तारीख थी 2 नवंबर 2024, जगह थी ईरान की राजधानी तेहरान. इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी के कैंपस में एक लड़की सिर्फ अंडरवियर में दिखाई दी. कुछ ही देर में इसकी तस्वीरें दुनियाभर में वायरल हो गईं. माना गया कि ये ईरान में महिलाओं की आजादी को लेकर एक विरोध था. वीडियो सामने आते ही सुरक्षा अधिकारियों ने आहू दरयाई को हिरासत में ले लिया.
करीब 1 साल 9 महीने बाद अब आहू दरयाई कहां हैं, इस पर ब्रिटेन के डेली मेल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. ये रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब ईरान अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद उबरने की कोशिश कर रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, आहू यूनिवर्सिटी की सीढ़ियां चढ़ रही थीं, तभी उनका हिजाब सिर से खिसक गया. वे फोन में व्यस्त थीं और उन्हें इसका पता नहीं चला. इसके बाद कथित तौर पर मॉरैलिटी पुलिस ने उन्हें घेर लिया. आहू के करीबी दोस्त ने डेली मेल को बताया कि पुरुष अधिकारियों ने उन्हें डांटा और खींचकर एक ऐसे कमरे की ओर ले जाने लगे, जिसका इस्तेमाल महिला छात्रों को सजा देने के लिए किया जाता था.
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दोस्त के मुताबिक, अधिकारियों के खींचने से उनके कपड़े फटने लगे. इससे परेशान होकर आहू ने खुद अपने कपड़े उतार दिए और उन्हें सामने फेंकते हुए यूनिवर्सिटी के आंगन में सिर्फ अंडरवियर में घूमती रहीं. कुछ देर वे एक दीवार पर बैठीं, फिर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें हिरासत में लेकर वैन में डाल दिया.
डेली मेल की रिपोर्ट में दोस्त के हवाले से दावा किया गया है कि वैन में आहू का सिर एक महिला अधिकारी के पैरों के बीच दबा दिया गया था, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई. सांस लेने के लिए उन्होंने अधिकारी का हाथ काट लिया. इसके बाद पुलिस स्टेशन में उन्हें कथित तौर पर शांत करने के लिए दवा दी गई.पहली बार सुई टूट गई, दूसरी बार दवा देने के बाद वे बेहोश हो गईं.
रिपोर्ट के अनुसार, जब उन्हें होश आया तो उनके हाथ-पैर अस्पताल के बिस्तर से बंधे हुए थे. उन्हें ये तक नहीं पता था कि वे कहां हैं. जब भी उन्होंने परिवार से मिलने या जानकारी लेने की कोशिश की, उन्हें फिर से दवा देकर बेहोश कर दिया जाता. इसी दौरान उनसे पूछताछ हुई और उन पर ईरान छोड़कर किसी दूसरे देश में शरण लेने की कोशिश का आरोप लगाया गया.
आहू को 'मानसिक रूप से बीमार' करार दिया गया
18 दिन बाद आहू को अस्पताल से रिहा किया गया. दोस्त का दावा है कि अधिकारियों ने उनके परिवार और पूर्व पति पर दबाव डाला, जिसके बाद उन्हें मानसिक रूप से बीमार बताए जाने की कोशिश हुई. रिहाई के बाद उन्हें निगरानी में रखने और फोन टैप किए जाने की चेतावनी दी गई. उन्हें एंटी-साइकोटिक दवा लेने को कहा गया, और अब हर महीने डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें फ्लूपेंटिक्सोल का इंजेक्शन दिया जाता है.ये दवा आमतौर पर स्किजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियों में इस्तेमाल होती है.
दोस्त के मुताबिक, परिवार को डर है कि अगर आहू ने इंजेक्शन लेना बंद किया, तो उन्हें दोबारा मानसिक अस्पताल में भर्ती कर दिया जाएगा. डेली मेल के अनुसार, अब 32 साल की आहू एक अलग यूनिवर्सिटी में टेक्सटाइल्स की पढ़ाई कर रही हैं.
दुनियाभर में हुआ था विरोध
इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी सामने आई थी. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आहू की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की थी, और कहा था कि उन्होंने महिलाओं पर लागू होने वाले कपड़ों संबंधी नियमों के दमनकारी तरीके के विरोध में यह कदम उठाया. ब्रिटेन में ईरानी कार्यकर्ताओं ने भी उनके समर्थन में प्रदर्शन किया — लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में प्रदर्शनकारियों ने अंडरवियर और लाल कपड़े पहनकर विरोध जताया.
वहीं ईरानी सरकार की प्रवक्ता फतेमेह मोहाजेरानी ने आहू की गिरफ्तारी में हिंसा के आरोपों और घटना को कपड़ों से जुड़े नियमों से जोड़ने से इनकार किया. उनका कहना था कि मामला कुछ और था और सार्वजनिक जगह पर इस स्तर की नग्नता कहीं स्वीकार्य नहीं है.
आहू दरयाई की जिंदगी उस घटना के बाद पूरी तरह बदल चुकी है. नवंबर 2024 का उनका कुछ सेकंड का वीडियो आज भी इंटरनेट पर मौजूद है और ईरान में व्यक्तिगत आजादी, महिलाओं के अधिकार और सरकारी नियंत्रण को लेकर दुनियाभर में बहस की एक मिसाल बना हुआ है.
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