चीन ने वो कर दिखाया जिसका अमेरिका को डर था, तैयार किया पावरफुल AI

चाइनीज स्टार्टअप ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का एक पावरफुल मॉडल तैयार कर दिया है, जिसका नाम GLM 5.2 है. चीनी स्टार्टअप का यह AI मॉडल एंथ्रोपिक के फ्लैगशिप AI मॉडल Mythos के बराबर के बग खोजने का टास्क कंप्लीट कर सकता है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

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चाइनीज स्टार्टअप ने तैयार किया पावरफुल AI. (Photo: file Photo) चाइनीज स्टार्टअप ने तैयार किया पावरफुल AI. (Photo: file Photo)

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:10 AM IST

चीन ने एक बार फिर से अमेरिका की सिलिकन वैली में खलबली मचा दी है. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर सिलिकन वैली में बड़ी तैयारी कर रहे हैं और उस पर कई इनवेस्टर्स की रकम भी दांव पर लगी है. साथ ही एंथ्रोपिक के पावरफुल Mythos AI मॉडल को लेकर एकाधिकार है.

लेटेस्ट रिपोर्ट में रिसर्चर ने दावा किया है कि एक चाइनीज AI स्टार्टअप Zhipu AI ने न्यू ओपन वेट मॉडल तैयार किया ह, जिसका नाम GLM 5.2 है. चीनी स्टार्टअप का यह AI मॉडल एंथ्रोपिक के फ्लैगशिप AI मॉडल Mythos मॉडल के बराबर के बग खोजने का टास्क कंप्लीट कर सकता है. ये जानकारी वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सामने आई है.

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चाइनीज स्टार्टअप Zhipu AI (जिसे Z.ai भी कहा जाता है) ने GLM-5.2 मॉडल पेश किया है, जो एंथ्रोपिक के मॉडल की तरह ही सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का पता लगाने में मदद करता है. इसकी परफॉर्मेंस अमेरिकी मॉडल के बराबर है. 

रीजनिंग में अभी भी पीछे है 

चाइनीज मॉडल जनरल रीजनिंग और व्यापक AI पावर में अभी भी Anthropic और OpenAI के टॉप मॉडल्स से पीछे है. शोधकर्ताओं का कहना है कि साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में दोनों के बीच का अंतर काफी कम है.  

सस्ते AI प्लेटफॉर्म की मांग बढ़ी

दुनियाभर में अचानक से सस्ते AI प्लेटफॉर्म की मांग बढ़ी है और ऐसे में चीनी स्टार्टअप और कंपनियों के दस्तक देने से ये मांग पूरी हो सकती है. अमेरिकी कंपनियों के प्रोडक्ट और सर्विस महंगी होती हैं, जबकि चीन दुनियाभर में सस्ते और किफायती प्रोडक्ट बेचने के लिए जाना जाता है. 

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यह भी पढ़ें: एंथ्रोपिक को राहत मगर भारत को नहीं मिलेगा पावरफुल AI, अमेरिका ने बदले नियम

GLM-5.2 एंथ्रोपिक के Mythos से क्यों है अलग? 

चाइनीज स्टार्टअप का GLM-5.2 मॉडल, एंथ्रोपिक से अलग भी है. चाइनीज स्टार्टअप का मॉडल ओपन-वेट मॉडल है, जिसका मतलब है कि डेवलपर्स इसको डाउनलोड कर सकते हैं. अपनी जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव कर सकते हैं और अपने हार्डवेयर पर बिना क्लाउड सर्विस के चला सकते हैं. 

एक्सपर्ट के मुताीबिक, ओपन-वेट मॉडल की मदद से डेवलपर्स और कंपनियों को ज्यादा आजादी मिलेगी. वहीं, साइबर एक्सपर्ट का मानना है कि इससे साइबर अपराधियों के लिए ऐसे AI सिस्टम को इस्तेमाल करना आसान हो सकता है, जो कंपनियों और लोगों के लिए खतरा बन सकती है. 

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