फ्लाइट छोड़ ट्रेन से तिब्बत निकलीं दो बहनें, 20 घंटे के सफर में दिखे ऐसे नजारे, Video देख रह जाएंगे हैरान

तिब्बत पहुंचने के लिए फ्लाइट की जगह ट्रेन से करीब 20 घंटे का सफर करने वाली ट्रैवलर का अनुभव बेहद खास रहा. इस यात्रा में ऊंचे पहाड़, तिब्बती पठार, कोना झील और बदलते खूबसूरत नजारे देखने को मिले. जानें दुनिया की सबसे ऊंची रेलवे पर सफर का पूरा अनुभव.

Advertisement
चीन से तिब्बत की ट्रेन जर्नी बेहद सुंदर है.  (PHOTO: Instagram@yingfinite) चीन से तिब्बत की ट्रेन जर्नी बेहद सुंदर है. (PHOTO: Instagram@yingfinite)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

तिब्बत का नाम सुनते ही बर्फ से ढके पहाड़, ऊंचे पठार, ठंडी हवाएं और दूर तक फैले खूबसूरत लैंडस्केप आंखों के सामने आने लगते हैं. चीन से जुड़ी रेलवे सुविधा ने अब इस बेहद ऊंचाई वाले इलाके तक पहुंचना पहले के मुकाबले आसान कर दिया है. हालांकि, जहां ज्यादातर लोग समय बचाने के लिए फ्लाइट चुनते हैं, वहीं एक चीनी ट्रैवलर ने तिब्बत पहुंचने के लिए करीब 20 घंटे लंबी ट्रेन यात्रा तय की.

Advertisement

उन्होंने अपनी पूरी जर्नी को वीडियो के जरिए सोशल मीडिया पर लोगों को भी दिखाई है, उनका वीडियो खूब वायरल हो रहा है. चीनी ट्रैवलर यिंगकी लिम ने अपनी बहन के साथ यह सफर किया और अपना एक्सपीरियंस सोशल मीडिया पर शेयर भी किया.  उनके मुताबिक, इस यात्रा की खासियत सिर्फ ल्हासा पहुंचना नहीं थी, बल्कि रास्ते में धीरे-धीरे बदलते तिब्बती पठार और पहाड़ी नजारों को करीब से देखना भी था.

रात से शुरू हुआ सफर

लिम की ट्रेन रात करीब 8:50 बजे रवाना हुई. उन्हें और उनकी बहन को छह लोगों वाले स्लीपर केबिन में जगह मिली. गाइड की ओर से स्लीपर टिकट ही मौजूद कराए जा सके थे, इसलिए दोनों को दूसरे यात्रियों के साथ छोटा-सा कंपार्टमेंट शेयर करना पड़ा.

रात करीब 10 बजे दोनों सोने चले गए. अगली सुबह ट्रेन में उनको नाश्ते में ब्रेड और एक कप नूडल्स मिले, लेकिन खिड़की के बाहर का नजारा सफर को खास बना रहा था. जैसे-जैसे ट्रेन आगे बढ़ी, पहाड़ों और पठारों के सीन और खूबसूरत होते गए. खासकर गोलमुड के आसपास के नजारों ने उनका ध्यान अपनी तरफ खींचा.

Advertisement

ऊंचाई पर पहुंचते ही बदल गया अनुभव

तिब्बती पठार की ऊंचाई का असर लिम को भी महसूस हुआ और उन्हें थकान होने लगी. उन्होंने कुछ देर आराम किया. बाद में उनकी बहन ने उन्हें जगाकर बाहर का नजारा देखने को कहा. इस दौरान उन्हें कोना झील दिखाई दी, जो करीब 4,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की ऊंची मीठे पानी की झीलों में गिनी जाती है.

ट्रेन में बैठकर लंच करते हुए दोनों बहनों ने बाहर बदलते प्राकृतिक नजारों का मजा लिया. इसके बाद नागचू में ट्रेन कुछ देर रुकी. बाकी सफर में लिम ने पढ़ने और खिड़की से बाहर देखने में समय बिताया और करीब 20 घंटे बाद ट्रेन ल्हासा पहुंची.

दुनिया की सबसे ऊंची रेलवे में शामिल

इस सफर का एक और खास पहलू है किंगहाई-तिब्बत रेलवे. यह चीन के किंगहाई प्रांत के शीनिंग को तिब्बत की राजधानी ल्हासा से जोड़ती है. इसे दुनिया की सबसे ऊंची रेलवे लाइनों में माना जाता है. इसका ल्हासा तक का हिस्सा 2006 में पूरा हुआ था, जबकि बाद में इसे शिगात्से तक बढ़ाया गया.

इस रूट पर यात्रियों के लिए सॉफ्ट स्लीपर और हार्ड स्लीपर जैसे ऑप्शन मिलते हैं. सॉफ्ट स्लीपर ज्यादा आरामदायक होते हैं, जबकि हार्ड स्लीपर बजट फ्रेंडली होते हैं. लंबी यात्रा के दौरान ट्रेन में डाइनिंग कार की फैसिलिटी भी होती है, जहां यात्रियों को खाना मिल सकता है. 

Advertisement

यानी तिब्बत की यात्रा सिर्फ मंजिल तक पहुंचने का नाम नहीं, बल्कि रास्ते को महसूस करने का भी अनुभव है, तो यह ट्रेन सफर रोमांच और खूबसूरत नजारों का एक अलग ही एक्सपीरियंस भी देती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »