'इंडिया में ही मैं सही था...' दुबई जाकर बदली सोच, बोला- कमाई के बाद भी बचत मुश्किल

दुबई में रह रहे कोलकाता के राहुल बाला ने एक वीडियो में वहां की जिंदगी और खर्चों का अपना अनुभव शेयर किया है. उन्होंने कहा कि भारतीय रुपये में सैलरी बड़ी दिखती है, लेकिन दुबई में रहने के खर्च के बाद बचत करना आसान नहीं है.

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राहुल ने अपनी बात समझाने के लिए सैलरी का उदाहरण दिया (Photo:AP) राहुल ने अपनी बात समझाने के लिए सैलरी का उदाहरण दिया (Photo:AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:59 PM IST

विदेश जाकर नौकरी करना भारत में रहने वाले कई युवाओं का सपना होता है. खासकर दुबई जैसी जगह पर नौकरी और अच्छी सैलरी की तस्वीर लोगों को आकर्षित करती है. लेकिन कोलकाता के रहने वाले राहुल बाला का दुबई में रहने का अनुभव इस सपने का दूसरा पहलू दिखाता है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर कहा कि दुबई आने के बाद उन्हें लगने लगा है कि 'इंडिया में ही मैं सही था.'

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राहुल के मुताबिक, भारत से बाहर जाना उनका सपना था और वह सपना पूरा भी हुआ. लेकिन दुबई पहुंचने के बाद उन्हें यहां के रोजमर्रा के खर्चों का अंदाजा हुआ. उन्होंने विदेश में नौकरी के लिए जाने वालों को सलाह दी कि सिर्फ सैलरी को भारतीय रुपये में बदलकर फैसला न लें.

'दुबई रहना आसान नहीं है'

राहुल ने अपने वीडियो में कहा, "इंडिया से बाहर आना एक सपना था, जो सपना पूरा हुआ. लेकिन यहां आने के बाद पता चल रहा है, अपना इंडिया बहुत अच्छा है."

उन्होंने दुबई में रहने की बढ़ती लागत का जिक्र करते हुए कहा कि यहां खाना, पानी और दूसरी जरूरतों पर लगातार खर्च होता है. उनका कहना है कि आम आदमी के लिए इन खर्चों के बाद हर महीने अच्छी बचत करना आसान नहीं होता.

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राहुल ने खाने का उदाहरण भी दिया. उनके मुताबिक, एक सामान्य भोजन के लिए कम से कम 10 दिरहम यानी करीब 260 रुपये खर्च हो सकते हैं. ऐसे छोटे-छोटे खर्च पूरे महीने में बड़ी रकम बन जाते हैं.

 

2500 दिरहम की सैलरी, फिर कितनी बचत?

राहुल ने अपनी बात समझाने के लिए सैलरी का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को दुबई में 2500 दिरहम मिलते हैं, तो भारतीय रुपये में यह रकम करीब 70 हजार रुपये के बराबर दिखाई देती है.

लेकिन दुबई में रहने के खर्च निकालने के बाद पूरी रकम बचाना संभव नहीं होता. राहुल के उदाहरण के मुताबिक, तमाम खर्चों के बाद करीब 1500 दिरहम बच सकते हैं.

यही वजह है कि उनका कहना है कि विदेश में मिलने वाली सैलरी को सिर्फ भारतीय रुपये में बदलकर देखना सही तस्वीर नहीं देता. वहां की कमाई के साथ रहने का खर्च और बचत की क्षमता भी समझना जरूरी है.

'भारत बहुत अच्छा है'

राहुल ने अपने वीडियो में कहा कि दुबई आना उनका सपना था, लेकिन यहां रहने के बाद उन्हें भारत की कई चीजों की अहमियत समझ आई. उन्होंने कहा, "दुबई रहना आसान नहीं है."

राहुल की प्रोफाइल के मुताबिक, वह शेफ हैं. उनका यह वीडियो इंस्टाग्राम पर लोगों का ध्यान खींच रहा है और कई यूजर्स उनके अनुभव पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

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हालांकि, राहुल की बताई रकम और खर्च उनके व्यक्तिगत अनुभव और उदाहरण हैं. दुबई में हर व्यक्ति की सैलरी, रहने की व्यवस्था, किराया और खर्च अलग हो सकते हैं.

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