चोरी, गबन और साजिश का भंडाफोड़... कौन हैं ट्रस्टी कृष्ण मोहन? जिनकी शिकायत पर राम मंदिर मामले में 8 लोग हुए गिरफ्तार

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और गहनों की कथित चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट के बाद आठ लोगों पर केस दर्ज हुआ है. यह केस ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज हुआ. शिकायत में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य बड़े पदाधिकारियों का नाम नहीं है.

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ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत के बाद जांच तेज (Photo: ITG) ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत के बाद जांच तेज (Photo: ITG)

मयंक शुक्ला

  • अयोध्या, उत्तर प्रदेश,
  • 26 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:15 AM IST

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और गहनों की कथित चोरी का मामला अब बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है. इस मामले में SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया है. लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ छोटे कर्मचारियों को ही फंसाया जा रहा है, जबकि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी जांच से बाहर हैं. 

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इसी बीच यह जानना भी जरूरी हो गया है कि आखिर वो ट्रस्टी कृष्ण मोहन कौन हैं, जिनकी शिकायत पर यह केस दर्ज हुआ है.

राम मंदिर में भक्तों की तरफ से चढ़ावे के रूप में जो पैसा और गहने दिए जाते हैं, उनमें चोरी होने की बात सामने आई थी. इसकी जांच के लिए एक SIT यानी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई गई थी. 

इस टीम ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी. इसके बाद अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के नाम से केस दर्ज किया गया. यह केस राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज हुआ है.

जिन आठ लोगों पर केस दर्ज हुआ है, उनके नाम हैं रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अविनाश, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, सुभाष चंद्र, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा. 

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इन सभी के खिलाफ चोरी, गबन और साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हुआ है. अगर आरोप साबित होते हैं तो आरोपियों को लंबी सजा हो सकती है.

कृष्ण मोहन कौन हैं?

जिस ट्रस्टी की शिकायत पर यह केस दर्ज हुआ है, उनका नाम कृष्ण मोहन है. वे हरदोई के रहने वाले हैं और सितंबर 2025 में उन्हें ट्रस्ट का नया ट्रस्टी बनाया गया था. यह जगह कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद खाली हुई थी. 

यह भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में 8 लोग नपे, FIR में चंपत राय का नाम नहीं, विपक्ष ने उठाए सवाल

कृष्ण मोहन ने पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है. इसके बाद उन्होंने एटॉमिक एनर्जी विभाग में कुछ साल काम किया और फिर भारतीय वन सेवा में चुने गए, जहां उन्होंने महाराष्ट्र में काम किया. 2012 में रिटायर होने के बाद वे समाज सेवा के काम में जुट गए और इसी पहचान के चलते उन्हें ट्रस्ट में जगह मिली.

फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और लोग जानना चाहते हैं कि क्या आगे बड़े नामों पर भी कार्रवाई होगी या नहीं.

विवाद क्यों बढ़ा?

इस केस में सबसे बड़ा विवाद यह है कि जिन आठ लोगों के नाम केस में हैं, वे सब निचले स्तर के कर्मचारी हैं. लेकिन ट्रस्ट के बड़े नामों जैसे महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम कहीं नहीं है. 

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विपक्ष भी इस पर सवाल उठा रहा है. समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने कहा कि छोटे कर्मचारियों को फंसाया जा रहा है और बड़े लोगों को बचाया जा रहा है. उनका कहना है कि एसआईटी की रिपोर्ट पहले से तय करके बनाई गई लगती है. 

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी आरोप लगाया कि उन्होंने खुद SIT को जमीन घोटाले से जुड़े दस्तावेज दिए थे, जिनमें चंपत राय और कुछ और बड़े लोगों का नाम आना तय था, लेकिन ध्यान भटकाने के लिए छोटे कर्मचारियों पर केस कर दिया गया.

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