डिलीवरी राइडर ने पार्सल पहुंचाने के बीच लिखी कविताएं, अब मिला ये अवार्ड

एक डिलीवरी राइडर, जो लोगों के घर खाना पहुंचाने के बीच कविता लिखता रहा. आज चीन के बड़े साहित्यिक सम्मान का विजेता है. लेकिन उसके लिए यह मंजिल नहीं, जिंदगी के सफर का ही एक हिस्सा है. इस शख्स की कहानी दिल छू लेने वाली है. चलिए जानते हैं कैसे लोगों को पार्सल पहुंचाने के बीच इस शख्स ने हजारों कविताएं लिख डाली.

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पार्सल डिलीवरी करते- करते लिखता था कविता, मिल गया बड़ा साहित्यिक अवार्ड (Photo - AI Generated) पार्सल डिलीवरी करते- करते लिखता था कविता, मिल गया बड़ा साहित्यिक अवार्ड (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:27 AM IST

सुबह से शाम तक लोगों के घर खाना और सामान पहुंचाना... बीच में थोड़ा वक्त मिला तो कागज के किसी टुकड़े पर कविता लिख ली. चीन के वांग जिबिंग की जिंदगी कुछ ऐसी ही रही है. पेशे से डिलीवरी राइडर वांग ने काम के बीच लिखी अपनी कविताओं से लोगों का ध्यान खींचा और अब उन्हें चीन के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कारों में से एक से सम्मानित किया गया है.

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57 साल के वांग जिबिंग को चीन में 'डिलीवरी राइडर पोएट' के नाम से जाना जाता है. उन्हें प्रतिष्ठित लू शुन लिटरेरी प्राइज के कविता वर्ग में पुरस्कार मिला है. यह सम्मान उनकी तीसरी कविता संग्रह 'लो फ्लाइट' के लिए दिया गया है.

डिलीवरी के बीच लिखते थे कविताएं
साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वांग पिछले करीब 8 साल से पूर्वी चीन के जिआंगसू प्रांत के कुनशान शहर में डिलीवरी राइडर का काम कर रहे हैं. करीब 2020 में उनकी पहचान एक कवि के तौर पर बनने लगी, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी कविताएं शेयर करना शुरू किया.

इन कविताओं में उनकी अपनी जिंदगी के साथ-साथ चीन के उन लाखों लोगों की कहानी भी दिखाई देती है, जो गिग वर्कर के तौर पर काम करते हैं.

उनकी सबसे चर्चित कविताओं में से एक 'पीपल हू रश टाइम' यानी 'समय के पीछे भागते लोग' है. इस कविता में उन्होंने उन लोगों की जिंदगी को शब्द दिए हैं, जो लगातार समय के साथ दौड़ते रहते हैं.

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वांग अब तक 7,000 से ज्यादा कविताएं लिख चुके हैं. उनकी चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुकी हैं. इस साल जनवरी में उनका पहला निबंध संग्रह 'चेंगझेन' भी प्रकाशित हुआ, जिसका नाम उन्होंने अपनी मां के नाम पर रखा है.

पिता ने जला दी थीं मेनुस्क्रिप्ट
वांग ने लिखना 1988 में शुरू किया था. उस समय उन्हें लिखने का ऐसा जुनून था कि कई बार बीमार पड़ जाते थे और अस्पताल तक जाना पड़ता था. उनके पिता को उनकी यह आदत पसंद नहीं थी. एक समय तो उन्होंने वांग को लिखने से ही रोक दिया.

वांग के पिता ने उनकी करीब 2 लाख चीनी अक्षरों वाली मेनुस्क्रिप्ट तक जला दी थीं. लेकिन इस घटना के बावजूद वांग ने लिखना नहीं छोड़ा. उन्होंने अपनी डायरी में लिखा था - मैं एक महान लेखक बनूंगा.

इसके बाद करीब दो दशक तक वांग लिखते रहे, लेकिन अपनी रचनाओं का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा. इस दौरान उन्होंने कई तरह के काम किए. वह पोर्ट पर मजदूर रहे, ईंट के कारखाने में काम किया और सड़क पर कबाड़ भी इकट्ठा किया. कबाड़ बीनने के इसी अनुभव से उन्हें सोशल मीडिया पर 'Gatherer' यानी 'इकट्ठा करने वाला' नाम रखने की प्रेरणा मिली.

उंगली कट गई, फिर भी लिखना नहीं छोड़ा
वांग की कविताओं में उनकी जिंदगी के छोटे-छोटे अनुभव भी नजर आते हैं. उन्होंने अपने एक छोटे से उंगली के बारे में भी लिखा है, जो कबाड़ बीनते समय धातु की एक शीट से कट गई थी. बाद में उंगली टेढ़ी हो गई.डिलीवरी का काम करते समय वह इसी उंगली का इस्तेमाल बैग टांगने के लिए एक तरह के 'हुक' की तरह करते हैं.

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उन्होंने सड़क किनारे पड़े एक ऐसे हरे टमाटर पर भी कविता लिखी, जिसे किसी ने काटकर छोड़ दिया था. उनके लिए कविता सिर्फ बड़ी और खास चीजों के बारे में नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में दिखने वाली छोटी-छोटी चीजें भी कविता बन सकती हैं.

'मैंने अपनी जिंदगी को कभी असफल नहीं माना'
पुरस्कार मिलने के बाद वांग ने यह नहीं कहा कि अब उनकी जिंदगी बदल गई है या वह डिलीवरी का काम छोड़ देंगे. इसके उलट उन्होंने साफ कहा कि वह आगे भी खाना पहुंचाने का काम करते रहेंगे.

वांग का कहना है कि साहित्य जिंदगी से बच निकलने की सीढ़ी नहीं है. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि उन्होंने आखिरकार अपनी जिंदगी में 'कामयाबी हासिल कर ली', तो उन्होंने इस सोच को ही खारिज कर दिया. उनका कहना था कि उन्होंने कभी नहीं सोचा कि वह जिंदगी से 'बाहर निकलने' की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने अपनी जिंदगी को खुशहाल बताया.

वांग ने उन लोगों की बात से भी असहमति जताई, जो मानते हैं कि प्रसिद्ध होने से पहले के दो दशक उनकी जिंदगी में बेकार चले गए. उन्होंने उन वर्षों को अपनी जिंदगी की 'भारी बर्फबारी' बताया. उनके मुताबिक, उन वर्षों ने उन्हें बदला नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी को और समृद्ध किया.

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'डिलीवरी वर्कर' कहलाने में कोई झिझक नहीं
वांग की कविताएं सोशल मीडिया पर काफी पसंद की गईं. एक यूजर ने उनकी लेखनी के बारे में कहा कि उनके शब्द बहुत सजावटी नहीं हैं, लेकिन उनमें सच्चाई और जमीन से जुड़ाव है. उनकी कविताएं आम लोगों की जिंदगी में छिपी खूबसूरती को सामने लाती हैं.

पुरस्कार मिलने के बाद अपने भाषण में वांग ने डिलीवरी राइडर्स की मुश्किलों की ओर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने लोगों से अपील की कि डिलीवरी वर्कर्स को कम या खराब रेटिंग न दें और ज्यादा सकारात्मक प्रतिक्रिया दें.

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वांग ने यह भी कहा कि वह खुद को 'डिलीवरी वर्कर' कहे जाने का तमगा हटाना नहीं चाहते. वह इस पहचान से भागना नहीं चाहते. उन्होंने अपनी जिंदगी और पहचान को एक नदी से जोड़ते हुए कहा कि समय बीतने के बाद लोग समझेंगे कि वांग जिबिंग एक ऐसी नदी है, जो चुपचाप बहती रहती है.

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