एक दिन काम, 3 दिन आराम! चीन के युवाओं में क्यों चल रहा ‘वॉल-हैंगिंग’ ट्रेंड?

चीन में बेरोजगार और अस्थायी काम करने वाले युवाओं के बीच ‘वॉल-हैंगिंग यूथ’ टर्म काफी चर्चा में है. ये युवा कभी-कभी एक दिन काम करके कई दिन आराम करते हैं. इसके पीछे बेरोजगारी, आर्थिक परेशानी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसी वजहें बताई जा रही हैं. 

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‘वॉल-हैंगिंग यूथ’ चीन में इस्तेमाल होने वाला एक नया वायरल शब्द है. ( Photo: ITG) ‘वॉल-हैंगिंग यूथ’ चीन में इस्तेमाल होने वाला एक नया वायरल शब्द है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:20 AM IST

सोचिए, कोई युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश करता है, लेकिन लंबे समय तक नौकरी नहीं मिलती. धीरे-धीरे पैसे खत्म होने लगते हैं और जिंदगी का कोई तय रास्ता नजर नहीं आता. ऐसी ही स्थिति से गुजर रहे चीन के कुछ युवाओं के बीच अब एक नया शब्द तेजी से चर्चा में है-‘वॉल-हैंगिंग यूथ’. इस ट्रेंड से जुड़े युवा मजाक में कहते हैं कि वे एक दिन काम करते हैं और अगले तीन दिन आराम यानी ‘लेट फ्लैट’ रहते हैं. यह सिर्फ आराम करने की बात नहीं है, बल्कि इसके पीछे बेरोजगारी, आर्थिक परेशानी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसी कई वजहें बताई जा रही हैं. 

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आखिर क्या है ‘वॉल-हैंगिंग यूथ’?
‘वॉल-हैंगिंग यूथ’ चीन में इस्तेमाल होने वाला एक नया वायरल शब्द है. इसका इस्तेमाल ऐसे युवाओं के लिए किया जा रहा है, जो समाज से कुछ हद तक कट गए हैं और उनके पास स्थायी नौकरी या आमदनी का साधन नहीं है. इनमें यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी कर चुके युवा भी शामिल हैं. ये लोग पारंपरिक तरीके से लगातार नौकरी करने के बजाय छोटे-मोटे काम करके कुछ पैसे कमाते हैं और फिर कुछ दिन बिना काम के गुजारते हैं. यानी जिंदगी एक तय रफ्तार से नहीं चल रही. कभी काम मिला तो कर लिया और जब काम नहीं मिला तो किसी तरह समय काट लिया.

29 साल के गुओ की कहानी
रिपोर्ट में चीन के 29 वर्षीय गुओ जिहाओ की कहानी बताई गई है. गुओ दक्षिण चीन के शेनझेन शहर में रहते थे. एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास रहने की जगह तक नहीं थी. कई महीनों तक 24 घंटे खुले रहने वाले बिलियर्ड हॉल उनके लिए अस्थायी ठिकाने की तरह बन गए थे. मुश्किल समय में उनके पास सिर्फ 20 युआन यानी करीब 3 अमेरिकी डॉलर बचे थे. गुओ ने बताया कि वह दौर सिर्फ पैसों की परेशानी नहीं था, बल्कि हर मिनट और हर सेकंड उनके लिए बेहद मुश्किल था. खास बात यह है कि गुओ हमेशा से ऐसी जिंदगी नहीं जी रहे थे.

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पढ़े-लिखे थे, फिर भी हालात बिगड़ गए
गुओ एक संपन्न परिवार से आते हैं. उन्होंने इकोनॉमिक्स और मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी. पढ़ाई के बाद उन्होंने भी एक सामान्य और स्थिर जिंदगी का सपना देखा था. लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं. नौकरी और पैसों से जुड़ी परेशानियों ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया. उनकी कहानी यह दिखाती है कि पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद भी हर युवा के लिए स्थायी नौकरी और आर्थिक सुरक्षा की गारंटी नहीं होती.

एक दिन काम, तीन दिन ‘लेट फ्लैट’
‘वॉल-हैंगिंग यूथ’ से जुड़ा सबसे दिलचस्प हिस्सा उनका काम करने का तरीका है. इन युवाओं में कुछ लोग नियमित नौकरी की जगह छोटे या अस्थायी काम करते हैं. कुछ समय काम करने के बाद वे कई दिन बिना काम के रहते हैं. इसी स्थिति को मजाकिया अंदाज में ‘एक दिन काम, तीन दिन लेट फ्लैट’ कहा जा रहा है.
यहां ‘लेट फ्लैट’ का मतलब है कि व्यक्ति किसी बड़ी महत्वाकांक्षा या लगातार भाग दौड़ से खुद को अलग कर ले और बस जितना जरूरी हो उतना ही करे. हालांकि हर युवा की स्थिति एक जैसी नहीं है. किसी के पास आर्थिक मदद हो सकती है, तो किसी के सामने रहने और खाने तक की समस्या हो सकती है.

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पहली नजर में यह ट्रेंड युवाओं के काम से बचने या आलसी होने जैसा लग सकता है. लेकिन इसके पीछे की तस्वीर इससे ज्यादा जटिल है. स्थायी नौकरी नहीं मिलना, कम आमदनी, बढ़ता खर्च और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसे कारण कुछ युवाओं को पारंपरिक करियर की दौड़ से दूर कर रहे हैं. गुओ की कहानी भी बताती है कि ऐसी स्थिति सिर्फ उन लोगों के साथ नहीं होती जिनके पास पढ़ाई या परिवार का सहारा नहीं है. एक पढ़ा-लिखा युवा भी परिस्थितियों के कारण इस स्थिति में पहुंच सकता है.

गुओ चाहते हैं कि युवाओं को समझा जाए
गुओ का कहना है कि ‘वॉल-हैंगिंग यूथ’ की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. उनका मानना है कि ऐसे युवाओं को सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति या काम न करने के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए. उनकी कहानी चीन के उन युवाओं की परेशानी सामने लाती है, जो सामान्य जिंदगी और स्थायी नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन उन्हें लगातार अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है. यही वजह है कि ‘वॉल-हैंगिंग यूथ' शब्द सोशल मीडिया और चीन के वर्क कल्चर में चर्चा का विषय बन गया है. यह सिर्फ एक नया इंटरनेट ट्रेंड नहीं, बल्कि उन युवाओं की जिंदगी की झलक भी देता है जो नौकरी और आर्थिक स्थिरता के बीच फंसे हुए हैं.

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