कानपुर में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है. जिले के करीब 176 गांवों को अलर्ट पर रखा गया है. नदी के किनारे बसे निचले इलाकों में विशेष निगरानी की जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव टीमों को तैयार रखा गया है.
बुधवार को गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया. घाटों और नदी के किनारे सुरक्षा बढ़ाई गई है, ताकि लोग तेज बहाव वाले पानी के करीब न पहुंचें. खास तौर पर बच्चों और युवाओं पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि बाढ़ के दौरान नदी में उतरना या सेल्फी के लिए किनारे तक जाना जानलेवा साबित हो सकता है. गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिले के बाढ़ संभावित क्षेत्रों में आने वाले करीब 176 गांवों को अलर्ट किया गया है. इन गांवों में प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों और निर्धारित शेल्टर होम में जाने की सलाह दी गई है. प्रशासन का जोर इस बात पर है कि पानी बढ़ने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में किसी तरह की देरी न हो. इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को सक्रिय रखा गया है.
35 स्थानों पर पुलिस की तैनाती
कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक बाढ़ संभावित इलाकों में करीब 35 स्थानों पर पुलिस पोस्ट स्थापित की गई हैं. इन स्थानों से नदी के किनारे और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है. उन्होंने बताया कि गंगा किनारे के इलाकों का निरीक्षण कर राहत और बचाव की तैयारियों की समीक्षा की गई है. नदी के किनारे विशेष निगरानी के साथ ही निचले इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है. घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है, ताकि किसी हादसे को समय रहते रोका जा सके. बाढ़ की स्थिति में राहत और बचाव कार्य के लिए 36 सदस्यीय NDRF टीम को तैनात किया गया है. इसके अलावा एक पूरी फ्लड कंपनी और करीब 100 प्रशिक्षित गोताखोरों को भी तैयार रखा गया है. बचाव अभियान में होमगार्ड, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) और सिविल पुलिस के जवान भी लगाए गए हैं. यानी प्रशासन ने केवल निगरानी ही नहीं, बल्कि किसी भी संभावित आपात स्थिति में तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने के लिए पर्याप्त संसाधन तैयार रखे हैं.
नदी किनारे जाने वालों पर खास नजर
बाढ़ के दौरान सबसे बड़ा खतरा उन लोगों से होता है जो तेज बहाव के बावजूद नदी के नजदीक जाने की कोशिश करते हैं. कानपुर में पुलिस ने इसको लेकर विशेष सतर्कता बरती है. पुलिस की नजर खास तौर पर बच्चों और युवाओं पर है. अधिकारियों का कहना है कि लोगों को नदी में उतरने, नहाने या पानी के तेज बहाव वाले हिस्सों में जाने से रोकने के लिए घाटों पर निगरानी बढ़ाई गई है. नदी के किनारे ऐसे स्थानों को भी खाली कराया गया है, जहां पहले हादसे हो चुके हैं. प्रशासन का प्रयास है कि पानी बढ़ने के साथ कोई व्यक्ति खतरे वाले क्षेत्र में फंस न जाए. किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के समन्वय से इमरजेंसी कंट्रोल रूम भी सक्रिय किए गए हैं. इन कंट्रोल रूम के जरिए संवेदनशील इलाकों की जानकारी जुटाने और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव टीमों को तत्काल मौके पर भेजने की व्यवस्था की गई है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जरूरी संसाधनों को तैयार रखा गया है. जलस्तर में अचानक वृद्धि होने या किसी गांव में पानी पहुंचने की स्थिति में स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर राहत कार्य शुरू किया जाएगा.
कानपुर बैराज पर चेतावनी स्तर के करीब पानी
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार कानपुर बैराज के गेज पर गंगा का जलस्तर अपस्ट्रीम में 113.570 मीटर और डाउनस्ट्रीम में 113.420 मीटर दर्ज किया गया. कानपुर बैराज पर चेतावनी स्तर 114 मीटरऔर खतरे का निशान 115 मीटर है. इस लिहाज से पानी अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. अधिकारियों की नजर इस बात पर है कि अगले कुछ घंटों में नदी का जलस्तर किस रफ्तार से बदलता है. पानी में लगातार वृद्धि होने की स्थिति में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया तेज की जा सकती है. शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर 112.180 मीटर दर्ज किया गया है. यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है. यानी शुक्लागंज में भी पानी चेतावनी स्तर से नीचे है, लेकिन अंतर बहुत ज्यादा नहीं है. इसी वजह से प्रशासन संवेदनशील इलाकों में पहले से तैयारियों को मजबूत कर रहा है.
कानपुर में गंगा के किनारे बड़ी आबादी रहती है. शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी कई गांव नदी और उसके आसपास के निचले क्षेत्रों में बसे हैं. जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले इन इलाकों पर असर पड़ने की आशंका रहती है. बाढ़ की स्थिति केवल खेतों और रास्तों तक सीमित नहीं रहती. पानी बढ़ने पर आवागमन, पशुओं की सुरक्षा, बिजली आपूर्ति और ग्रामीणों की रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं. इसलिए प्रशासन ने इस बार जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंचने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही निगरानी और बचाव की व्यवस्था मजबूत कर दी है.
प्रशासन की अपील- नदी के पास न जाएं
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के दौरान नदी और उसके आसपास के प्रतिबंधित अथवा संवेदनशील क्षेत्रों में न जाएं. बच्चों को विशेष रूप से नदी के किनारे जाने से रोकने को कहा गया है. तेज बहाव में पानी शांत दिखाई दे सकता है, लेकिन सतह के नीचे बहाव की गति काफी ज्यादा हो सकती है. ऐसे में नदी में उतरना या किनारे पर खड़े होकर फोटो और वीडियो बनाना भी जोखिम भरा हो सकता है.
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