दिवाली छोड़ी, छुट्टियां छोड़ीं... वैभव सूर्यवंशी की 'क्रिकेट वाली सनक' की कहानी पहली बार सामने आई

राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंडर ने पहली बार खुलासा किया कि कैसे वैभव ने दिवाली और छुट्टियां छोड़कर ट्रेनिंग को चुना, अंडर-19 वर्ल्ड कप खत्म होने के अगले ही दिन कहा- 'I want to go to the pitch' और उसी जुनून ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का 'बेबी बॉस' बना दिया.

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वैभव की कहानी... रोमी (@starsportsindia screengrab) की जुबानी: क्रिकेट के लिए सब कुर्बान. वैभव की कहानी... रोमी (@starsportsindia screengrab) की जुबानी: क्रिकेट के लिए सब कुर्बान.

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:30 AM IST

आईपीएल 2026 खत्म हुआ, तो एक 15 साल का लड़का भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी चर्चा बन चुका था. उसके बल्ले से निकले 776 रन, 72 छक्के और ऑरेंज कैप ने दुनिया को चौंका दिया. बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय गेंदबाज उसके सामने बेबस नजर आए और क्रिकेट विशेषज्ञ उसे भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा बताने लगे.

... लेकिन शायद दुनिया ने वैभव सूर्यवंशी की कहानी का सिर्फ आखिरी अध्याय देखा.

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उस किताब के शुरुआती पन्नों पर न कोई कैमरा था, न तालियां और न ही कोई ऑरेंज कैप. वहां सिर्फ पसीना था, अनुशासन था और क्रिकेट के लिए ऐसी जिद, जिसने एक किशोर की जिंदगी ही बदल दी.

राजस्थान रॉयल्स (RR) के टीम मैनेजर रोमी भिंडर ने पहली बार वैभव के बारे में कुछ ऐसे किस्से साझा किए हैं, जो बताते हैं कि महान पारियां सिर्फ मैच के दिन नहीं बनतीं, उनकी नींव बहुत पहले रखी जाती है.

'जश्न बाद में... पहले पिच'

इसी साल फरवरी में जब अंडर-19 विश्व कप खत्म हुआ... लंबे टूर्नामेंट की थकान थी. हर किसी को लग रहा था कि अब खिलाड़ी कुछ दिन परिवार के साथ समय बिताएंगे, दोस्तों से मिलेंगे और शरीर को आराम देंगे.

रोमी भिंडर भी यही सोच रहे थे. लेकिन जैसे ही वैभव हरारे से मुंबई पहुंचे, उन्होंने ऐसा जवाब दिया जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. 

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'I want to go to the pitch.' भिंडर ने समझाया- 'दो-तीन दिन आराम कर लो. 'लेकिन वैभव नहीं माने. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- 'सिर्फ आधा घंटा...'

शायद उन्हें भी पता था कि वह आधा घंटा सिर्फ अभ्यास नहीं, बल्कि अगले सपने की शुरुआत है.

जब दिवाली भी छोटी पड़ गई...

अगर कोई एक घटना वैभव की सोच को सबसे बेहतर तरीके से समझाती है, तो वह दिवाली की है.

पूरा देश रोशनी के त्योहार की तैयारी कर रहा था. घरों में मिठाइयां थीं. परिवार एक-दूसरे का इंतजार कर रहे थे. लेकिन वैभव ने घर लौटने की बजाय नेट्स का रास्ता चुना.

समस्तीपुर में परिवार उनका इंतजार कर रहा था, मगर उन्होंने त्योहार भी ट्रेनिंग के साथ बिताया. 15 साल की उम्र में यह फैसला आसान नहीं होता.

... लेकिन शायद यही वे फैसले हैं, जो साधारण खिलाड़ियों और असाधारण खिलाड़ियों के बीच फर्क पैदा करते हैं. लोग छक्के गिनते रहे... वह घंटे गिनता रहा. दुनिया ने आईपीएल में उसके 72 छक्के गिने. 776 रन का आंकड़ा देखा. ऑरेंज कैप देखी.

लेकिन शायद किसी ने यह नहीं देखा कि इन आंकड़ों की शुरुआत उन दिनों हुई थी, जब बाकी लोग छुट्टियां मना रहे थे और वैभव नेट्स में गेंदें खेल रहे थे. जब दूसरे खिलाड़ी आराम तलाश रहे थे, तब वैभव अभ्यास के लिए रोशनी जलवाने की जिद कर रहे थे.

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क्रिकेट में प्रतिभा आपको दरवाजे तक पहुंचा सकती है. लेकिन दरवाजा खोलने का काम सिर्फ मेहनत करती है.

रोमी भिंडर क्यों कह रहे हैं. 'वह महान खिलाड़ी बनेगा.' राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंडर का वैभव पर भरोसा किसी एक पारी की वजह से नहीं है. उन्होंने वैभव को उन दिनों में देखा है, जब कैमरे बंद थे. उन्होंने उसे जीत के अगले दिन भी नेट्स मांगते देखा है. उन्होंने उसे त्योहारों से ज्यादा ट्रेनिंग को महत्व देते देखा है.

शायद इसलिए उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा- 'I do believe he's going to be a great player.' यह भविष्यवाणी सिर्फ प्रतिभा पर नहीं, बल्कि उस मानसिकता पर आधारित है, जो हर महान खिलाड़ी की पहचान होती है.

ये भी पढ़ें - कौन है यह शख्स जो वैभव सूर्यवंशी के साथ साये की तरह रहता है? 'बेबी बॉस' के घर तक पहुंच गया 

अब बारी टीम इंडिया की...

आयरलैंड दौरे पर वैभव को मौका नहीं मिला. बहस हुई कि 15 साल का खिलाड़ी क्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए तैयार है? लेकिन शायद असली सवाल उम्र का नहीं, तैयारी का है. 

- जो खिलाड़ी वर्ल्ड कप के अगले दिन नेट्स पर लौट आए...

- जो दिवाली की छुट्टियां भी ट्रेनिंग में गुजार दे...

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- जो आईपीएल में दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों के खिलाफ ऑरेंज कैप जीत ले...

- क्या उसकी तैयारी पर अब भी सवाल उठाया जा सकता है?

इंग्लैंड सीरीज से पहले यह सवाल सिर्फ क्रिकेट प्रेमियों का नहीं, बल्कि भारतीय टीम मैनेजमेंट के सामने भी खड़ा है...

लेकिन शायद उनकी सबसे बड़ी पारी उन दिनों में खेली गई थी, जब स्टेडियम खाली थे, कैमरे बंद थे और पिच पर सिर्फ एक लड़का अपने सपनों के साथ मौजूद था.

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