राष्ट्रपति के साथ हर वक्त मौजूद रहने वाले ADC यानी एड-डि-कैंप की जिंदगी बाहर से जितनी प्रतिष्ठित दिखाई देती है, उसके पीछे उतना ही बड़ा निजी त्याग भी होता है. पूर्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC रहे मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने राज शमानी के पॉडकास्ट 'फिगरिंग आउट' में बताया कि इस जिम्मेदारी की सबसे बड़ी कीमत उनकी निजी जिंदगी को चुकानी पड़ी.
करीब तीन साल तक राष्ट्रपति मुर्मू के ADC रहे सांब्याल ने कहा कि राष्ट्रपति के ADC के लिए एक क्लॉज है, जिसके तहत कार्यकाल के दौरान शादी नहीं की जा सकती. उन्होंने परिवार से दूर रहने और सामान्य जिंदगी न जी पाने को अपने लिए सबसे बड़ा त्याग बताया.
'मैं शादीशुदा नहीं हूं... यही सबसे बड़ा त्याग'
राज शमानी ने जब मेजर ऋषभ से पूछा कि राष्ट्रपति के ADC के रूप में उन्होंने अपनी जिंदगी में सबसे बड़ी कीमत क्या चुकाई, तो उन्होंने अपने निजी जीवन का जिक्र किया.सांब्याल ने बताया कि वह शादीशुदा नहीं हैं और राष्ट्रपति के ADC के लिए शादी से जुड़ा एक प्रावधान है. उनके मुताबिक, इस पद पर रहते हुए परिवार से दूर रहना पड़ता है और सामान्य निजी जिंदगी जीने का मौका बहुत सीमित हो जाता है.
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राष्ट्रपति के ADC की जिंदगी इतनी अलग क्यों होती है?
ADC राष्ट्रपति के बेहद करीब रहकर काम करता है. उसकी जिम्मेदारी सिर्फ कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के साथ खड़े रहने तक सीमित नहीं होती. उसे प्रोटोकॉल, कार्यक्रमों और राष्ट्रपति की जरूरतों से जुड़े कई काम देखने पड़ते हैं.
ऐसी जिम्मेदारी में अधिकारी को लगातार तैयार रहना पड़ता है. सांब्याल ने कहा कि राष्ट्रपति के साथ काम करते समय उनके पास बाहर की सामान्य जिंदगी के लिए बहुत कम समय होता था. दोस्तों के साथ अचानक बाहर जाना या आम लोगों की तरह अपनी निजी जिंदगी जीना आसान नहीं था.
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'आपके पास बाहर का जीवन नहीं होता'
सांब्याल ने पॉडकास्ट में अपनी जिंदगी की इस स्थिति को बेहद साफ शब्दों में समझाया. उनके मुताबिक, राष्ट्रपति के साथ सेवा के दौरान वह आम इंसान की तरह बाहर जाकर जिंदगी का आनंद नहीं ले सकते थे.
यानी इस पद की जिम्मेदारी सिर्फ ड्यूटी के घंटों तक सीमित नहीं रहती. अधिकारी को यह ध्यान रखना होता है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा, कार्यक्रम और जरूरतों में किसी तरह की चूक न हो.इसी वजह से निजी रिश्तों और सामान्य सामाजिक जिंदगी के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है.
अकेलापन आया, लेकिन उसे सकारात्मक बनाया
राज शमानी से बातचीत में सांब्याल ने यह भी माना कि इस भूमिका में अकेलापन महसूस होता था. हालांकि उन्होंने कहा कि उन्होंने उस अकेलेपन को नकारात्मक तरीके से लेने के बजाय खुद को समझने के लिए इस्तेमाल किया.
उनके मुताबिक, अकेले रहने से उन्हें अपने विचारों, अपनी अच्छी और बुरी आदतों के बारे में सोचने का मौका मिलता था. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें हर दिन कुछ समय बिल्कुल अकेले रहना पसंद है.
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