमार्टम किया, तो उनके होश उड़ गए. राकेश की बॉडी के अंदर के सभी ऑर्गन (अंग) मिसिंग थे. शरीर में विसरा प्रिजर्व करने के लिए कुछ बचा ही नहीं था, जिसके चलते डॉक्टरों के लिए मौत की असली वजह बता पाना नामुमकिन हो गया.
अंग तस्करी और बीमा स्कैम का आरोप
राकेश के साथी घनश्याम सिंह और परिजनों का आरोप है कि कंपनी ने बीमा की बड़ी राशि हड़पने और सबूत मिटाने के लिए यह स्कैम किया है. परिवार को आशंका है कि राकेश की हत्या करके अंगों को मानव तस्करी के तहत बेच दिया गया. पीड़ित परिवार अब इंसाफ, आर्थिक मुआवजे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के लिए लगातार भारतीय दूतावास से संपर्क कर लिखापढ़ी कर रहा है ताकि उनके परिवार को न्याय मिल सके.
मामले में डॉक्टर संजय गुप्ता ने बताया कि मृतक की पत्नी उनके आई थी. पोस्टमार्टम के लिए मैंने उन्हें गाइड किया कैसे नियमानुसार दोबारा पीएम कराया जा सकता है. डीएम से अनुमति लेने को कहा गया था. अनुमति मिलने के बाद पोस्टमार्टम किया गया जिसमें बॉडी के कई अंग मिसिंग थे. पीएम में तीन डॉक्टर शामिल थे.
राम प्रताप सिंह