सपा में आजम खान का जलवा बरकरार, कमाल अख्तर को रुचि वीरा से अदावत पड़ी महंगी?

सपा का महासचिव और सूबे में मुस्लिम सियासत का प्रमुख चेहरा माने जाने वाले आजम खान भले ही जेल में बंद हों, लेकिन रुहेलखंड से लेकर वेस्ट यूपी तक सपा में उनकी ही सियासी तूती बोलती है. माना जा रहा है कि विधायक कमाल अख्तर को सांसद रुचि वीरा से राजनीतिक लड़ाई मोल लेना महंगा पड़ा है.

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आजम खान का सियासी दबदबा कायम (Photo-ITG AI) आजम खान का सियासी दबदबा कायम (Photo-ITG AI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:09 PM IST

समाजवादी पार्टी के कद्दावर मुस्लिम चेहरे और पूर्व मंत्री आजम खान भले ही लंबे समय से जेल में बंद हों, लेकिन पार्टी में उनकी सियासी अहमियत पूरी तरह से कायम है. आजम खान की करीबी मुरादाबाद की लोकसभा सांसद रुचि वीरा के साथ राजनीतिक अदावत सपा विधायक कमाल अख्तर को महंगी पड़ गई. कमाल अख्तर को मंगलवार को विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा देना पड़ गया. 

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रुचि वीरा मुरादाबाद से सांसद हैं और कमाल अख्तर मुरादाबाद की कांठ विधानसभा सीट से विधायक हैं. ये दोनों ही नेता एक की पार्टी सपा से हैं, लेकिन दोनों का गृह क्षेत्र मुरादाबाद नहीं है. इन दोनों ही नेताओं ने दूसरे जिले से आकर मुरादाबाद को अपनी सियासत का केंद्र बनाया है. कमाल अख्तर अमरोहा से हैं तो रुचि वीरा बिजनौर की रहने वाली हैं.

अब दोनों ही नेता मुरादाबाद जिले की सियासत पर अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश में हैं. इस वजह से कमाल अख्तर और रुचि वीरा के बीच सियासी तलवारें खिंच गईं और मामला आजम खान से लेकर अखिलेश यादव तक पहुंच गया. इसके बाद ही कमाल अख्तर के सियासी पर कतर दिए गए, जो आजम खान की हनक सपा में बरकरार रहने का संकेत है.

कमाल अख्तर की चली गई कुर्सी

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले विधायक कमाल अख्तर ने मंगलवार को विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे को रुचि वीरा के विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन कमाल अख्तर ने इससे इनकार करते हुए  बताया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आदेश दिया कि मुझे अब विधानसभा में मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करना है. इस जिम्मेदारी को त्यागकर उनके आदेश का पालन किया. 

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विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को मंगलवार के दिन कमाल अख्तर ने अपना इस्तीफा सौंप भी दिया है. उन्होंने कहा कि पद और जिम्मेदारी समय-समय पर बदलती रहती है. मुझे अपने चुनाव की तैयारी पर पर पूरा ध्यान देना है. सपा के दूसरे साथी अब मुख्य सचेतक का पद संभालेंगे. इस तरह से कमाल अख्तर की कुर्सी चली गई. 

कमाल का रूचि वीरा से विवाद

मुरादाबाद की सियासत में कमाल अख्तर और रुचि वीरा की सियासी अदावत लंबे समय से चली आ रही है. कमाल अख्तर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी हैं तो रुचि वीरा को आजम खान का करीबी माना जाता है. आजम की पैरवी पर ही रुचि वीरा को मुरादाबाद से लोकसभा चुनाव का टिकट मिला और वह सांसद बनीं.

दोनों नेताओं के बीच की इस अदावत की वजह मुरादाबाद पर अपनी पकड़ बनाए रखने की जंग है. पिछले दिनों उनकी अदावत खुलकर सामने भी आ गई, जब पिछले दिनों मुरादाबाद में  सपा की पीडीए पंचायत हुई. इसका आयोजन कमाल अख्तर ने कराया था. इस कार्यक्रम में वो नेता बुलाए गए थे, जो आजम खान और रुचि वीरा के खिलाफ रहते हैं.

राज्यसभा सांसद जावेद अली खान भी पहुंचे थे, जो रुचि वीरा को टिकट दिए जाने का खुलकर विरोध किया था और आजम खान पर निशाना साधा था. रुचि वीरा को न तो पीडीए पंचायत में बुलाया गया था और ना ही कार्यक्रम में लगाए गए पोस्टर में उनकी तस्वीर थी. इस बात की शिकायत रुचि वीरा ने आजम खान से लेकर अखिलेश यादव तक पहुंचाई थी, जिसे लेकर एक्शन हो गया. 

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कमाल अख्तर कहते हैं कि रही बात सांसद रुचि वीरा से विवाद की,तो मेरा उनसे कोई विवाद नहीं है. वह अपने कार्यक्रमों में हमारा फोटो नहीं लगातीं, तो हम भी उनका फोटो नहीं लगाते हैं. इसी तरह से वे भी हमें अपने कार्यक्रम में नहीं बुलातीं, तो हम भी नहीं बुलाते हैं. लखनऊ में सांगठनिक बैठक के दौरान उनके साथ कहासुनी जरूर हुई थी, लेकिन उसे मुख्य सचेतक के पद छोड़ने से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. कमाल अख्तर भले ही इनकार करें, लेकिन उनके कुर्सी छोड़ने के पीछे आजम खान का हाथ माना जा रहा है. 

आजम का सपा में दबदबा कायम

आजम खान और कमाल अख्तर के बीच सियासी रिश्ते जगजाहिर हैं. रुहेलखंड से लेकर पश्चिम यूपी तक मुस्लिम चेहरा आजम खान का नाम हुआ करता था, जिनके आगे न ही कमाल अख्तर की चल सकी और ना ही जावेद अली खान की. आजम खान की गैर-मौजूदगी में कमाल अख्तर सपा में मुस्लिम चेहरे के तौर पर खुद को स्थापित करने में लगे थे.

इसी कड़ी में कमाल अख्तर 2024 में मुरादाबाद सीट से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन आजम खान के चलते उनका पत्ता कट गया था. बिजनौर की रहने वाली रुचि वीरा को टिकट मिला और सांसद बनी. अब एक बार फिर आजम खान के कारण ही कमाल अख्तर को विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक की कुर्सी छोड़नी पड़ी है.

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सांसद रुचि वीरा ने मुरादाबाद के पीडीए पंचायत में न बुलाई जाने की शिकायत पहले अपने सियासी आका आजम खान तक पहुंचाई. सपा के एक प्रदेश पदाधिकारी का कहना है कि आजम खान ने अपने करीबी नेता के जरिये यह शिकायत सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सामने रखी. मुरादाबाद के स्थानीय संगठन की ओर से रुचि वीरा को अहमियत न दिए जाने के लिए नाराजगी जाहिर की. 

आजम खान के सियासी संदेश के बाद रुचि वीरा और कमाल अख्तर को 25 जून को अखिलेश ने लखनऊ बुलाया. सपा अध्यक्ष ने दोनों के साथ बैठक कर सियासी तालमेल बनाने की कोशिस की, लेकिन अखिलेश की मौजूदगी में सांसद और विधायक के बीच तल्खी खुलकर सामने आ गई. दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगने लगे.

दोनों ने एक-दूसरे पर पार्टी में गुटबाजी बढ़ाने का आरोप लगाया. इसके बाद ही कमाल अख्तर के पर कतरे जाने की पटकथा लिख दी गई. कमाल अख्तर को मुख्य सचेतक पद से हटाकर अखिलेश ने आजम और रुचि वीरा को साधे रखने का दांव चला. 

मुरादाबाद की सियासत पर वर्चस्व की जंग

कमाल अख्तर एक समय मुलायम सिंह के करीबी रहे हैं, जिन्हें अमर सिंह की सिफारिश पर राज्यसभा सांसद बनाया गया था. मुलायम ने कमाल अख्तर को सपा की यूथ बिग्रेड का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया था. 2012 में अमरोहा के हसनपुर से एक बार विधायक रहे, पर 2017 में चुनाव हार गए, इसके बाद अमरोहा छोड़कर मुरादाबाद की मुस्लिम बहुल सीट कांठ को चुना.

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कमाल साल 2022 में कांठ से विधायक बने, 2024 में लोकसभा चुनाव मुरादाबाद से लड़ना चाहते थे, लेकिन आजम खान के चलते उन्हें टिकट नहीं मिला. आजम खान ने बिजनौर की रहने वाली रुचि वीरा को टिकट दिला दिया, 

कमाल अख्तर और रुचि वीरा के बीच सियासी अनबन यहीं से शुरू हो गई. रुचि वीरा सांसद बनने के बाद से मुरादाबाद की सियासत में अपना दखल बढ़ाना शुरू कर दिया, जो कमाल अख्तर को रास नहीं आ रहा था. लोकसभा सांसद रुचि वीरा मुरादाबाद शहर सीट से 2027 के चुनाव में अपनी बेटी स्वाति वीरा को चुनाव लड़ाना चाहती हैं. 

रुचि वीरा के बढ़ते सियासी दखल और उनके बेटी के चुनाव लड़ने की संभावना को देखते हुए वकमाल अख्तर खुद को असहज मान रहे हैं. कमाल अख्तर की नजर मुरादाबाद की सियासत पर अपने वर्चस्व के बनाए रखने की है, लेकिन रुचि वीरा भी अपनी पकड़ को ढीली नहीं होने देना चाहती हैं.

रुचि वीरा और साथ में उनकी बेटी को भी टिकट मिलता है तो मुरादाबाद की सियासत में उनकी पकड़ मजबूत हो सकती हैं, जिसे लेकर कमाल अख्तर के साथ शह-मात का खेल चल रहा है. इस खेल में आजम खान ने साबित कर दिया है कि सपा में अभी भी उनकी पकड़ पहले की तरह मजबूत है. 

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