वो लोग, जिनके पास आप नहीं जा सकते... कितने हैं, कोई गिन नहीं पाया!

अमेजन के घने जंगलों में आज भी ऐसी जनजातियां रहती हैं, जो शिकार और मछली पकड़कर ही अपना पेट भरती है. इन्हें न तो खेती करना आता है और न ये पशुपालन कर सकते हैं. चलिए जानते हैं ऐसे ही एक ट्राइब्स की कहानी, जो आधुनिक इंसानों के पास न तो जाते हैं और न ही उन्हें अपने इलाके में आने देते हैं.

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तागेरी और तारोमेनाने जनजाति सालों से अलग- थलग घने जंगलों के बीच रहती आई है (Photo - AI Generated) तागेरी और तारोमेनाने जनजाति सालों से अलग- थलग घने जंगलों के बीच रहती आई है (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

धरती पर इंसानों के ऐसे कई समुदाय हैं, जो खुद को बाकी दुनिया से अलग रखना पसंद करते हैं. न ये लोग आधुनिक इंसानों को नजर आना पसंद करते हैं और न उनके नजदीक रहना. यही वजह है कि ऐसे आइसोलेटेड ट्राइब्स अमेजन जैसे घने जंगलों में या समुद्र के बीच किसी एकांत टापू पर गुजर- बसर करते हैं. 

इन आदिवासियों का रहन सहन आ भी दस हजार साल पुराना है. यह जंगल से मिलने वाले कंद- मूल, फल, बेरी जैसी चीजें जमा करते हैं और जानवरों का शिकार करके अपना पेट भरते हैं. इनमें से कुछ घने जंगलों के बीच गांव बसाकर थोड़ी बहुत खेती और पशुपालन भी करते हैं. ऐसी ही अलग- थलग एक जनजाति है - तागेरी और तारोमेनाने.

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तागेरी और तारोमेनाने लोग ना तो आधुनिक इंसानों से संपर्क करते हैं और ना ही उन्हें अपने नजदीक आने देते हैं.  तागेरी और तारोमेनाने इक्वाडोर के अमेजन जंगल के क्षेत्र में रहते हैं. इनकी सुरक्षा के लिए स्थानीय सरकार ने उस पूरे जंगली इलाके को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया है. यह इलाका यासुनी नेशनल पार्क के अंदर आता है. यहां स्वेच्छा से एकांत में रहने वाले, बाहरी दुनिया से बिना किसी संपर्क  के खानाबदोश  तागेरी और तारोमेनाने लोग रहते हैं. 

इक्वाडोर में अमेजन के घने जंगलों रहते हैं ये लोग
इक्वाडोर में आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त यही दो समुदाय हैं.  तागेरी और तारोमेनाने अलग-थलग रहते हैं. हालांकि माना जाता है कि अन्य समुदाय भी हैं.  तागेरी लोग  हुआओरानी समुदाय का हिस्सा हैं जो इक्वाडोर के अमेज़न बेसिन में स्थित यासुनी राष्ट्रीय उद्यान में रहते हैं.  इस समुदाय का नाम इसके संस्थापक सदस्य तागे के नाम पर रखा गया है. 

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तागे और अन्य लोग 1968 में अपने मूल क्षेत्रों में मिशनरियों की उपस्थिति को स्वीकार नहीं किया. इसके बाद अपने ये समूह अपने मूल हुआओरानी समुदाय से अलग हो गए. तब से, तागेरी लोग स्वेच्छा से घने जंगलों में एकांत में रह रहे हैं. वहीं  अन्य हुआओरानी लोगों के साथ भी उनका संपर्क नहीं रहा. 

वर्षों से अंतर-जातीय हिंसा की घटनाएं बार-बार होती रही हैं. अनुमान है कि अब केवल 20-30 तागेरी लोग ही जीवित बचे हैं, हालांकि ये संख्या निश्चित नहीं है. क्योंकि, इनके पास कोई पहुंच नहीं सकता है. इस वजह से इनकी गिनती नहीं की जा सकी है.  

यह भी पढ़ें: इंसानों से छुपकर रहते हैं ये लोग, सीटी बजाकर करते हैं बात, सरकार भी नहीं कर पाई इनकी गिनती

टैरोमेनाने लोग इक्वाडोर के पास्ताज़ा और ओरेलाना प्रांतों में नापो और कुरारे नदियों के बीच रहते हैं. यह इलाका भी यासुनी नेशनल पार्क के तहत ही आता है.  माना जाता है कि यह समूह भी हुआओरानी लोगों के दूर के रिश्तेदार है. अनुमान है कि यासुनी राष्ट्रीय उद्यान के वर्षावन में अभी भी 150-300 टैरोमेनाने लोग रहते हैं. उन लोगों ने खानाबदोश जीवन शैली अपना रखी है. 

ये जनजातियां ठीक वैसे ही हैं. जैसे अंडमान के सेंटीनल आईलैंड पर रहने वाले सेंटनलीज लोग होते हैं. इनसे संपर्क करना काफी खतरनाक होता है. ठीक इसी तरह तगारी और टैरोमेनाने लोगों से संपर्क करना भी खतरे से खाली नहीं होता है. इन लोगों ने बाहरी दुनिया, विशेषकर अपने क्षेत्र में बाहरी लोगों के घुसपैठ के प्रति हमेशा आक्रामक रहे हैं.

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