उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सोनुघाट गांव में 65 वर्षीय दलित व्यक्ति मोहन प्रसाद की गोरखपुर अस्पताल में इलाज के बाद घर लौटने पर मौत हो गई. मोहन प्रसाद और उनकी पत्नी लंबे समय से मुस्लिम धर्म मानते थे, घर पर मजार बनाकर इबादत करते थे और ताजिया रखते थे. उन्होंने परिजनों से मौत के बाद शव जलाने के बजाय दफनाने की अंतिम इच्छा जताई थी. रविवार को निधन के बाद परिजनों ने अंतिम इच्छा अनुसार शव दफनाने की तैयारी की. पुलिस की मौजूदगी और परिजनों की रजामंदी से सोमवार को कब्रिस्तान में शव दफनाकर जनाजे की नमाज पढ़ी गई.
अंतिम इच्छा पर गांव में हुआ विवाद
मोहन प्रसाद के निधन के बाद जब परिवार वालों ने शव को दफनाने की बात कही, तो गांव के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया. हालांकि, दूसरे समुदाय के लोग दफनाने पर अड़े रहे. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची. परिवार के सदस्यों और बेटियों ने साफ कहा कि उनके पिता की यही अंतिम इच्छा थी.
परिवार के बाकी सदस्य करते हैं हिंदू धर्म का पालन
मृतक मोहन प्रसाद के दो बेटे और चार बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है और वे सभी हिंदू धर्म के अनुसार रहते हैं. केवल मोहन और उनकी पत्नी ही मुस्लिम धर्म को मानते थे. बेटियों ने बताया कि उनके पिता ने जीवित रहते हुए ही शव को दफनाने की इच्छा जताई थी.
ग्राम प्रधान और पुलिस की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
ग्राम प्रधान अमरेंद्र यादव ने बताया कि गांव में शुरुआत में दफनाने को लेकर असहमति थी और पुलिस भी आई थी. लेकिन परिजनों की जिद और अंतिम इच्छा को देखते हुए मुस्लिम समुदाय की जमीन पर बने कब्रिस्तान में शव को दफना दिया गया.
राम प्रताप सिंह