भारत में प्राइवेट नौकरी करने वालों के बीच अक्सर काम के ज्यादा दबाव और लगातार नए टास्क मिलने की चर्चा होती है. लेकिन ब्रिटेन की एक कंपनी में काम कर रहे भारतीय टेक प्रोफेशनल ने अपने अनुभव को इससे बिल्कुल अलग बताया है. उनका कहना है कि कई बार सोमवार को लैपटॉप खोलने के बाद भी उनके पास करने के लिए कोई नया काम नहीं होता. अगर वह खुद मैनेजर को मैसेज न करें, तो दो-तीन दिन तक नया टास्क भी नहीं मिलता.
टेक प्रोफेशनल दिवाकर सिंह ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर अपनी मौजूदा नौकरी के वर्क कल्चर के बारे में बताया.खासकर भारतीय कंपनियों में काम कर चुके लोगों ने उनके अनुभव पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं.
शुक्रवार को प्रोजेक्ट पूरा किया, सोमवार को कोई काम नहीं मिला
दिवाकर ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को एक सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट पूरा करके रिलीज किया था. इसके बाद सोमवार की सुबह उन्होंने अपना लैपटॉप खोला और काम शुरू करने की तैयारी की.उन्होंने सेल्सफोर्स और ईमेल चेक किया, लेकिन कोई नया टास्क नहीं था.
दिवाकर के मुताबिक, अगर वह खुद अपने मैनेजर को मैसेज करके यह नहीं बताते कि वह काम के लिए उपलब्ध हैं, तो संभव है कि उन्हें अगले दो-तीन दिनों तक कोई नया असाइनमेंट न मिले.यही बात उनके लिए सबसे अलग अनुभव है.
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'भारत में एक काम खत्म नहीं होता था, चार-पांच और मिल जाते थे'
दिवाकर ने अपनी मौजूदा नौकरी की तुलना भारत की कंपनियों में काम करने के अनुभव से की.उन्होंने कहा कि पहले जब वह भारतीय कंपनियों में काम करते थे, तब एक टास्क पूरा होने से पहले ही कई नए काम उनकी पेंडिंग लिस्ट में आ जाते थे.उनके शब्दों में, एक काम खत्म होने का मतलब अक्सर तीन-चार नए काम मिलना होता था.यही अंतर उन्होंने ब्रिटेन की कंपनी और भारतीय कंपनियों के वर्क कल्चर के बीच बताया.
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मैनेजर हर वक्त अपडेट नहीं मांगता
दिवाकर ने मैनेजर के रवैये में भी बड़ा अंतर बताया.उनके मुताबिक, भारतीय कंपनियों में काम करने के दौरान मैनेजर लगातार अपडेट मांगते थे. कई बार यह पूछा जाता था कि काम कहां तक पहुंचा और अगला काम कब पूरा होगा.
वहीं, उनकी मौजूदा कंपनी में कर्मचारियों को ज्यादा आजादी मिलती है. मैनेजर हर समय काम की निगरानी नहीं करता. कर्मचारी अपना काम पूरा करते हैं और उसके बाद उन्हें अगले टास्क का इंतजार करना पड़ सकता है.
'खुद मैसेज नहीं किया तो कुछ दिन आराम से बैठ सकते हैं'
दिवाकर ने अपनी पोस्ट में इस स्थिति को मजाकिया अंदाज में भी बताया. उन्होंने लिखा कि शुक्रवार को काम खत्म करने के बाद सोमवार आया. उन्होंने लैपटॉप खोला, सेल्सफोर्स चेक किया, ईमेल देखा और फिर दोबारा सेल्सफोर्स चेक किया.लेकिन नया काम नहीं मिला.
उन्होंने कहा कि अगर वह अपने मैनेजर को खुद मैसेज नहीं करते कि उन्हें काम चाहिए, तो वह अगले कुछ दिनों तक 'शांति से बैठे' रह सकते हैं.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनुभव
दिवाकर की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके अनुभव पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं.एक यूजर ने लिखा कि भारतीय वर्क कल्चर में ऐसा होना मुश्किल है. दूसरे ने इसे 'ड्रीम जॉब' बताया. एक अन्य यूजर ने कहा कि भारत में एक काम खत्म होते ही पांच नए काम सामने आ जाते हैं.एक यूजर ने इस पूरे अनुभव को लिखा कि अलग देश, अलग वर्क कल्चर और अलग समस्याएं.
क्या हर UK कंपनी में ऐसा ही होता है?
दिवाकर का अनुभव उनकी व्यक्तिगत नौकरी और कंपनी से जुड़ा है. इसलिए इसे ब्रिटेन की हर कंपनी या भारत की हर कंपनी के वर्क कल्चर पर लागू करना सही नहीं होगा.
हालांकि, उनकी कहानी ने एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा कर दिया है.क्या ज्यादा काम करना ही बेहतर वर्क कल्चर की निशानी है, या कर्मचारियों को काम के बीच पर्याप्त आजादी और खाली समय मिलना भी उतना ही जरूरी है? उनका वीडियो इसी अंतर को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा बटोर रहा है
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