आजकल लोग छोटे-बड़े कामों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद लेने लगे हैं. सवाल पूछने से लेकर किसी भी जानकारी के लिए और जरूरी फैसलों में सलाह लेने तक, एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन चीन से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक शख्स ने एआई चैटबॉट की सलाह के आधार पर अपनी मां के अंतिम संस्कार की तारीख चुनी. इसके बाद परिवार में हुई एक घटना को उसने उसी तारीख से जोड़ दिया और एआई कंपनी के खिलाफ केस कर दिया.
एससीएमपी के मुताबिक, यह मामला चीन के झेजियांग प्रांत के जियाशान काउंटी का बताया जा रहा है. दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, शि नाम के इस व्यक्ति की मां की अप्रैल में अचानक बीमारी से मौत हो गई थी. परिवार में वह पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा है.
मां के अंतिम संस्कार के लिए एआई से मांगी मदद
मां की मौत के बाद शि को उनके अंतिम संस्कार के लिए एक शुभ तारीख चुननी थी. चीन में कुछ लोग पारंपरिक चीनी कैलेंडर और मान्यताओं के आधार पर ऐसे महत्वपूर्ण मौकों के लिए शुभ दिन चुनते हैं. इसी सिलसिले में शि ने एक एआई चैटबॉट से तारीख पूछी. चैटबॉट ने उसे एक तारीख सजेक्ट की, जिसे उसने अपनी मां के अंतिम संस्कार के लिए चुन लिया.
इसके बाद परिवार में हुई एक घटना
शि का दावा है कि अंतिम संस्कार के बाद उसके परिवार के साथ एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई. उसने इस घटना को एआई की तरफ से सजेस्ट की गई तारीख से जोड़ दिया. इसके बाद शि ने एआई कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया. उसका आरोप है कि चैटबॉट ने उसे गलत सलाह दी थी. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी साफ है कि परिवार में हुई घटना और एआई की सुझाई तारीख के बीच कोई वैज्ञानिक कारण या सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है. यह व्यक्ति का दावा है.
एआई से कानून की मदद भी ली
इस पूरे मामले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस एआई चैटबॉट की सलाह को लेकर शि ने कंपनी के खिलाफ शिकायत की, उसी एआई का इस्तेमाल उसने अपनी कानूनी कार्रवाई से जुड़े डॉक्यूमेंट तैयार करने में भी किया. यानी एक तरफ वह एआई कंपनी पर गलत सलाह देने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसी तकनीक से केस से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने में मदद ले रहा है. इसी वजह से यह मामला सोशल मीडिया और इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है.
शुभ तारीख का क्या मतलब है?
चीन में कुछ लोग महत्वपूर्ण कामों के लिए पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर शुभ तारीख चुनते हैं. ऐसी तारीखें पुराने चीनी कैलेंडर और खगोलीय घटनाओं से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित होती हैं. शादी, अंतिम संस्कार और दूसरे महत्वपूर्ण मौकों के लिए कुछ परिवार आज भी इन मान्यताओं को ध्यान में रखते हैं. हालांकि, ऐसी मान्यताएं वैज्ञानिक प्रमाण पर आधारित नहीं होतीं.
एआई की सलाह पर कितना भरोसा करना चाहिए?
यह मामला एआई के इस्तेमाल को लेकर एक अहम सवाल भी खड़ा करता है. एआई कई तरह की जानकारी देने में मदद कर सकता है, लेकिन हर जवाब को अंतिम और सही मान लेना ठीक नहीं है. खासकर परिवार, कानून, पैसे या दूसरे महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े मामलों में एआई से मिली जानकारी को दूसरे भरोसेमंद सोर्स से चेक करना जरूरी है. जरूरत पड़ने पर संबंधित विशेषज्ञ की सलाह भी लेनी चाहिए.
फिलहाल शि की ओर से लगाए गए आरोप और एआई की सलाह के बीच संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है. मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें एआई पर सलाह देने के साथ-साथ उसी एआई की मदद से उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी करने का अजीब संयोग सामने आया है.
aajtak.in