अमीर बच्चों का अनोखा समर कैंप, खेत में काम से लेकर आलू खोदने तक की ट्रेनिंग

चीन में अमीर परिवारों के बच्चे एक ऐसे खास समर कैंप में जा रहे हैं, जहां उन्हें आराम और सुविधाओं से दूर रखकर खेतों में काम, शारीरिक मेहनत और रोजमर्रा के मुश्किल काम सिखाए जाते हैं. इस कैंप की फीस हजारों नहीं, बल्कि लाखों रुपये तक है.

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इस कैंप की सबसे ज्यादा चर्चा इसकी फीस को लेकर हो रही है. ( Photo: AI) इस कैंप की सबसे ज्यादा चर्चा इसकी फीस को लेकर हो रही है. ( Photo: AI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:59 AM IST

चीन में इन दिनों बच्चों के लिए चलने वाले एक खास तरह के समर कैंप की चर्चा हो रही है. आमतौर पर समर कैंप का नाम सुनते ही बच्चों के खेल, मस्ती, घूमने-फिरने और नई चीजें सीखने की तस्वीर सामने आती है. लेकिन चीन में कुछ अमीर परिवार अपने बच्चों को ऐसे कैंप में भेज रहे हैं, जहां उन्हें खेतों में काम करने से लेकर पेड़ की छाल उतारने और रोजमर्रा के काम खुद करने तक की ट्रेनिंग दी जाती है. खास बात यह है कि इस कैंप में बच्चों को भेजने के लिए माता-पिता हजारों रुपये नहीं, बल्कि लाखों रुपये तक खर्च कर रहे हैं.

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रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह के ‘हार्डशिप समर कैंप’ का मकसद बच्चों को आरामदायक जिंदगी से बाहर निकालकर मेहनत और मुश्किल हालात का अनुभव कराना है. यहां बच्चों को खेतों में काम करना, फसल से जुड़े काम सीखना, सामान संभालना और कुछ ऐसे काम करना पड़ता है, जिन्हें वे आमतौर पर शहर में अपने घरों में नहीं करते. कई बच्चों को दिनभर शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है, ताकि उन्हें यह समझ आ सके कि पैसा कमाना और जिंदगी चलाना कितना मुश्किल हो सकता है.

कैंप की फीस भी कम नहीं
इस कैंप की सबसे ज्यादा चर्चा इसकी फीस को लेकर हो रही है. जानकारी के अनुसार, 10 दिन के कैंप की फीस करीब 4,000 युआन यानी लगभग 48 हजार रुपये बताई गई है. वहीं, एक महीने के कैंप की फीस 1.2 लाख रुपये से ज्यादा बताई गई है. यानी जिन बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों को यहां भेजते हैं, वे उन्हें मेहनत का महत्व समझाने के लिए काफी पैसे खर्च कर रहे हैं.

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यहां बच्चों को सिर्फ खेतों में काम ही नहीं कराया जाता, बल्कि उनके मोबाइल फोन भी जमा कराए जाते हैं. इसके बाद उन्हें कैंप में तय एक्टिविटी और कामों में हिस्सा लेना होता है. तस्वीर में यह भी बताया गया है कि जो बच्चे मेहनत नहीं करते, उन्हें खाने में मिलने वाला आलू कम दिया जाता है. इस तरह बच्चों को काम और मेहनत के हिसाब से चीजें मिलने का अनुभव कराया जाता है.

बच्चों को क्यों कराया जा रहा है इतना काम?
कैंप आयोजकों के मुताबिक, इसका उद्देश्य बच्चों को यह समझाना है कि पैसा आसानी से नहीं मिलता. शहरों में रहने वाले कई बच्चे बचपन से ही ऐसी सुविधाओं के बीच बड़े होते हैं, जहां उन्हें खाने, रहने और दूसरी जरूरतों के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. माता-पिता उनकी कई जरूरतें तुरंत पूरी कर देते हैं. ऐसे में बच्चों को मेहनत और पैसे की असली कीमत समझाना मुश्किल हो सकता है.

इसी वजह से कुछ माता-पिता मानते हैं कि बच्चों को कुछ समय के लिए आरामदायक जिंदगी से दूर रखना जरूरी है. उनका मानना है कि खेतों में काम करने और शारीरिक मेहनत करने से बच्चे आत्मनिर्भर बन सकते हैं और उन्हें यह समझ आ सकती है कि भोजन और पैसा कितनी मेहनत के बाद हासिल होता है.

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कैंप को लेकर उठ रहे सवाल
हालांकि, इस तरह के कैंप को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. बच्चों से इतनी मेहनत करवाना और उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में रखना क्या सही तरीका है, इस पर अलग-अलग राय सामने आ रही है. कुछ लोगों का मानना है कि बच्चों को मेहनत का महत्व जरूर समझना चाहिए, लेकिन इसके लिए उनकी उम्र, सुरक्षा और शारीरिक क्षमता का भी ध्यान रखना जरूरी है.

वहीं कुछ माता-पिता का कहना है कि आज के समय में बच्चों को हर सुविधा उपलब्ध कराने के कारण वे छोटी-छोटी परेशानियों से भी जल्दी घबरा जाते हैं. ऐसे में कुछ समय के लिए उन्हें वास्तविक जिंदगी की चुनौतियों से परिचित कराना उनके व्यक्तित्व और सोच के विकास में मदद कर सकता है.

कुल मिलाकर, चीन का यह हार्डशिप समर कैंप इसलिए चर्चा में है क्योंकि यहां अमीर परिवारों के बच्चों को पैसे और सुविधाओं की दुनिया से निकालकर मेहनत की जिंदगी का अनुभव कराया जा रहा है. कैंप की ऊंची फीस और बच्चों से कराए जाने वाले काम ने इस बहस को भी जन्म दे दिया है कि बच्चों को मेहनत सिखाने का सही तरीका क्या होना चाहिए. क्या इसके लिए उन्हें खेतों में काम करवाना जरूरी है या फिर रोजमर्रा की छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देकर भी उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है, यह सवाल अब चर्चा का विषय बना हुआ है.

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