स्कूल की ड्रेस बच्चों की पहचान होती है. सफेद शर्ट, स्कर्ट और घुटनों तक के मोजे... ये कपड़े पढ़ाई और स्कूल से जुड़े होते हैं. लेकिन ब्रिटेन में दो छात्राओं ने स्कूल यूनिफॉर्म के एक ऐसे इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं, जो उनके मुताबिक लड़कियों को असहज और असुरक्षित महसूस कराता है.
उनका कहना है कि पोर्नोग्राफी में स्कूल ड्रेस को जिस तरह दिखाया जाता है, उससे बच्चों को लेकर गलत नजरिया बढ़ सकता है. इसी वजह से वे पोर्नोग्राफी में स्कूल यूनिफॉर्म के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग कर रही हैं.
डीडब्लू की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के ऑक्सफोर्डशायर के बिसेस्टर में रहने वाली 15 साल की आयलिन और मे अपने स्कूल के 'लिटिल फेमिनिस्ट बुक क्लब' की सदस्य हैं. एक दिन क्लब में चर्चा के दौरान उन्हें पता चला कि कुछ स्कूलों के छात्र सेक्स शॉप में स्कूल यूनिफॉर्म की बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं.
इसके बाद दोनों ने इस मुद्दे को और आगे ले जाने का फैसला किया. उन्होंने पोर्नोग्राफी में स्कूल यूनिफॉर्म के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक ऑनलाइन याचिका शुरू की.
स्कूल ड्रेस को लेकर क्यों उठे सवाल?
आयलिन और मे का कहना है कि स्कूल यूनिफॉर्म का मकसद बच्चों को स्कूल से जोड़ना और उनमें एक जैसी पहचान की भावना पैदा करना है. लेकिन जब इसी ड्रेस को पोर्नोग्राफी में दिखाया जाता है, तो उसके प्रति लोगों का नजरिया प्रभावित हो सकता है.
दोनों छात्राओं के मुताबिक, उनकी कई साथी छात्राओं को स्कूल यूनिफॉर्म पहनने के दौरान परेशान किए जाने का अनुभव हुआ है. याचिका में बताया गया है कि कुछ लड़कियों ने 11 साल की उम्र से ही इस तरह की घटनाओं का सामना करने की बात कही.
मे ने बताया कि वह स्कूल के बाहर अपनी यूनिफॉर्म पहनना पसंद नहीं करतीं. इसकी वजह यह है कि उन्हें इसमें असहज महसूस होता है. छात्राओं का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.
सर्वे में क्या सामने आया?
अपनी याचिका में दोनों छात्राओं ने प्लान इंटरनेशनल नाम की संस्था की 2018 की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया है. इस रिपोर्ट में 14 से 21 साल की उम्र के 1,004 लोगों पर किए गए सर्वे के मुताबिक, 35 फीसदी प्रतिभागियों ने स्कूल यूनिफॉर्म पहनने के दौरान अनचाहे यौन व्यवहार या ध्यान का सामना करने की बात कही थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, 8 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि किसी अनजान व्यक्ति ने उनकी अनुमति के बिना उनकी तस्वीर या वीडियो बनाया था. इनमें स्कर्ट के नीचे से तस्वीर खींचने जैसी घटनाएं भी शामिल थीं. इस हरकत को 'अपस्कर्टिंग' कहा जाता है.
छात्राओं का कहना है कि स्कूल यूनिफॉर्म ऐसी चीज है, जो बच्चों के लिए सामान्य और सहज होनी चाहिए. लेकिन जब इसका इस्तेमाल अश्लील कंटेंट में किया जाता है, तो इससे जुड़ी गलत धारणाएं पैदा हो सकती हैं. उनके मुताबिक, इस समस्या पर बात करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इसका असर लड़कियों के आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना पर पड़ सकता है.
ब्रिटेन में स्कूल यूनिफॉर्म इतनी आम क्यों है?
ब्रिटेन में स्कूल यूनिफॉर्म पहनने की परंपरा काफी पुरानी है. वहां ज्यादातर स्कूलों में बच्चों के लिए यूनिफॉर्म पहनना जरूरी होता है. इसका एक उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच आर्थिक अंतर को कम दिखाना है, ताकि कपड़ों को लेकर भेदभाव और बुलिंग की आशंका घटे. इसके अलावा यूनिफॉर्म से बच्चों में स्कूल और अपने साथियों के प्रति जुड़ाव की भावना भी बढ़ती है.
लेकिन आयलिन और मे का कहना है कि स्कूल के बाहर भी बच्चों को अनचाहे व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में सिर्फ स्कूल के अंदर सुरक्षा देना पर्याप्त नहीं है. उनके मुताबिक, स्कूल यूनिफॉर्म को पोर्नोग्राफी में इस्तेमाल किए जाने पर रोक लगाने की जरूरत है, ताकि बच्चों को लेकर इस तरह की सोच को बढ़ावा न मिले.
क्या स्कूल यूनिफॉर्म पर रोक लगाने के लिए कानून बनेगा?
दोनों छात्राएं चाहती हैं कि उनकी मांग को ब्रिटेन की संसद तक पहुंचाया जाए और इस मुद्दे पर बहस हो. उनका उद्देश्य पोर्नोग्राफी में स्कूल यूनिफॉर्म के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी कदम उठाना है.
5 अक्टूबर 2026 तक उनकी याचिका पर 24 हजार से ज्यादा हस्ताक्षर हो चुके थे. अंग्रेजी अखबार 'द टाइम्स' में इस मुद्दे पर खबर प्रकाशित होने के बाद भी इसे काफी चर्चा मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, दो सांसदों ने भी छात्राओं की मांग का समर्थन किया है.
हालांकि, किसी याचिका पर बड़ी संख्या में हस्ताक्षर होना अपने आप में कानून बनने की गारंटी नहीं है. इसके लिए आगे की कानूनी और संसदीय प्रक्रिया जरूरी होगी. फिलहाल दोनों छात्राएं चाहती हैं कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा हो और बच्चों को परेशान किए जाने की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
लड़कियों के कपड़े नहीं, गलत व्यवहार पर हो सवाल
आयलिन और मे यह भी जानती हैं कि कुछ लोग इस समस्या का समाधान लड़कियों की स्कर्ट लंबी करने या उनके कपड़ों में बदलाव करने को मानते हैं. लेकिन आयलिन इससे सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं के लिए लड़कियों को जिम्मेदार ठहराना गलत है.
उनके मुताबिक, सवाल उन लोगों की सोच और व्यवहार पर उठना चाहिए, जो बच्चों को यौन नजरिए से देखते हैं. किसी लड़की के कपड़े उसे परेशान किए जाने का कारण या उसका औचित्य नहीं हो सकते.
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दोनों छात्राओं की पहल इसी बात पर जोर देती है कि बच्चों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. स्कूल यूनिफॉर्म का उद्देश्य पढ़ाई, अनुशासन और स्कूल से जुड़ाव है. ऐसे में सवाल यह है कि बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के लिए समाज और कानून क्या कदम उठाते हैं.
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