Jio Vs Starlink: 399 रुपये में फाइबर से इंटरनेट, फिर क्यों चाहिए 5 हजार वाला स्टारलिंक? सैटेलाइट इंटरनेट की असली जरूरत

Jio Vs Starlink : Elon Musk की स्टारलिंक भारत में सभी अप्रूवल का इंतजार कर रही है, जिसके बाद वह भारत में अपनी सैटेलाइट बेस्ड कम्युनिकेशन सर्विस को शुरू कर पाएंगे. सरकार की तरफ से स्टारलिंक, जियो समेत तीन कंपनियों को लाइसेंस दिया जा चुका है. अब सवाल आता है कि फाइबर केबल की तुलना में स्टारलिंक भारत में कितना जरूरी है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं

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स्टारलिंक सैटेलाइट की मदद से इंटरनेट सर्विस देता है. (Photo: AI Generated) स्टारलिंक सैटेलाइट की मदद से इंटरनेट सर्विस देता है. (Photo: AI Generated)

रोहित कुमार

  • नई दिल्ली ,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:15 AM IST

भारत में Jio और Airtel की तरफ से भारत के कई इलाकों में हाई स्पीड 5G इंटरनेट और फाइबर केबल के जरिए ब्रॉडबैंड की सर्विस दी जाती है. फाइबर बेस्ड ब्रॉडबैंड प्लान की शुरुआती कीमत 399 रुपये है, जबकि अमेरिका के शिकागो में स्टारलिंक की सर्विस 5499 रुपये से शुरू होती है. अब सवाल आता है कि आखिर भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की जरूरत क्यों है? 

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सबसे पहले जान लेते हैं कि हाल ही में स्टारलिंक के बॉस Elon Musk ने भारत के प्रति अपना कड़ा रुख जाहिर किया था, जिसमें उन्होंने भारत में स्टारलिंक की सर्विस देरी होने को लेकर भारत के सिस्टम पर सवाल खड़ा किया था. इसके बाद भारत सरकार की तरफ से जवाब दिया गया कि भारत की नीति सभी के लिए एक समान है. 

भारत सरकार ने बताया है कि भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन (SATCOM) के लिए स्टारलिंक, जियो समेत तीन कंपनियों को लाइसेंस दिया जा चुका है. अब उन कंपनियों को सिक्योरिटी अप्रूवल पास करना होगा, उसके बाद स्पेक्ट्रम नीलामी होगी. 

फिर Elon Musk ने अंबानी को लेकर पोस्ट किया, जिसके बाद रिलांयस जियो ने पोस्ट करके बताया कि वह कम्प्टीशन के लिए तैयार हैं. 

भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन की जरूरत 

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सैटेलाइट बेस्ड इंडरनेट या कम्युनिकेशन सर्विस, असल में बिना मोबाइल टावर के काम करते हैं. लॉ ऑर्बिट पर कई सैटेलाइट की मदद से एक कवरेज एरिया को तैयार किया है, जिसके बाद किसी भी जगह पर इंटरनेट को प्रोवाइड कराया है. प्राकृतिक आपदा, भूकंप और सुनामी के दौरान भी सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस चलती रहती है. 

स्टारलिंक जैसी सर्विस रिमोट एरिया, पहाड़ी इलाकों, छोटे द्वीप, बॉर्डर इलाकों में उपयोगी साबित होगा. जहां पर फाइबर केबल को बिछाया नहीं जा सकता है, उन इलाकों के लिए सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस बड़े ही काम की साबित होगी. 

यह भी पढ़ें: Jio vs Starlink : भारत में लॉन्चिंग के लिए तैयार जियो और स्टारलिंक, कौन मारेगा बाजी और कितने का होगा रिचार्ज?

भारत में अभी भी कई इलाके हैं, जहां पर फाइबर केबल नहीं पहुंच पाई है. बदलते मौसम और कई पहाड़ी इलाकों में फाइबर केबल नहीं पहुंच पाई है, या फिर भूस्खलन की वजह की वजह से अक्सर फाइबर केबल टूट जाती हैं. ऐसे में कम्युनिकेशन में बार-बार रुकावट आती है. ऐसे सुदूर इलाकों में स्टारलिंक जैसी सर्विस बड़े ही काम साबित होगी. 

भारत में स्टारलिंक की कीमत? 

Elon Musk की स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस मिल चुका है और आने वाले दिनों में सभी अप्रूवल मिलने के बाद वे अपनी सर्विस भारत में शुरू कर पाएंगे. अब सवाल आता है कि भारत में कीमत क्या होगी, जिसको लेकर अभी तक कंपनी ने कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं दी है. अमेरिका के शिकागो में शुरुआती प्लान 55 अमेरिकी डॉलर (करीब 5224 रुपये) है. यह एक मंथली प्लान है. 

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दिल्ली-NCR जैसे शहरों को फायदा? 

दिल्ली-NCR जैसे शहरों में फाइबर लाइन मौजूद है, जिनसे कंपनियों और लोगों को हाई स्पीड इंटरनेट मिलता है. फाइबर कनेक्शन की मदद से कम लेटेंसी, स्टेबल कनेक्शन और अच्छी अपलोड स्पीड मिलती है. साथ ही जियो की तरफ से शुरुआती फाइबर बेस्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शन 399 रुपये में आता है, जिसमें 30mbps की स्पीड मिलती है.  

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