दुनिया घूमने का शौक तो आपने बहुत लोगों का सुना होगा. क्या कभी किसी ऐसे शख्स के बारे में सुना है ,जो खास तौर पर कब्रिस्तानों को देखने के लिए दुनिया घूमता हो? अमेरिका के अटलांटा की रहने वाली 58 साल की ट्रेसी रायलैंड्स का शौक कुछ ऐसा ही है.
वह अमेरिका के 35 राज्यों के अलावा ब्रिटेन और कनाडा के सैकड़ों कब्रिस्तान घूम चुकी हैं. कई लोगों को उनका यह शौक अजीब या डरावना लग सकता है, लेकिन ट्रेसी के लिए कब्रिस्तान इतिहास, खूबसूरती और अनकही कहानियों से भरी जगह हैं.
ट्रेसी कहती हैं कि उन्हें उन लोगों की कहानियां जानना पसंद है, जिनके बारे में शायद दुनिया अब कुछ नहीं जानती. वह कब्रों की तस्वीरें खींचती हैं, वहां दफन लोगों के बारे में रिसर्च करती हैं और उनकी कहानियां उनके परिवारों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं.
अखबार में काम करते हुए शुरू हुआ कब्रों से जुड़ाव
कब्रिस्तानों को एक्सप्लोर करने का ट्रेसी का शौक अचानक शुरू नहीं हुआ. यूनिवर्सिटी के दिनों में वह एक स्थानीय अखबार में इंटर्न थीं. वहां वह मृत्युलेख यानी ऑबिच्यूरी लिखती थीं और अंतिम संस्कार से जुड़े काम करने वाले लोगों के संपर्क में भी आती थीं. यहीं से उन्हें लोगों की जिंदगी और उनकी मौत से जुड़ी कहानियों में दिलचस्पी पैदा हुई.
बाद में बेटे के जन्म के बाद उन्हें 'फाइंड एक ग्रेव ' नाम की वेबसाइट के बारे में पता चला. इस वेबसाइट पर दुनिया भर के कब्रिस्तानों और वहां दफन लोगों की जानकारी जुटाई जाती है. ट्रेसी को पता चला कि लोग दूसरों की कब्रों की तस्वीरें खींचकर वेबसाइट पर साझा करने में मदद कर सकते हैं.
वह कहती हैं कि मैंने सीखा कि आप लोगों की कब्रों की तस्वीरें खींचने के लिए वॉलंटियर कर सकते हैं. अगर किसी की आंटी स्कॉटलैंड में दफन है और परिवार वहां नहीं जा सकता, तो कोई स्थानीय व्यक्ति उनकी कब्र की तस्वीर ले सकता है. मुझे यह काफी अच्छा लगा और इससे घर से बाहर निकलने का मौका भी मिलता.
गुलामों के वंशजों की कब्रों से शुरू हुआ खास सफर
उनके शुरुआती प्रोजेक्ट्स में से एक ऐसी जगह की कब्रों को रिकॉर्ड करना था, जहां एक पुराने प्लांटेशन के पास गुलाम बनाए गए लोगों के वंशज दफन थे. इस काम ने ट्रेसी की दिलचस्पी को और बढ़ा दिया.
इसके बाद वह जब भी किसी कब्रिस्तान में जातीं, सिर्फ कब्र की तस्वीर लेकर वापस नहीं आती थीं. वह वहां दफन व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाने लगतीं. जन्म और मृत्यु की तारीख से लेकर अखबारों में छपी खबरों और परिवार से जुड़ी जानकारी तक, वह हर संभव चीज तलाशती हैं.वह अपनी खोजी हुई कहानियों को परिवार के सदस्यों के साथ साझा करती हैं या अपने ब्लॉग पर लिखती हैं.
एक कब्र ने सुनाई स्पेनिश फ्लू की कहानी
ट्रेसी के लिए कब्रों की सबसे खास बात यही है कि एक छोटा सा पत्थर भी किसी बड़ी कहानी का सुराग दे सकता है. नेब्रास्का के एक कब्रिस्तान में उन्हें एक युवा दंपति की कब्र मिली. दोनों की उम्र 20 साल के आसपास थी और उनकी मौत एक-दूसरे की मौत के करीब एक-दो हफ्ते के अंदर हुई थी.
ट्रेसी ने जब उनके बारे में रिसर्च की तो पता चला कि दोनों की मौत स्पेनिश फ्लू महामारी के दौरान हुई थी. उन्हें एक पुरानी अखबार की खबर भी मिली, जिसमें बताया गया था कि इस दंपति के अंतिम संस्कार शहर के बीचोंबीच किए गए थे, क्योंकि वे समुदाय में काफी लोकप्रिय थे और उनकी मौत से पूरा इलाका दुखी था.
ट्रेसी के मुताबिक, अगर वह उस कब्र के बारे में आगे जानकारी नहीं जुटातीं तो शायद इस दंपति की कहानी हमेशा के लिए भुला दी जाती.
'हर कब्र के पीछे एक कहानी है'
ट्रेसी मानती हैं कि हर कब्र, चाहे वह कितनी भी साधारण क्यों न हो, अपने अंदर एक कहानी छिपाए होती है. वह कहती हैं कि कई कब्रों पर सिर्फ छोटे से निशान होते हैं. कभी-कभी किसी इंसान के पीछे सिर्फ वही निशान बचा होता है. कुछ लोगों का नाम जनगणना में नहीं मिलता, कोई कागज नहीं होता और अखबारों में भी उनके बारे में कुछ नहीं छपा होता. उन्होंने कोई बड़ा काम नहीं किया, लेकिन अपने परिवार के लिए वे बहुत महत्वपूर्ण थे.
यही वजह है कि वह उन लोगों की कहानियां खोजने में भी दिलचस्पी रखती हैं, जिनके बारे में शायद ही कोई बात करता हो.
छोटे से लेकर कई बड़ हस्तियों के कब्र देख चुकी
ट्रेसी की यात्राएं सिर्फ आम कब्रिस्तानों तक सीमित नहीं हैं. वह राष्ट्रपतियों, नागरिक अधिकारों के नेताओं और मशहूर साहित्यकारों की कब्रें भी देख चुकी हैं.उनका लक्ष्य अमेरिका के सभी राष्ट्रपतियों की कब्रों तक पहुंचना है. अब तक वह करीब आधे राष्ट्रपतियों की कब्रें देख चुकी हैं. उन्होंने नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की कब्र भी देखी है.
अपने पति क्रिस के साथ वह ऑक्सफोर्ड में मशहूर लेखक सी.एस. लुईस की कब्र पर भी गई थीं. इसके अलावा उन्होंने वेस्टमिंस्टर एबे का दौरा किया, जहां क्वीन एलिजाबेथ प्रथम दफन हैं. ट्रेसी के लिए छुट्टियों का मतलब सिर्फ घूमना-फिरना नहीं है. उनके दोस्त और पति जानते हैं कि किसी यात्रा के दौरान कब्रिस्तान का एक 'डिटोर' जरूर हो सकता है.
'कब्रिस्तान डरावनी जगह नहीं, एक तरह का म्यूजियम है'
लोग अक्सर कब्रिस्तान को डर और भूतों से जोड़ते हैं. लेकिन ट्रेसी का कहना है कि वह वहां भूत देखने या आत्माओं से बात करने नहीं जातीं. वह कहती हैं कि मुझसे पूछा जाता है कि क्या मैं आत्माओं से बात करती हूं. नहीं, मैं ऐसा नहीं करती. कुछ लोग ऐसा करते हैं और वह भी ठीक है, लेकिन मैं ऐसा नहीं करती.
उनके लिए कब्रिस्तान एक तरह के लिविंग म्यूजियम हैं. उनका मानना है कि आज की तेज जिंदगी के बीच कब्रिस्तान इंसान को कुछ देर रुकने और अतीत को समझने का मौका देते हैं.
वह कहती हैं कि आज इंटरनेट, जानकारी, खाना और शहर, सब कुछ तेजी से आगे बढ़ रहा है. लेकिन कब्रिस्तान तेज नहीं होते. वहां धीरे-धीरे चला जा सकता है, आसपास देखा जा सकता है और बीते समय को महसूस किया जा सकता है. वह कहती है कि जो कब्रिस्तान को उदास जगह मानते हैं, मुझे उन पर अफसोस होता है.
कई लोग ट्रेसी के इस शौक को अजीब या 'घिनौना' तक मानते हैं. लेकिन वह इससे बिल्कुल परेशान नहीं होतीं. वह कहती हैं कि मैं ऐसे लोगों को जानती हूं जो कब्रिस्तान को उदास जगह मानते हैं और सच कहूं तो मुझे उनके लिए अफसोस होता है.
ट्रेसी बताती हैं कि पुराने दौर में कई कब्रिस्तान पार्क जैसे बनाए जाते थे, जहां लोग किताब पढ़ते थे, पिकनिक करते थे या रविवार की सैर पर जाते थे. उनका मकसद सिर्फ दुख या डर पैदा करना नहीं था.
उन्हें कब्रिस्तानों में मिलने वाला कभी-कभी का हास्य भी पसंद है. मसलन, उन्हें ऐसी कब्रें दिलचस्प लगती हैं जहां किसी महिला के दोनों तरफ उसके दो पति दफन हों या किसी पुरुष के बीच में उसकी दो पत्नियों की कब्रें हों.
अपनी कब्र कहां होगी, ट्रेसी को नहीं पता
दूसरों की कब्रों की तलाश में दुनिया घूमने वाली ट्रेसी ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि उनकी अपनी आखिरी जगह कहां होगी. वह कहती हैं कि संभव है कि उनकी अस्थियां परिवार के पास किसी खूबसूरत कब्रिस्तान में रखी जाएं. लेकिन फिलहाल उन्होंने इस बारे में कोई फैसला नहीं किया है.
हालांकि एक कब्रिस्तान ऐसा है, जहां वह कैमरा और नोटबुक लेकर नहीं, बल्कि फूल लेकर जाती हैं. वह उनके पिता लैरी की कब्र है. ट्रेसी बताती हैं कि उनके पिता लंबे समय से बीमार थे. एक दिन परिवार उनके लिए कब्र की जगह चुनकर घर लौटा. इसके करीब आधे घंटे बाद, ठीक दोपहर 12 बजे, उनके पिता का निधन हो गया.
परिवार ने उनके साथ धार्मिक पाठ पढ़े और अपनी बातें कहीं. उनके पिता उस समय बोल नहीं पा रहे थे, लेकिन परिवार को यकीन था कि वह उनकी बातें सुन रहे थे. उन्होंने परिवार के बीच शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली.
ट्रेसी के लिए वह पल आज भी उनकी जिंदगी की सबसे यादगार घटनाओं में से एक है. शायद यही वजह है कि उनके लिए कब्रिस्तान सिर्फ मौत की जगह नहीं हैं. उनके लिए ये उन लोगों की आखिरी निशानी हैं, जिनकी जिंदगी में कभी कोई परिवार, कोई प्यार, कोई सपना और कोई कहानी हुआ करती थी. वह उन्हीं भूली-बिसरी कहानियों को फिर से सामने लाने के लिए दुनिया भर के कब्रिस्तानों की यात्रा करती हैं.
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