देशभर में Central Board of Secondary Education (CBSE) की कक्षा 10 बोर्ड परीक्षाएं जारी हैं. इसी क्रम में कक्षा 10 का गणित (Maths Standard) का पेपर आयोजित किया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. परीक्षा खत्म होते ही कई छात्रों ने प्रश्नपत्र को बेहद कठिन और लंबा बताया, जबकि कुछ ने अलग-अलग क्षेत्रों में पेपर के कठिनाई स्तर को लेकर निष्पक्षता पर सवाल उठाए. खासकर तमिलनाडु क्षेत्र के छात्रों ने पेपर को अपेक्षा से ज्यादा मुश्किल बताते हुए परीक्षा प्रणाली और सिलेबस को लेकर चिंता जताई है.
सोशल मीडिया पर छात्रों की तीखी प्रतिक्रिया
सीबीएसई कक्षा 10 गणित परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है. खासकर तमिलनाडु क्षेत्र के छात्रों ने पेपर को बेहद कठिन और लंबा बताते हुए निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. कई यूजर्स ने परीक्षा के स्तर और अलग-अलग क्षेत्रों में पेपर के कठिनाई स्तर को लेकर चिंता जताई है. Central Board of Secondary Education (CBSE) की कक्षा 10 गणित परीक्षा के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने पेपर के कठिन होने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी. कई पोस्ट में दावा किया गया कि तमिलनाडु क्षेत्र का प्रश्नपत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा कठिन था.
सैंपल पेपर और वास्तविक परीक्षा के स्तर में बड़ा अंतर
कुछ यूजर्स ने सीधे तौर पर Narendra Modi, Dharmendra Pradhan और M. K. Stalin को टैग कर परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए. छात्रों का दावा है कि सोशल मीडिया पर कई छात्रों और अभिभावकों ने लिखा कि कक्षा 10 का मैथ्स पेपर अत्यधिक कठिन और समय लेने वाला था. परीक्षा केंद्रों से कई छात्र रोते हुए बाहर निकले. प्रश्नों का स्तर एनसीईआरटी सिलेबस से अधिक कठिन बताया गया. सैंपल पेपर और वास्तविक परीक्षा के स्तर में बड़ा अंतर देखने को मिला. कुछ पोस्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि अगर बोर्ड इतने उच्च स्तर के प्रश्न पूछना चाहता है, तो एनसीईआरटी में उसी स्तर की तैयारी सामग्री और सैंपल पेपर उपलब्ध कराए जाने चाहिए.
अलग-अलग क्षेत्रों में अलग कठिनाई स्तर पर सवाल
यूजर्स ने यह भी पूछा कि जब परीक्षा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होती है, तो सभी क्षेत्रों के लिए समान स्तर का प्रश्नपत्र क्यों नहीं होता. छात्रों का कहना है कि अलग-अलग कठिनाई स्तर निष्पक्ष मूल्यांकन पर सवाल खड़े करता है. कुछ लोगों ने यह भी आशंका जताई कि क्या जानबूझकर पेपर का स्तर कठिन रखा गया ताकि अधिक छात्रों को दूसरी बोर्ड परीक्षा (improvement exam) देनी पड़े.
परीक्षा प्रणाली और तैयारी पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर परीक्षा की पारदर्शिता, प्रश्न पत्र के स्तर और छात्रों के मानसिक दबाव को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है. हालांकि CBSE की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
एक्स पर संदीप मार्केट्स ने कहा- वे कठिनाई स्तर क्यों कम करेंगे? कई लोग यहां से IIT और NEET की तैयारी करेंगे. यह तो काफी अच्छा है. अपेक्षा वोरा ने लिखा- महोदय, उन्हें पढ़ने दीजिए. अब वो दिन चले गए जब कम अंकों के लिए परीक्षा रद्द नहीं की जाती थी. उन्हें अपने स्तर को ऊपर उठाना चाहिए, नहीं तो पढ़ाई छोड़ देनी चाहिए.
तेजस्वी ने लिखा-यह पीढ़ी किस दिशा में जा रही है? मैं दसवीं तक गणित में टॉपर था और मैंने दसवीं सीबीएसई में 100 में से 98 अंक प्राप्त किए थे, वो भी एक सामान्य स्कूल से. लेकिन अंदाजा लगाइए जेईई में क्या हुआ? मैंने गणित पर ध्यान देना पूरी तरह से बंद कर दिया क्योंकि मुझे लगा कि भौतिकी और रसायन विज्ञान पर समय बिताना चाहिए.
यश नाम के यूजर ने लिखा- मुझे नहीं लगता कि CBSE को कठिन परीक्षा प्रश्न पत्र बनाने के लिए दोषी ठहराने की कोई आवश्यकता है. यदि छात्र इस समय आवश्यक कार्य करने के बजाय रील देखने, गेम खेलने में व्यस्त हैं, तो ऐसा होना तय है. परीक्षा कठिन नहीं थी. बस अभ्यास और समय की कमी थी. तेजस्वी नाम के यूजर ने लिखा- यदि किसी को 10वीं कक्षा का गणित (सीबीएसई या राज्य बोर्ड) कठिन लगता है, तो उनके लिए गणित में जेईई मेन्स या एडवांस्ड स्तर तक पहुंचना बेहद मुश्किल होगा. @vipul__p ने लिखा- मुझे लगता है कि सभी छात्रों को एक ही तरह के प्रश्न पत्र मिले हैं... इसलिए चिंता मत करो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.
aajtak.in