नौकरी में अक्सर कर्मचारियों से समय पर काम पूरा करने और अपना टारगेट अचीव करने की उम्मीद की जाती है. लेकिन जब किसी कर्मचारी की जिंदगी में कोई बड़ा दुख आता है, तब कंपनी का रवैया बहुत मायने रखता है. ऐसी ही एक कंपनी इन दिनों चर्चा में है, जिसने अपने कर्मचारी के परिवार पर आई मुश्किल घड़ी में इंसानियत दिखाते हुए उसका साथ दिया. कंपनी ने कर्मचारी के पिता की मौत के बाद उसे करीब एक महीने की छुट्टी दी और पिता के इलाज के दौरान हुए चिकित्सा खर्च का 20 फीसदी हिस्सा भी उठाया.
यह मामला कोयंबटूर की एक कंपनी से जुड़ा है. बेंगलुरु के एक कारोबारी ने सोशल मीडिया पर अपनी बहन की कंपनी से जुड़ी यह कहानी शेयर की. उन्होंने बताया कि हाल ही में उसके पिता का निधन हो गया था. इस मुश्किल समय में कंपनी ने उनसे तुरंत काम पर वापस आने के लिए नहीं कहा. इसके बजाय कर्मचारी को चार हफ्ते से ज्यादा समय की छुट्टी दी गई, ताकि वह अपने परिवार के साथ रह सकें और इस बड़े सदमे से उबर सकें. आमतौर पर निजी कंपनियों में छुट्टी को लेकर अलग-अलग नियम होते हैं, लेकिन इतने लंबे समय तक छुट्टी देना अपने आप में काफी खास बात मानी जा रही है.
इलाज के खर्च में भी कंपनी ने की मदद
कंपनी का सहयोग सिर्फ छुट्टी देने तक ही सीमित नहीं रहा. कर्मचारी के पिता के इलाज के दौरान जो मेडिकल खर्च हुआ, उसका 20 फीसदी हिस्सा भी कंपनी ने खुद उठाया. परिवार पहले से ही इमोशनली और आर्थिक परेशानी से गुजर रहा था. ऐसे समय में कंपनी की ओर से मिली यह मदद उसके लिए काफी महत्वपूर्ण रही. यही वजह है कि इस घटना को सोशल मीडिया पर काफी सराहा जा रहा है. लोगों का कहना है कि किसी कंपनी की असली पहचान सिर्फ उसकी कमाई या कारोबार से नहीं होती, बल्कि यह भी देखा जाता है कि वह अपने कर्मचारियों के मुश्किल समय में किस तरह उनके साथ खड़ी होती है.
चेयरमैन ने खुद भेजा मैसेज
इस मामले में एक और बात लोगों को काफी अच्छी लगी. कंपनी के चेयरमैन ने खुद कर्मचारी को मैसेज भेजकर उसका हालचाल पूछा. किसी बड़े अधिकारी का व्यक्तिगत तौर पर कर्मचारी से बात करना और उसकी स्थिति के बारे में पूछना उसके लिए इमोशनल रूप से काफी मायने रख सकता है. सोशल मीडिया पर इस घटना को शेयर करने वाले कारोबारी ने बताया कि उनकी बहन जिस कंपनी में काम करती हैं, वह कोयंबटूर से शुरू हुई एक पुरानी कंपनी है. कंपनी का कारोबार भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि करीब 40 देशों में इसके उत्पाद भेजे जाते हैं. कंपनी में 4,000 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं और इसका इतिहास 50 साल से भी ज्यादा पुराना बताया गया है.
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कंपनी की खूब तारीफ की. कई लोगों ने कहा कि कर्मचारी के मुश्किल समय में उसका साथ देना किसी भी कंपनी के अच्छे वर्क कल्चर को दिखाता है. लोगों का कहना है कि जब परिवार में किसी करीबी व्यक्ति की मौत होती है तो उस समय काम पर ध्यान देना आसान नहीं होता. ऐसे में कर्मचारी को पर्याप्त समय देना जरूरी है. अगर कंपनी ऐसे समय में कर्मचारी पर काम का दबाव डालने के बजाय उसे परिवार के साथ रहने का मौका देती है, तो इससे कर्मचारी का कंपनी के प्रति भरोसा और बढ़ता है. आज के समय में नौकरी को अक्सर वेतन, पद और काम के लक्ष्य से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन किसी कर्मचारी की जिंदगी में जब मुश्किल समय आता है, तब कंपनी का व्यवहार उसके लिए लंबे समय तक याद रहता है.
इस मामले में कंपनी ने छुट्टी देने के साथ-साथ इलाज के खर्च में भी मदद की और वरिष्ठ अधिकारी ने खुद कर्मचारी का हाल पूछा. यही वजह है कि यह कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में है. लोगों का मानना है कि कंपनियों और कर्मचारियों के बीच रिश्ता सिर्फ काम और वेतन तक सीमित नहीं होना चाहिए. मुश्किल समय में अगर कंपनी अपने कर्मचारी के साथ खड़ी होती है, तो वह भरोसा और जुड़ाव को और मजबूत करती है.
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