कभी-कभी दिन की शुरुआत ही ऐसी होती है कि ऑफिस जाने का मन नहीं करता. दिमाग में काम का तनाव और चेहरे पर थकान होती है. कुछ ऐसा ही एक शख्स के साथ हुआ. वह ऑफिस के लिए निकला था, लेकिन रास्ते में उसे एक ऐसा ऑटो मिला, जिसने सिर्फ 3 किलोमीटर के सफर में उसका पूरा मूड बदल दिया. इस ऑटो में सिर्फ सीट और मीटर नहीं था, बल्कि, सीसीटीवी पानी, चॉकलेट, सैनिटाइजर, परफ्यूम, डस्टबिन और यहां तक कि बबल गन भी थी. सफर खत्म हुआ तो शख्स के चेहरे पर तनाव की जगह मुस्कान थी और उसके मुंह से बस यही निकला- सही लोग साथ हों तो रिक्शा भी मर्सिडीज बन जाती है.
ऑफिस जाने के लिए निकला एक शख्स तनाव में था. दिन शुरू होने से पहले ही उसका मूड खराब था और काम करने का बिल्कुल मन नहीं था. लेकिन सिर्फ 3 किलोमीटर के एक ऑटो सफर ने उसका पूरा मूड बदल दिया. ऑटो में बैठते ही उसे ऐसी कई चीजें नजर आईं, जो आमतौर पर किसी ऑटो में देखने को नहीं मिलतीं. इस खास ऑटो में सीसीटीवी कैमरा, परफ्यूम, चॉकलेट, पानी, सैनिटाइजर, बबल गन, डस्टबिन और राधा-कृष्ण की तस्वीर तक लगी थी. इतना ही नहीं, यात्रियों के लिए फीडबैक डायरी भी रखी गई थी. यानी ड्राइवर ने छोटी सी सवारी को भी ऐसा अनुभव बनाने की कोशिश की थी, जिसे यात्री याद रख सके.
ऑटो में बैठते ही दिखीं ये खास चीजें
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए इस अनुभव में यात्री ने बताया कि वह ऑफिस के लिए निकला था और काफी तनाव में था. उसे आने वाला दिन भी खास अच्छा नहीं लग रहा था. लेकिन ऑटो में बैठने के बाद एक-एक करके उसकी नजर वहां रखी चीजों पर गई. सीसीटीवी से सुरक्षा का एहसास हुआ, वहीं पानी, सैनिटाइजर और डस्टबिन जैसी सुविधाएं देखकर उसे लगा कि ड्राइवर यात्रियों की छोटी जरूरतों का भी ध्यान रखता है. इसके अलावा ऑटो में चॉकलेट, परफ्यूम, बबल गन और राधा-कृष्ण की तस्वीर जैसी चीजें भी थीं. यात्री ने मजाकिया अंदाज में कहा कि शायद ऑटो में और भी कई ऐसी चीजें थीं, जिन पर उसकी नजर ही नहीं गई.
बीएमडब्ल्यू वाले ग्राहक की कहानी भी सुनाई
इस ऑटो के ड्राइवर ने यात्री को एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया. उसने बताया कि एक बार एक ग्राहक की बीएमडब्ल्यू सर्विस सेंटर में गई हुई थी. मजबूरी में उस व्यक्ति ने इसी ऑटो से सफर किया. लेकिन सफर खत्म होने के बाद उस ग्राहक ने कहा कि उसे बीएमडब्ल्यू के मुकाबले इस ऑटो में ज्यादा मजा आया. यह बात सुनने में भले ही मजेदार लगे, लेकिन इस कहानी का एक अलग पहलू भी है. महंगी कार आपको आराम और स्टेटस दे सकती है, लेकिन सफर को यादगार बनाने के लिए हमेशा महंगी गाड़ी जरूरी नहीं होती.
3 किलोमीटर में बदल गया पूरा दिन
यात्री ने बताया कि वह जब ऑटो में बैठा था, तब वह तनाव में था और ऑफिस जाने का बिल्कुल मन नहीं था. लेकिन सिर्फ 3 किलोमीटर के सफर के बाद उसका मूड पूरी तरह बदल चुका था. यही वजह है कि उसने इस ऑटो के अनुभव को सिर्फ एक सामान्य यात्रा नहीं माना. उसके लिए यह 3 किलोमीटर का सफर दिन की शुरुआत में एक छोटी सी खुशी जैसा बन गया. कई बार हम सफर में सिर्फ अपनी मंजिल देखते हैं. लेकिन यह ऑटो दिखाता है कि अगर कोई अपने काम में थोड़ी सी संवेदनशीलता और अपनापन जोड़ दे, तो कुछ मिनट का सफर भी यादगार बन सकता है. शायद इसी वजह से इस ऑटो को देखकर कहा जा सकता है- सही लोगों के साथ सफर हो, तो ऑटो भी मर्सिडीज जैसा लग सकता है.
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