29 सितंबर को अभिजीत दिपके का जन्मदिन है. उनके जन्मदिन पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' यानी CJP एक बार फिर चर्चा में है. CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर अभिजीत दिपके को जन्मदिन की बधाई दी. इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देने वालों की कतार लग गई.
रांका ने बर्थडे विश करते हुए लिखा-
हैप्पी बर्थडे अभिजीत दिपके! जब मैं उम्मीद खोने लगा था, तब तुमने ही मेरा हौसला बढ़ाया. उन तमाम शानदार चीजों और खूबसूरत पलों के नाम, जो अभी हमारा इंतजार कर रहे हैं. मेरे भाई, तुमसे बहुत प्यार है!
कुछ महीने पहले तक सोशल मीडिया पर एक सटायरिकल डिजिटल कैंपेन के तौर पर शुरू हुआ 'कॉकरोच जनता पार्टी' का नाम बहुत कम लोग जानते थे. लेकिन देखते ही देखते यह कैंपेन युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दे उठाने वाले आंदोलन में बदल गया. इसकी चर्चा उस वक्त तेजी से बढ़ी, जब CJP ने NEET-UG विवाद और परीक्षा व्यवस्था को लेकर आवाज उठानी शुरू की.
जून में CJP के बैनर तले जंतर-मंतर पर NEET-UG और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन शुरू हुआ. आंदोलन की प्रमुख मांगों में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी शामिल था. कई हफ्तों तक चले प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत के बीच अभिजीत दिपके लगातार कहते रहे कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा.
फिर 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद CJP ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया. हालांकि, दिपके ने साफ किया कि यह CJP के सफर का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है.
प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि अब CJP का अगला कदम क्या होगा? क्या संगठन चुनावी राजनीति में उतरेगा या फिर आंदोलन और सामाजिक मुद्दों के जरिए अपनी भूमिका जारी रखेगा?
CJP की भूमिका होगी 'प्रेशर ग्रुप'
अगस्त में अभिजीत दिपके ने इस सवाल का जवाब देते हुए साफ किया कि CJP की तत्काल चुनावी राजनीति में उतरने की योजना नहीं है. उन्होंने संगठन को एक 'प्रेशर ग्रुप' के तौर पर आगे बढ़ाने की बात कही. यानी सरकार और संस्थानों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना, युवाओं की समस्याओं को सामने रखना और जरूरत पड़ने पर आंदोलन करना.
इसके बाद CJP ने अपना फोकस NEET-UG से आगे बढ़ाया. पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और गिग वर्कर्स की समस्याओं को भी संगठन के अगले मुद्दों में शामिल किया गया. इससे साफ हुआ कि CJP अब सिर्फ शिक्षा या किसी एक परीक्षा से जुड़े मुद्दे तक सीमित नहीं रहना चाहती.
सितंबर में आते ही मिला एक नया मुद्दा
सितंबर आते-आते CJP का एक और बड़ा मुद्दा सामने आ गया. इस बार संगठन ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए. CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर आपत्ति जताई और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की.
CJP ने ऐलान किया कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किया जाएगा. संगठन के मुताबिक, इस प्रदर्शन की शुरुआत मुंबई से होगी.
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब मतदाता सूची में बदलाव और SIR को लेकर देश में सार्वजनिक बहस चल रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े सॉफ्टवेयर की समीक्षा शुरू की है. चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया का बचाव करते हुए इसे कानूनी प्रक्रिया बताया है.
इस तरह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP का सफर रुका नहीं. NEET-UG और परीक्षा व्यवस्था से शुरू हुआ आंदोलन अब पब्लिक सर्विस कमीशन, गिग वर्कर्स और चुनावी प्रक्रिया जैसे मुद्दों तक पहुंच चुका है.
अभिजीत दिपके के जन्मदिन पर CJP की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि सोशल मीडिया पर सटायर के तौर पर शुरू हुआ एक कैंपेन कुछ ही महीनों में सड़क पर उतरने वाले आंदोलन में बदल गया. अब 2 अक्टूबर से प्रस्तावित देशव्यापी प्रदर्शन के जरिए CJP अपने नए एजेंडे को किस तरह आगे बढ़ाती है, इस पर नजर रहेगी.
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