Best Tourist Spots in Aurangabad: महाराष्ट्र का औरंगाबाद जिसे अब दुनिया छत्रपति संभाजीनगर के नाम से जानती है, सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि इतिहास के शौकीनों के लिए एक टाइम मशीन है. अगर आपको पुरानी वास्तुकला, रहस्यमयी किले और शांत आध्यात्मिक जगहें देखना और घूमना पसंद है, तो यह शहर आपको बहुत अट्रैक्टिव लगेगा.
प्राचीन चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाओं से लेकर मुग़लकालीन इमारतों तक यह जगह हर मॉडर्न ट्रैवलर और फोटोग्राफर के लिए एक परफेक्ट रोड-ट्रिप डेस्टिनेशन है. अगर आप इतिहास और भारतीय विरासत को करीब से देखना चाहते हैं, तो अपनी अगली ट्रिप के लिए छत्रपति संभाजीनगर की इन 5 सबसे आइकॉनिक जगहों को लिस्ट में जरूर शामिल करें.
यूनेस्को की यह विश्व धरोहर असल में मध्यकालीन भारत का सबसे बड़ा ओपन-एयर म्यूजियम है, जहां बेसाल्ट की पहाड़ियों को काटकर 34 मंदिर और मठ बनाए गए हैं. 6वीं से 12वीं शताब्दी के बीच तराशी गई ये गुफाएं हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म का एक परफेक्ट को-एग्जिस्टेंस हब हैं. यहां का सबसे फेमस स्पॉट कैलाश मंदिर है,जिसे किसी टेक्नोलॉजी के बिना, केवल छेनी और हथौड़ी से एक ही विशाल चट्टान को ऊपर से नीचे काटकर बनाया गया है.
दौलताबाद किला
औरंगाबाद से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित दौलताबाद किला असल में मध्यकालीन भारत का अल्टीमेट सिक्योरिटी कॉम्प्लेक्स है. एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस किले तक पहुंचना आज के दौर में किसी तगड़े कार्डियो वर्कआउट जैसा है, लेकिन इसके शिखर पर पहुंचते ही जो पैनोरमिक व्यू मिलता है, वह आपकी सारी थकान दूर कर देता है. इंजीनियरिंग के लिहाज से यह किला उस दौर की हाइ-टेक सुरक्षा व्यवस्था का नमूना है, जहां दुश्मनों को चकमा देने के लिए मजबूत दीवारें, वॉचटॉवर और भूलभुलैया जैसी अंधेरी सुरंगें बनाई गई थीं.
बीबी का मकबरा
औरंगाबाद का बीबी का मकबरा ताजमहल का ही एक छोटा और खूबसूरत वर्जन है. इसे आजम शाह ने अपनी मां दिलरस बानू बेगम की याद में बनवाया था. हरे-भरे मुगलिया गार्डन, फव्वारों और शानदार सिमेट्री वाली इसकी वास्तुकला आज के ट्रैवलर्स के लिए इसे एक परफेक्ट इंस्टाग्राम स्पॉट बनाती है.
अजंता की गुफाएं
औरंगाबाद के पास स्थित अजंता की गुफाएं असल में प्राचीन भारत की एक नेचुरल आर्ट गैलरी हैं. 29 गुफाओं का यह विशाल कॉम्प्लेक्स ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से जुड़ा है, जो इसे दुनिया की सबसे पुरानी बौद्ध विरासत में शामिल करता है. यहां की दीवारों पर बनी फ्रेस्को पेंटिंग्सभगवान बुद्ध की जातक कथाओं और उस दौर की लाइफस्टाइल को इतनी बारिकी से दर्शाती हैं कि यह आज के हिसाब से एक विजुअल स्टोरीटेलिंग मास्टरपीस लगता है. सह्याद्रि पहाड़ियों की हरियाली और वाघूर नदी के शानदार व्यू के बीच बसी यह जगह इतिहास और नेचर लवर्स के लिए एक अल्टीमेट डेस्टिनेशन है.
पंचक्की
17वीं शताब्दी की पंचक्की मध्यकालीन भारत का बेहतरीन ग्रीन-एनर्जी का उदाहरण है. यह जलचक्की बिना किसी मॉर्डन टेक्निक के पानी के दबाव से आटा पीसती थी. मस्जिद, सराय, फव्वारों और छायादार पेड़ों से घिरा यह परिसर आज के ट्रैवलर्स के लिए रिलैक्स करने का एक बेहद शांत और पीसफुल हैंगआउट स्पॉट है.
औरंगाबाद कैसे पहुंचें?
छत्रपति संभाजीनगर हवाई, रेल और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है. दिल्ली और अन्य बड़े शहरों से यहां के लिए फ्लाइट मिल सकती है. ट्रेन से मुंबई, दिल्ली समेत कई शहरों से पहुंचा जा सकता है. मुंबई और पुणे से बस या कार के जरिए भी सड़क मार्ग से यात्रा की जा सकती है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क