Most Dangerous Fort in Maharashtra: अगर आपको घूमने के साथ एडवेंचर और ट्रेकिंग का शौक है तो महाराष्ट्र का कलावंतिन दुर्ग आपके लिए एक रोमांचक जगह हो सकती है. मुंबई से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित यह किला अपनी खड़ी चढ़ाई और मुश्किल रास्ते के लिए जाना जाता है. यहां पहुंचने के लिए बेहद संकरी और ऊबड़-खाबड़ सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है. यही वजह है कि इस ट्रेक को आसान नहीं माना जाता.
क्यों खास है कलावंतिन दुर्ग?
कलावंतिन दुर्ग पनवेल और माथेरान के बीच स्थित है. लगभग 2,300 फीट की ऊंचाई पर बना यह किला कई सदियों पुराना माना जाता है. किले तक पहुंचने का रास्ता ही इसे बाकी जगहों से अलग बनाता है.
ट्रेक के दौरान चट्टानों को काटकर बनाई गई खड़ी सीढ़ियों पर चढ़ना पड़ता है. इन सीढ़ियों के कई हिस्सों में सुरक्षा के लिए रेलिंग या मजबूत सहारा नहीं है. इसलिए यहां ट्रेकिंग के लिए अच्छी फिटनेस, बैलेंस और सावधानी बेहद जरूरी है.
ऊपर पहुंचकर दिखता है शानदार नजारा
मुश्किल चढ़ाई के बाद जब आप किले के ऊपरी हिस्से में पहुंचते हैं तो आसपास का नजारा सारी थकान दूर कर देता है. यहां से पहाड़ों, घाटियों और आसपास के इलाकों का खूबसूरत दृश्य दिखाई देता है. साफ मौसम में माथेरान, चंदेरी और इरशाल जैसे इलाकों के नजारे भी देखे जा सकते हैं.
किले का इतिहास भी है दिलचस्प
कलावंतिन दुर्ग के इतिहास को लेकर अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं. कुछ लोगों के अनुसार इसका पुराना नाम मुरंजन किला था. वहीं, एक मान्यता यह भी है कि इसका नाम कलावंतिन नाम की रानी के नाम पर पड़ा था. बाद में छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल से जुड़े इतिहास में भी इस किले का उल्लेख मिलता है.
यहां पहुंचें कैसे?
कलावंतिन दुर्ग के ट्रेक की शुरुआत आमतौर पर ठाकुरवाड़ी गांव से होती है. मुंबई से ट्रेन के जरिए पनवेल पहुंचा जा सकता है. इसके बाद बस या स्थानीय साधन से ठाकुरवाड़ी पहुंचकर ट्रेक शुरू किया जाता है.
अगर आप पहली बार यह ट्रेक कर रहे हैं तो किसी अनुभवी गाइड या ट्रेकिंग ग्रुप के साथ जाना बेहतर रहेगा. कुछ ट्रैवल एजेंसियां ट्रेक के साथ कैंपिंग और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराती हैं.
कब जाना चाहिए?
कलावंतिन दुर्ग का ट्रेक मानसून के दौरान करना जोखिम भरा हो सकता है. बारिश में चट्टानी सीढ़ियां और रास्ते काफी फिसलन भरे हो जाते हैं. इसलिए अक्टूबर से मार्च के बीच का समय ट्रेकिंग के लिए बेहतर माना जाता है.
इन बातों का रखें ध्यान
यह कोई ट्रेक नॉर्मल नहीं है. अगर आपको ऊंचाई से डर लगता है, सेहत सही नहीं है या मौसम खराब है तो ट्रेक करने से बचना बेहतर है. ट्रेक पर जाते समय अच्छे ग्रिप वाले जूते, पर्याप्त पानी और जरूरी सुरक्षा सामान अपने साथ लेकर ही निकलें.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क