150 साल बाद बनती है मां, 10 साल पेट में रखती है बच्चा! इन मछलियों को क्यों मारना चाहते हैं लोग?

धरती पर सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले एक प्राणी की बड़ी आबादी को मारने के ऊपर बहस छिड़ी हुई है. यह जीव ग्रीनलैंड शार्क है. यह ठंडे पानी वाले समुद्र में ग्रीनलैंड, उत्तरी कनाडा और यूरोप के आसपास के ठंडे समुद्र में पाई जाती है.

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बड़ी संख्या में ग्रीनलैंड शार्क को मारने के लिए छिड़ी है बहस (Photo - AI Generated) बड़ी संख्या में ग्रीनलैंड शार्क को मारने के लिए छिड़ी है बहस (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:04 PM IST

दुनिया में एक ऐसी शार्क भी है, जिसे धरती पर सबसे ज्यादा उम्र तक जीने वाला रीढ़ वाला जीव माना जाता है. यह शार्क 400 साल से भी ज्यादा समय तक जिंदा रह सकती है. हैरानी की बात सिर्फ इसकी उम्र नहीं है. यह करीब 150 साल की उम्र में जाकर प्रजनन के लिए तैयार होती है और माना जाता है कि इसके बच्चे को जन्म लेने में 10 साल से ज्यादा का वक्त लग सकता है.

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लेकिन अब इसी बेहद दुर्लभ और धीमी रफ्तार से बढ़ने वाली शार्क को बड़ी संख्या में मारने की मांग उठी है. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीनलैंड के कुछ मछुआरे इन शार्कों से इतने परेशान हैं कि वे करीब 1,000 शार्क को मारने की मांग कर रहे हैं. यहां तक कि एक समय पर हर शार्क के दिल के बदले पैसे देने का प्रस्ताव भी सामने आया था.

मछुआरों को क्यों मारनी है ये शार्क?
यह पूरा मामला ग्रीनलैंड के पश्चिमी तट पर स्थित अवान्नाता नगरपालिका का है. यहां स्थानीय मछुआरों ने शिकायत की कि ग्रीनलैंड शार्क उनकी मछली पकड़ने वाली लाइनों और कांटों में फंस जाती हैं.

इससे उनका काफी महंगा मछली पकड़ने का सामान खराब हो जाता है. 27 साल के मछुआरे हेनरिक जेन्सेन ने बताया कि इस साल ही उनके करीब 6,000 हुक खो चुके हैं. कुछ दिनों में तो नुकसान इतना ज्यादा होता है कि एक दिन में करीब 30,000 डेनिश क्रोन यानी लगभग 4,500 अमेरिकी डॉलर का सामान बर्बाद हो जाता है.

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मछुआरों का कहना है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ेगा. इसी परेशानी को देखते हुए अवान्नाता नगरपालिका ने इस साल फरवरी में ग्रीनलैंड शार्क को मारने की योजना को मंजूरी दे दी थी.

एक शार्क के दिल के बदले मिलते 45 डॉलर
प्रस्ताव के मुताबिक करीब 1,000 ग्रीनलैंड शार्क को मारा जाना था. इसके लिए हर शार्क के दिल के बदले करीब 45 डॉलर देने का प्रस्ताव रखा गया था.

स्थानीय प्रशासन का तर्क था कि मछुआरों की आमदनी और उनकी पकड़ को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि वे आने वाली पीढ़ियों तक अपनी पारंपरिक खाद्य व्यवस्था को जारी रख सकें. लेकिन जैसे ही इस योजना की खबर सामने आई, इसका विरोध शुरू हो गया.

इतनी खास है ये शार्क कि खतरे में पड़ सकती है पूरी प्रजाति
ग्रीनलैंड शार्क कोई सामान्य मछली नहीं है. यह दुनिया के सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले रीढ़ वाले जीवों में शामिल है. वैज्ञानिकों के मुताबिक इसकी उम्र 400 साल से ज्यादा हो सकती है.

इसका जीवन चक्र भी बेहद धीमा है. मादा ग्रीनलैंड शार्क करीब 150 साल की उम्र में यौन परिपक्व होती है. यानी जिस उम्र में इंसान कई पीढ़ियां देख चुका होता है, उस उम्र में यह शार्क पहली बार मां बनने के लिए तैयार होती है.

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इतना ही नहीं, माना जाता है कि इसके गर्भ में बच्चे का विकास 10 साल से ज्यादा समय तक हो सकता है. यही वजह है कि अगर बड़ी संख्या में इन शार्कों को मार दिया जाए तो उनकी आबादी को दोबारा सामान्य होने में बहुत लंबा समय लग सकता है.

समुद्री संरक्षण विशेषज्ञ निक डल्वी ने चेतावनी दी है कि जैविक नजरिए से ग्रीनलैंड शार्क शायद समुद्र में जरूरत से ज्यादा मछली पकड़ने के प्रति सबसे संवेदनशील प्रजातियों में से एक है.

क्योंकि इनका बड़ा होना, प्रजनन के लायक होना और बच्चे पैदा करना सब कुछ बहुत धीमी गति से होता है. ऐसे में अगर एक साथ बड़ी संख्या में इन्हें मार दिया गया तो इनकी संख्या तेजी से कम हो सकती है और वापस बढ़ने में कई पीढ़ियां लग सकती हैं. इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर यानी आईयूसीएन ने भी 2020 में ग्रीनलैंड शार्क को 'वल्नरेबल' यानी असुरक्षित प्रजाति की सूची में रखा था.

समुद्र में 2,000 किलोमीटर तक घूम सकती है
ग्रीनलैंड शार्क मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, उत्तरी कनाडा और यूरोप के आसपास के ठंडे समुद्री इलाकों में पाई जाती है. यह लंबी दूरी तक सफर भी कर सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक शार्क साल भर में करीब 1,240 मील यानी लगभग 2,000 किलोमीटर तक यात्रा कर सकती है.

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यही बात संरक्षण संगठनों के लिए एक और चिंता की वजह है. समुद्री संरक्षण संगठन ओशन्स नॉर्थ कैलालिट नुनात के मुताबिक, अगर एक इलाके में शार्कों को मारने का अभियान चलाया भी गया तो दूसरे इलाकों से नई शार्क वहां पहुंच सकती हैं. यानी सिर्फ एक इलाके में शार्कों को मारने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा.

असली समस्या शार्क नहीं, कुछ और है?
ग्रीनलैंड में इस प्रस्ताव का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि शार्कों को मारना समस्या का समाधान नहीं है. ओशन्स नॉर्थ कैलालिट नुनात ने चेतावनी दी कि इतने बड़े स्तर पर शार्कों के लिए इनाम की व्यवस्था शुरू करना खतरनाक कदम हो सकता है. संगठन के मुताबिक, भले ही इस बार प्रस्ताव को रोक दिया गया हो, लेकिन भविष्य में ऐसी मांग फिर सामने आ सकती है.

संगठन के निदेशक जेंसेराक पॉल्सेन का कहना है कि शार्क असल समस्या का सिर्फ दिखाई देने वाला हिस्सा है. उनके मुताबिक, ग्रीनलैंड के मछली उद्योग में जरूरत से ज्यादा मछली पकड़ना और बहुत ज्यादा नावों की मौजूदगी असली समस्या हो सकती है.

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यानी एक तरफ मछुआरे अपनी रोजी-रोटी और महंगे सामान को बचाने की चिंता कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ वैज्ञानिक और संरक्षण संगठन ऐसी शार्क की आबादी को लेकर चिंतित हैं, जिसे प्रकृति ने बढ़ने और प्रजनन करने के लिए सैकड़ों साल का वक्त दिया है.

फिलहाल ग्रीनलैंड में 1,000 शार्क को मारने की यह योजना रोक दी गई है. लेकिन इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है - क्या मछुआरों की रोजी-रोटी बचाने के लिए 400 साल तक जीने वाली और बेहद धीमी गति से प्रजनन करने वाली शार्कों को मारना सही रास्ता है?

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