मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में बुधवार को कोर्ट ने दोषियों मुस्कान और साहिल को सजा सुनाई. मार्च 2025 में मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने हत्या कर दी थी, जिसके बाद शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में सीमेंट से बंद कर दिए गए थे. जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई.
अदालत ने 30 सितंबर 2026 को सुरक्षित रखा था
मामले में मेरठ की जिला अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था और बुधवार को सजा पर अंतिम फैसला आया. मामले में जिला अदालत ने इस मामले में दोनों को फांसी की सजा सुनाई.
इस दौरान कोर्ट की टिप्पणी ने भी सभी का ध्यान खींचा. मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाए जाने के दौरान अदालत में महाभारत का भी जिक्र हुआ. सामने आया है कि फैसला सुनाने से पहले जज कोर्ट में मु्स्कुराते हुए आए, उन्होंने फैसला पढ़ना शुरू किया इससे पहले उन्होंने अहम टिप्पणी में कहा कि 'दंड भी धर्म है'. उन्होंने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि 'दंड को भी धर्म ही बताया गया है, यानी अपराधी को दंड देना धर्म है.'
इस फैसले की जानकारी देते हुए वकील केके चौबे ने मीडिया बातचीत में कहा कि, सुनवाई के दौरान जज ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराधियों को दंड देना भी धर्म है. फैसला सुनाए जाने के दौरान कोर्ट रूम में 'भारत माता की जय' के नारे भी लगे. उन्होंने अदालत के फैसले को समाज के लिए एक बड़ा संदेश बताया.
'अपराधी को सजा देना धर्म का हिस्सा'
उन्होंने कहा कि लालच में आकर करीबी रिश्तों की हत्या करने जैसे जघन्य अपराधों में कठोर सजा मिलनी चाहिए. चौबे के मुताबिक, अदालत ने महाभारत का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि अपराध करने वालों को सजा देना भी धर्म का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि 'यह फैसला समाज को संदेश देता है कि जघन्य अपराध करने वालों को कानून के तहत कठोर दंड भुगतना पड़ेगा.'
13 महीने चला केस, 126 सुनवाई हुईं
अदालत के अधिकारियों के मुताबिक, मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया था. इससे पहले अदालत ने 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को सौरभ राजपूत की हत्या करने और उनके शव को छिपाने की कोशिश के मामले में दोषी करार दिया था. करीब 13 महीने तक चले मुकदमे में कुल 126 सुनवाई हुईं, जिसके बाद अदालत ने दोनों को सजा सुनाई.
हत्या के बाद शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाए
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को की गई थी. आरोप था कि मुस्कान और साहिल ने हत्या के बाद सौरभ के शव के टुकड़े कर दिए और उन्हें एक नीले ड्रम में रख दिया. इसके बाद अपराध को छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट भर दिया गया था. यह मामला उस समय सामने आया, जब मेरठ स्थित घर से सौरभ के शव के अवशेष बरामद किए गए. हत्या के तरीके और शव को ठिकाने लगाने की कोशिश के कारण यह मामला काफी चर्चित हुआ था.
22 गवाहों की हुई गवाही
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 22 गवाह पेश किए. इनमें हत्या में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए चाकू, नीले ड्रम और अन्य सामान की खरीद से जुड़े लोग भी शामिल थे. इसके अलावा होटल मैनेजरों और कैब ड्राइवरों की भी गवाही कराई गई. इन गवाहों के जरिए आरोपियों की गतिविधियों और अलग-अलग स्थानों पर उनकी आवाजाही को साबित करने की कोशिश की गई. अदालत में आरोपियों के विभिन्न स्थानों पर ठहरने से संबंधित रिकॉर्ड भी पेश किए गए.
करीब 13 महीने तक चली सुनवाई और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने पहले दोनों को दोषी करार दिया और अब मुस्कान रस्तोगी तथा साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है.
डेढ़ साल की लंबी कानूनी लड़ाई
सौरभ के बड़े भाई ने बताया कि परिवार ने कभी कोर्ट-कचहरी के चक्कर नहीं काटे थे, लेकिन भाई की हत्या के बाद उन्होंने डेढ़ साल तक हर संभव कानूनी लड़ाई लड़ी है. इस मुश्किल समय में बचपन के दोस्त अंकित धानक और उनके वकील विजय बहादुर ने उनका साथ दिया. परिवार का कहना है कि गवाहों ने अदालत में आरोपियों के खिलाफ मजबूत गवाही दी थी, जिससे उन्हें पूरी उम्मीद है कि अदालत आरोपियों को उनके किए की कड़ी सजा देगी.
कोर्ट में नहीं दिखा कोई पछतावा
परिवार के सदस्यों ने बताया कि अदालत में सुनवाई के दौरान जब उनकी आरोपियों से आमने-सामने मुलाकात हुई, तो उनके चेहरे पर किसी भी प्रकार का पछतावा नजर नहीं आया. आरोपी लगातार नजरें चुराते दिखाई दिए. सौरभ की मां ने नम आंखों से कहा कि उन्हें आज भी यकीन नहीं होता कि उनके बेटे के साथ ऐसी दर्दनाक वारदात को कैसे अंजाम दिया गया. मां ने मांग की थी कि दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाया जाना चाहिए.
क्या बोलीं सौरभ की मां... छलक पड़े आंसू
सौरभ की मां ने 'आजतक' को बताया कि बेटे की हत्या के बाद मेरे परिवार ने न्याय पाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया. प्रशासन और उन सभी लोगों का आभार, जिन्होंने मामले में हमारा साथ दिया. जिन गवाहों ने अदालत में हमारे पक्ष में बयान दिए उनका भी धन्यवाद.
पोती की कस्टडी पर भी रखी बात
बातचीत के दौरान सौरभ की बेटी की कस्टडी का मुद्दा भी सामने आया. सौरभ की मां ने इच्छा जताई कि अगर बच्ची के नाना-नानी राजी होते हैं, तो वे अपनी पोती को अपने पास रखने और पालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने बताया कि हत्या से पहले वह बच्ची अक्सर उनके घर आती थी और उनके साथ समय बिताती थी, लेकिन घटना के बाद से उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा है.
कब क्या हुआ था?
24 फरवरी 2025 को मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत लंदन से वापस मेरठ लौटे और इंदिरा नगर स्थित अपने घर पहुंचे.
25 फरवरी 2025 को सौरभ के घर में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी का जन्मदिन मनाया गया.
28 फरवरी 2025 को उनकी बेटी पीहू का जन्मदिन मनाया गया.
3 मार्च 2025: अभियोजन पक्ष के अनुसार, साजिश के तहत सौरभ को नींद की दवा दी गई और उसके बाद उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को घर बुलाया गया, जहां सौरभ की बेरहमी से हत्या कर दी गई. इसके बाद शव के टुकड़े कर उसे सीमेंट भरकर एक नीले ड्रम में सील कर दिया गया.
4 मार्च 2025: इस दिन मुस्कान अपनी बेटी को मायके छोड़कर साहिल के साथ शिमला घूमने निकल गई और सौरभ के फोन से मैसेज भेजकर परिवार को धोखे में रखा.
17 मार्च 2025: शिमला से लौटने के बाद जब मामले का खुलासा हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की, तो घर के अंदर रखे नीले ड्रम से सौरभ राजपूत के शव के टुकड़े बरामद किए गए. पुलिस ने आरोपी मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया.
7. मार्च 2025 से सितंबर 2026: इस मामले में करीब 13 महीने तक सुनवाई चली. अदालत में कुल 126 पेशियां (सुनवाई की तारीखें) हुईं और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए.
30 सितंबर 2026 लगभग 545 दिनों की कानूनी प्रक्रिया और अंतिम बहस पूरी होने के बाद, मेरठ जिला अदालत द्वारा इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी मुस्कान और साहिल पर ऐतिहासिक फैसला आया है.
हिमांशु मिश्रा