तेंदुए के जबड़े से बेटे को खींच लाया 65 साल का पिता: 5 मिनट तक चला संघर्ष, आखिर जंगली जानवर को माननी पड़ी हार

Bijnor Leopard Attack: जब गुलाम नबी ने बेटे की चीख सुनी और डंडा लेकर 250 मीटर दूर जंगल की ओर दौड़ पड़े. सामने का मंजर देख वह रुके नहीं, बल्कि सीधे उस तेंदुए पर टूट पड़े जिसने रफी को दबोच लिया था.

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बिजनौर में चरवाहे पर जानलेवा हमला.(Photo:ITG) बिजनौर में चरवाहे पर जानलेवा हमला.(Photo:ITG)

ऋतिक राजपूत

  • बिजनौर ,
  • 16 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:01 PM IST

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में बेटे की जान बचाने के लिए 65 वर्षीय पिता ने तेंदुए से सीधे मोर्चा ले लिया. जंगल में पशु चराने गए बेटे पर घात लगाकर बैठे तेंदुए ने हमला कर उसे दबोच लिया. बेटे की चीख सुनकर पिता डंडा लेकर करीब 250 मीटर दूर स्थित डेरे से दौड़ते हुए मौके पर पहुंचा. वहां का मंजर देखकर उसने बिना अपनी जान की परवाह किए जंगली जानवर पर डंडे बरसाना शुरू कर दिया. तेंदुआ कई बार गुर्राकर पिता को डराने की कोशिश करता रहा, लेकिन वह पीछे नहीं हटा. करीब पांच मिनट तक चले इस संघर्ष के बाद आखिरकार तेंदुए को ही पीछे हटना पड़ा और वह जंगल की ओर भाग गया.

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तेंदुए के हमले में युवक के हाथ और कमर पर गंभीर चोटें आई हैं. शरीर से खून निकलता देख ग्रामीणों ने तत्काल उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे घर भेज दिया. घटना शनिवार सुबह करीब 8 बजे बिजनौर की सहानपुर रेंज के मोथला उर्फ नीम वाली वन क्षेत्र की बताई जा रही है.

पशु चराने जंगल गया था रफी 

जानकारी के मुताबिक, मोथला उर्फ नीम वाली वन क्षेत्र में पशुपालक रफी (33) अपने परिवार के साथ डेरा बनाकर रहते हैं. शनिवार सुबह करीब 8 बजे रफी रोज की तरह गाय-भैंस चराने के लिए जंगल की तरफ गए थे. इसी दौरान जंगल में घात लगाए बैठे तेंदुए ने अचानक उन पर हमला कर दिया.

अचानक हुए हमले से रफी संभल नहीं पाए. तेंदुए ने उन्हें दबोच लिया. अपनी जान बचाने के लिए रफी जोर-जोर से चीखने लगे. उनकी चीख सुनकर करीब 250 मीटर दूर डेरे पर मौजूद उनके पिता गुलाम नबी (65) को अनहोनी का अंदेशा हुआ. वह तत्काल डंडा लेकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े.
 
बेटे को तेंदुए के कब्जे में देखा तो छोड़ा अपनी जान का डर  

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मौके पर पहुंचकर गुलाम नबी ने देखा कि तेंदुआ उनके बेटे रफी को दबोचे हुए है. बेटे को जानवर के पंजों में फंसा देखकर उन्होंने अपनी सुरक्षा की परवाह नहीं की और सीधे तेंदुए पर हमला कर दिया.

गुलाम नबी ने डंडे से तेंदुए को पीटना शुरू कर दिया. इसके बावजूद तेंदुए ने रफी को तुरंत नहीं छोड़ा. पिता लगातार डंडे बरसाते रहे और आदमखोर को पीछे हटाने की कोशिश करते रहे.

इस दौरान तेंदुआ कई बार गुलाम नबी की तरफ देखकर जोर-जोर से गुर्राया. उसके गुर्राने से किसी भी व्यक्ति के हौसले पस्त हो सकते थे, लेकिन बेटे को बचाने के जुनून में गुलाम नबी पीछे नहीं हटे. वह लगातार तेंदुए पर वार करते रहे.

 करीब 5 मिनट तक चला संघर्ष, आखिर तेंदुए को माननी पड़ी हार 

तेंदुए और गुलाम नबी के बीच करीब पांच मिनट तक संघर्ष चलता रहा. एक तरफ तेंदुए अपने शिकार को छोड़ने को तैयार नहीं था, तो दूसरी तरफ बुजुर्ग पिता बेटे की जिंदगी बचाने के लिए लगातार उससे भिड़ा रहा.

लगातार डंडे पड़ने के बाद आखिरकार तेंदुए ने रफी को छोड़ दिया. इसके बाद वह वहां से पीछे हटकर जंगल की ओर भाग गया. तेंदुए के जंगल में चले जाने के बाद गुलाम नबी ने अपने घायल बेटे को संभाला.

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घटना के बाद मौके पर आसपास के लोग भी जुट गए. रफी के हाथ और कमर पर तेंदुए के पंजों से चोट आई थी और उसके शरीर से खून निकल रहा था. ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना ग्राम प्रधान हरविंदर कौर के पति नरवेल सिंह को दी. नरवेल सिंह मौके पर पहुंचे और घायल रफी को उपचार के लिए सीएचसी भिजवाया.

घायल बेटे ने कहा- पिता नहीं होते तो शायद मेरी जान नहीं बचती 

घायल रफी ने अपने पिता की बहादुरी को याद करते हुए कहा कि अगर गुलाम नबी समय पर मौके पर नहीं पहुंचते तो उसकी जान बचना मुश्किल था. रफी के मुताबिक, उसके पिता करीब पांच मिनट तक तेंदुए से भिड़ते रहे और लगातार डंडे मारते रहे. आखिरकार तेंदुए उसे छोड़कर जंगल की तरफ भाग गया.

पिता के इस साहस की चर्चा अब इलाके में हो रही है. एक तरफ तेंदुए के अचानक हमले से ग्रामीणों में दहशत है, वहीं दूसरी तरफ बेटे को बचाने के लिए बुजुर्ग पिता के साहस ने लोगों को हैरान कर दिया है.

वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची 

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची. क्षेत्रीय वन अधिकारी विकास कुमार और वन दरोगा मोहित कुमार ने घटनास्थल का जायजा लिया और आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी.

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वन दरोगा मोहित कुमार के मुताबिक, इस क्षेत्र में वन गुर्जर जंगल में रहकर पशुपालन करते हैं. विभाग की ओर से उन्हें कई बार जंगल में न रहने की सलाह दी जा चुकी है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पिंजरा लगाना संभव नहीं है. देखें एक VIDEO:- 

जंगल के आसपास रहने वाले पशुपालकों में बढ़ी चिंता 

तेंदुए के इस हमले के बाद जंगल के आसपास डेरा डालकर रहने वाले पशुपालकों में चिंता बढ़ गई है. पशुओं को चराने के लिए जंगल की ओर जाने वाले लोगों के सामने अब  हमले का खतरा बना हुआ है. घटना ने यह भी दिखा दिया कि जंगल क्षेत्र में पशुओं के साथ जाने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है. फिलहाल वन विभाग ने ग्रामीणों और पशुपालकों को सावधान रहने की सलाह दी है.

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