रोहित-राहुल की गलतियों का 'पोस्टमार्टम', जिसने वर्ल्ड कप का 'हासिल' जीरो कर दिया!

अभी-अभी वर्ल्ड कप ख़तम हुआ है, इंग्लैंड विजेता बना है और भारतीय टीम सेमी-फ़ाइनल में 10 विकेट से हारकर अपने देश वापस आ चुकी है. भारतीय मैनेजमेंट ने मौके की नजाकत को कतई नहीं समझा और सब गोड़ दिया.

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केएल राहुल और रोहित शर्मा केएल राहुल और रोहित शर्मा

केतन मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 16 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 11:48 AM IST

सेकंड एसी के कोच में मुख्यमंत्री कमलनाथ तिवारी के सामने गौरी शंकर पांडे का छोटा भाई बद्री शंकर पांडे और उसका साथी जैक्सन बैठे थे. दोनों को सीएम साहब से कुछ ज़रूरी बात करनी थी. गंभीर बात. सीएम साहब ने अपने पीए को बाहर जाने का इशारा किया. बद्री ने अपनी व्यथा बतानी शुरू की. इतने में जैक्सन अपना आप खो बैठा और डायरेक्ट सीएम साहब पर रणविजय के गांव में लोगों को मारने का इल्ज़ाम लगा दिया. कमलनाथ तिवारी को अपना आपा खोते देख बद्री ने जैक्सन से कहा, "मौके का नजाकत नहीं समझते हो. का, सब गोड़ दिए तुम! जैक्सन, आज इज्जत पे पानी फेर दिया तुम."

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तिग्मांशु धूलिया की फ़िल्म हासिल की ये कहानी क्यूं याद आयी? क्यूंकि अभी-अभी वर्ल्ड कप ख़तम हुआ है, इंग्लैंड विजेता बना है और भारतीय टीम सेमी-फ़ाइनल में 10 विकेट से हारकर अपने देश वापस आ चुकी है. भारतीय मैनेजमेंट ने मौके की नजाकत को कतई नहीं समझा और सब गोड़ दिया. और इस निराशाजनक प्रदर्शन के मुख्य अभियुक्त के रूप में भारतीय ओपनिंग जोड़ी के सिवा और कोई नहीं दिखता. 

हासिल फिल्म में इरफान खान.

रोहित शर्मा टी-20 टीम के कप्तान थे. बैटिंग की शुरुआत करने की ज़िम्मेदारी भी उठायी हुई थी. 6 मैचों में 116 रन बनाये. एवरेज 19.33 का और स्ट्राइक रेट 106.4 का. ये शर्मनाक है. सनद रहे कि रोहित शर्मा खालिस बल्लेबाज़ हैं. और ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ बीते टी-20 वर्ल्ड कप के आंकड़ों को आधार बनाकर बात की जा रही है. बीते 12 महीने में रोहित शर्मा ने 32 बार अंतर्राष्ट्रीय टी-20 मैच में बल्लेबाज़ी की है जिसमें उन्होंने 27.16 के एवरेज और 137 के स्ट्राइक रेट से 815 रन बनाये हैं. और विश्व-कप विजेता टीम इंग्लैण्ड के कप्तान और ओपनिंग बल्लेबाज़ जॉस बटलर ने इसी समय में 15 बार बल्लेबाज़ी की है जिसमें उन्होंने 35.53 के औसत से और 160.4 के स्ट्राइक रेट के साथ 462 रन बनाये हैं. रोहित और बटलर की पेस और बाउंस के बारे में तुलना कर लेते हैं. इसके लिये नमूने के तौर पर पाकिस्तान और साउथ अफ़्रीका को लिया गया है. बीते 12 महीने में रोहित शर्मा ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 107 के स्ट्राइक रेट से रन बनाये हैं जबकि इसी बॉलिंग अटैक के सामने बटलर का स्ट्राइक रेट 153 का है. वही साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ बटलर ने 210 के स्ट्राइक रेट से रन बनाये हैं जबकि रोहित शर्मा का स्ट्राइक रेट 106 पर अटका हुआ है.

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केएल राहुल ने बीते 12 महीने में 30 से कुछ ज़्यादा के एवरेज और 126 के स्ट्राइक रेट के साथ 18 पारियों में 514 रन बनाये हैं. साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ 3 मैचों में उनका स्ट्राइक रेट 119 का है जबकि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 110 के स्ट्राइक रेट से रन बनाकर आये हैं. 

ओपनिंग जोड़ी के लिये ये आंकड़े निराशाजनक हैं. अपने एवरेज स्कोर के लिये रोहित और राहुल क्रमशः 20 और 24 गेंदें खेल रहे हैं. जबकि डेविड वॉर्नर के बीते एक साल के रिकॉर्ड को देखें तो मालूम पड़ेगा कि वो अपने औसत स्कोर 34 रनों के लिये मात्र 23 गेंदें खेल रहे हैं. जॉस बटलर अपने औसत स्कोर 35.53 के लिये 22 गेंदें खेल रहे हैं. मज़े की बात ये है कि केएल राहुल ने 18 पारियों में 7 बार 50 का स्कोर पार किया है जो इन चार खिलाड़ियों में सबसे ज़्यादा है. लेकिन इसके साथ ही 9 ऐसी पारियां भी हैं जहां उन्होंने 10 या उससे कम रन बनाये हैं. यानी, वो बड़े स्कोर तो बना रहे हैं लेकिन छोटे स्कोर बनाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है. टी-20 की बल्लेबाज़ी ऐसी है जहां 20-25 रनों के बाद के स्कोर में ये एक्स्पेक्ट किया जाता है कि आप 180 से ज़्यादा के स्ट्राइक रेट से रन बना रहे हों. वो भी तब, जब आपको पॉवरप्ले के पूरे 6 ओवर खेलने को मिले. 18 में से 9 पारियों में उन्होंने 10 से कम रन बनाकर ये भी बताया है कि वो हर दूसरे मौके पर नंबर 3 के खिलाड़ी (ज़्यादातर मौकों पर, विराट कोहली) पर ज़िम्मेदारी डाल देते हैं.

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रोहित शर्मा.

आप पाकिस्तान वर्सेज़ इंग्लैण्ड के फ़ाइनल मैच को देखिये. जॉस बटलर के सामने नसीम शाह थे. नसीम की पहली 3 गेंदें उनके बल्ले के किनारे को छोड़ती हुई निकलीं. नसीम शाह उस ओवर में बाज़ी जीतते दिख रहे थे. चौथी गेंद पर बटलर ने नसीम की अंदर आ रही गेंद को लाइन से हटकर स्कूप कर दिया. ओवर में 11 रन (वाइड गेंद पर आये चौके से 5 रन जुड़ चुके थे) आ चुके थे. बटलर नसीम को स्कूप करने के फेर में आउट भी हो सकते थे. लेकिन कम से कम वो रन निकालने की कोशिश में लगे हुए थे. भारतीय ओपनिंग बल्लेबाज़ों में ये कमी साफ़ दिखी. रोहित और राहुल, दोनों ही लगातार कई गेंदों को यूं ही निकल जाने देते रहे जिससे न केवल गेंदबाज़ उनपर हावी होते रहे बल्कि आने वाले बल्लेबाज़ों पर भी रन की गति की भरपाई करने का दबाव आता रहा. डॉट बॉल्स और उनके बीच सिंगल्स के चलते आने वाले बल्लेबाज़ों पर कैसा दबाव आता है, बीता वर्ल्ड कप इसका बेहतरीन उदाहरण है. हर गेंद पर रन निकालना टी-20 क्रिकेट की ज़रूरत है. रन बनाने के क्रम में आप आउट होते हैं, वो क्षम्य है. लेकिन डॉट गेंदों का दबाव सिर्फ़ आपके ही नहीं बल्कि आने वालों पर भी दबाव बनाता है और उनके विकेट का सबब बनता है.

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भारतीय मैनेजमेंट के सामने पृथ्वी शॉ, इशान किशन, संजू सैमसन जैसे नामों का ऑप्शन था. लेकिन अनुभव के फेर में टीम राहुल और रोहित को पकड़े चली जहां ऐसे नतीजे देखने को मिले. ओपनिंग करते हुए फ़ील्डिंग की पाबंदियों का फ़ायदा उठाने की हर संभव कोशिश की जानी चाहिये. इसके लिये ये नाम सबसे मुफ़ीद मालूम देते हैं. मगर इन्हें तो अंतिम ग्यारह में छोड़िये, ऑस्ट्रेलिया ले जायी गयी टीम में ही जगह नहीं मिली. ओपनिंग के बाद दो ऐंकर खिलाड़ियों की ज़रूरत होती है और हमारे पास विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव के रूप में सबसे सॉलिड लोग मौजूद थे. उन्होंने अपना काम बखूबी किया भी. और इस तरह से ओपनिंग जोड़ी को ज़िम्मेदार ठहराना एकदम ठीक मालूम लगने लगता है.

केएल राहुल.

अगर रोहित शर्मा और केएल राहुल को पारी संभालने का काम करना है तो वो ओपनिंग स्लॉट में क्या कर रहे हैं. और यदि वो ओपनिंग करने के लिये जाते हैं तो पारी को आधार देने का काम क्यूं करने लगते हैं? फ़िलहाल, इनिंग्स को ऐंकर करने वाले 3 लो दिखते हैं - केएल राहुल, रोहित शर्मा और विराट कोहली. और इन लोगों को एक ही स्पॉट मिल सकता है. क्यूंकि 4 नंबर पर सूर्यकुमार यादव जम चुके हैं और निर्विवादित रूप से टीम के सबसे अच्छे टी-20 बल्लेबाज़ हैं. 

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एक गिला और 

एक मौका था जब टीम में 5 ठोस गेंदबाज़ों के अलावा सचिन, सहवाग, युवराज, रैना भी गेंदबाज़ी के लिये मौजूद रहते थे. कभी भी इनकी ओर गेंद उछाली जा सकती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं है. टॉप और मिडल ऑर्डर में कोई भी ऐसा नहीं है जो हाथ घुमा सके. हार्दिक पंड्या की चोटों की इलस्ट को देखकर उनपर बहुत लम्बे समय के लिये भरोसा नहीं किया जा सकता है. और इसी वजह से ही वो कप्तानी के भी अच्छे ऑप्शन नहीं नज़र आते हैं.

टीम इंडिया को किसी भी हाल में एक ग्लेन मैक्सवेल या लिविंगस्टन जैसा बल्लेबाज़ चाहिये जो बल्ले से भूत बनाने के साथ सन्नाटे में 3-4 ओवर निकालकर चला जाए. ऑस्ट्रेलिया इस विश्व कप में ऐसी टीम के साथ खेल रहा था जिसमें 11 में से 7 जन बॉलिंग कर सकते थे और पूरे 4 ओवर फेंकने वालों में से थे. इस तरह की टीम से कप्तान को एक सहूलियत ये मिलती है कि वो एक के पिटने पर दूसरे के पास जा सकता है और ये भी कि वो एक गेंदबाज़ी में जल्दी-जल्दी बदलाव कर सकता है जिससे बल्लेबाज़ को लगातार वेरिएशन मिलती रहे. 

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