इजरायल में मंगलवार को वोटिंग होनी है. इसे कई लोग देश के इतिहास के सबसे अहम चुनावों में से एक मान रहे हैं. यह 7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर हमास के हमलों और उसके बाद पूरे इलाके - गाजा, ईरान, लेबनान, सीरिया और यमन में हुए युद्धों के बाद पहला चुनाव है.
इस बार चुनाव मैदान में बेंजामिन नेतन्याहू के सामने कई बड़े चेहरे हैं. यह चुनाव इजरायल और मिडिल ईस्ट दोनों के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है. ऐसे में जानते हैं कि बेंजामिन नेतन्याहू के सामने कौन- कौन से कैंडिडेट रेस में है और क्यों उनका पलड़ा भारी बताया जा रहा है.
गादी आइजेनकोट
प्रधानमंत्री बनने के लिए बेंजामिन नेतन्याहू और इज़राइल डिफेंस फोर्सेज़ के पूर्व हेड गादी आइज़ेनकोट के बीच कड़ी टक्कर है. आइज़ेनकोट की लोकप्रियता कुछ हद तक उनकी मिलिट्री क्रेडेंशियल्स और एक नए पॉलिटिकल चेहरे के तौर पर उनके स्टेटस की वजह से है, जिन्होंने पिछले साल ही अपनी याशर पार्टी बनाई है. आइजेनकोट याशर पार्टी के चेयरमैन हैं.
गाजा युद्ध के शुरुआती महीनों में उन्होंने अपने बेटे को खो दिया था. उनका बेटा एक सैनिक था. वह नेतन्याहू के अंदर इजराइल की युद्ध कैबिनेट में थे. 2024 में जंग को संभालने के अपने तरीके को लेकर आइजेनकोट ने इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना कैंपेन उन सुरक्षा नाकामियों के लिए जवाबदेही की मांग पर बनाया है, जिनकी वजह से 7 अक्टूबर को हमला हुआ. इस चुनाव में आइजेनकोट को नेतन्याहू का सबसे कड़ी टक्कर देने वाला प्रतिद्वंद्वी बताया जा रहा है.
नफ्ताली बेनेट
हालांकि, आइजेन कोट के अलावा दूसरे विपक्षी नेता भी मैदान में हैं और उनका कद भी काफी बड़ा है. इस वजह से चुनाव में पलड़ा किसके पक्ष में भारी पड़ जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. आइजेनकोट के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेट और वामपंथी पूर्व जनरल येर गोलान भी मैदान में हैं. इसके अलावा एविगडोर लिबरमैन भी चुनाव लड़ रहे हैं. नेतन्याहू को हटाने के लिए अपने मतभेदों के बावजूद, नफ़्ताली बेनेट और एविगडोर लिबरमैन, आइज़ेनकोट के साथ काम कर सकते हैं.
नफ्ताली बेनेट जिनकी जिंदगी उन्हें लड़ाई के मैदान से, टेक्नोलॉजी की दुनिया में और आखिर में प्राइम मिनिस्टर ऑफिस तक ले गई.बेनेट एक इज़रायली हाई-टेक एंटरप्रेन्योर और पॉलिटिशियन हैं. उन्होंने 2021–22 में इज़रायल के प्राइम मिनिस्टर के तौर पर काम किया. हालांकि, उनके धार्मिक पॉलिटिकल झुकाव, इज़राइली बस्तियों के पक्ष में उनके डेडिकेटेड एक्टिविज़्म और उनके 2012 के विवादित प्रस्ताव, जो वेस्ट बैंक फिलिस्तीनियों को एन्क्लेव तक सीमित कर देता, इन सबकी वजह से उन्हें कभी-कभी फार-राइट कहा जाता है.
उन्होंने 2021 में एक ऐतिहासिक यूनिटी गवर्नमेंट बनाई जिसमें लेफ्ट और राइट-विंग पार्टियों के साथ-साथ एक ऐसी पार्टी भी शामिल थी जो इज़रायल के कुछ फिलिस्तीनी नागरिकों को रिप्रेजेंट करती है. उनका कमजोर गठबंधन एक साल बाद टूट गया जब राइट-विंग मेंबर हट गए और उसकी जगह एक राइट-विंग गवर्नमेंट बना दी गई.
येर गोलान
येर गोलान डेमोक्रेट्स पार्टी के चेयरमैन हैं. येर गोलान एक खास और मुश्किल स्थिति में हैं. डेमोक्रेट्स के लीडर के तौर पर, जो पार्टी दो पुरानी लेफ्ट-विंग पार्टियों लेबर और मेरेट्ज़ को मिलाकर बनी थी. वह अकेली ऐसी बड़ी पॉलिटिकल ताकत हैं जो साफ तौर पर ज़ायोनिस्ट, लिबरल और सोशल-डेमोक्रेटिक विकल्प देती हैं.
गोलान 1962 में रिशोन लेजियन में जन्मे, उन्होंने IDF में लगभग चार दशकों तक सेवा की. पैराट्रूपर्स ब्रिगेड से शुरुआत करके, उन्होंने नाहल ब्रिगेड, जूडिया और सामरिया डिवीज़न, होम फ्रंट कमांड और नॉर्दर्न कमांड की कमान संभाली. आखिरकार वे डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ बन गए और उन्हें IDF को लीड करने के लिए एक कैंडिडेट माना गया.
गोलान ने 2019 में पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक के नेतृत्व वाले गठबंधन के ज़रिए राजनीति में कदम रखा. बाद में वह मेरेट्ज़ में शामिल हो गए, नेसेट में सेवा की और बेनेट-लैपिड सरकार में डिप्टी इकॉनमी मिनिस्टर बने. हालांकि, मेरेट्ज़ 2022 में चुनावी दहलीज पार नहीं कर पाए, जिससे पारंपरिक ज़ायोनी लेफ्ट को पहली बार संसदीय प्रतिनिधित्व के बिना रहना पड़ा.
7 अक्टूबर को उनकी पब्लिक इमेज में बहुत बड़ा बदलाव आया. हमले के बड़े लेवल के बारे में जानने के बाद, रिटायर्ड जनरल ने अपनी यूनिफॉर्म पहनी, हथियार उठाए, और अकेले गाजा के पास के इलाकों में गए, जहां उन्होंने नोवा म्यूज़िक फेस्टिवल के इलाके से बचे हुए लोगों को ढूंढा और बचाया.
1988 के बाद पहली बार हो फुल टर्म पूरा होने पर चुनाव
इजरायल में यह इलेक्शन कई मायनों में अहम हैं. 25वीं नेसेट 1988 के बाद पहली ऐसी संसद होगी जो पूरे चार साल के टर्म के बाद चुनाव कराएगी. यानी इतने साल बाद पहली बार कोई चुनाव इजरायल के संसद का फुल टर्म पूरा होने के बाद हो रहा है. इसलिए इजरायल में इस बार का चुनाव कई लिहाज से काफी अहम हैं.
इजरायल की पार्लियामेंट, जिसे नेसेट के नाम से जाना जाता है. उसमें 120 सीटें हैं, जिसका मतलब है कि सरकार को बहुमत पाने के लिए 61 सीटें होनी चाहिए. इज़रायल प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन वोटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करता है, इसलिए सरकारें हमेशा कई पार्टियों का गठबंधन रही हैं.
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