क्रिकेट इतिहास में कई महान गेंदबाज हुए, लेकिन न्यूजीलैंड के सर रिचर्ड हैडली का नाम उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल है, जिन्होंने अकेले दम पर अपनी टीम की तकदीर बदल दी. 3 जुलाई 1951 को क्राइस्टचर्च में जन्मे हैडली ने ऐसे दौर में न्यूजीलैंड क्रिकेट को नई पहचान दिलाई, जब टीम को वर्ल्ड क्रिकेट में ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जाता था.
अपने 17 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में रिचर्ड हैडली ने बतौर गेंदबाज कमाल का प्रदर्शन किया. वह टेस्ट क्रिकेट में 400 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज बने. सिर्फ गेंदबाजी ही नहीं, हैडली निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी के लिए मशहूर रहे.
कंगारुओं के खिलाफ काटा गदर
रिचर्ड हैडली के करियर की सबसे यादगार कहानी 1985-86 की ऑस्ट्रेलिया सीरीज से जुड़ी है. ब्रिस्बेन टेस्ट में उन्होंने ऐसी गेंदबाजी की, जिसे क्रिकेट इतिहास के महानतम स्पेल्स में गिना जाता है. पहली पारी में हैडली ने 9 विकेट लेने के लिए सिर्फ 52 रन खर्च किए. फिर दूसरी पारी में भी उन्होंने 6 विकेट चटकाए. यानी पूरे मैच में कुल 15 विकेट. उनके इस प्रदर्शन की बदौलत न्यूजीलैंड ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया की धरती पर टेस्ट मैच जीता और सीरीज में 2-1 से ऐतिहासिक जीत हासिल की.
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दिलचस्प बात यह है कि अगर रिचर्ड हैडली अपने साथी वॉन ब्राउन को पहला टेस्ट विकेट दिलाने के लिए शानदार कैच नहीं पकड़ते, तो उस समय टेस्ट इतिहास का दूसरा 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड भी उनके नाम हो सकता था. क्रिकेट लेखक फ्रैंक कीटिंग ने हैडली के उस कैच को 'कैच ऑफ द सेंचुरी' तक कहा था.
79वें टेस्ट मैच में रच दिया इतिहास
करियर की शुरुआत में रिचर्ड हैडली सिर्फ तेज गेंद फेंकने पर भरोसा करते थे, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी गेंदबाजी को पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने गति के साथ स्विंग, सीम और सटीक लाइन-लेंथ को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. उनका रन अप छोटा हुआ, एक्शन और प्रभावी बना और फिर दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाज भी उनकी गेंदों के सामने संघर्ष करते नजर आए. यही वजह थी कि उन्हें क्रिकेट इतिहास के महान तेज गेंदबाजों में गिना जाता है. हैडली ने सिर्फ 79 टेस्ट मैचों में 400 विकेट पूरे कर इतिहास रच दिया. उस समय यह उपलब्धि किसी चमत्कार से कम नहीं मानी गई थी.
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1980 के दशक में दुनिया के चार महान ऑलराउंडरों कपिल देव, इयान बॉथम, इमरान खान और रिचर्ड हैडली की चर्चा होती थी. इन चारों ने अपने-अपने देशों के लिए मैच जिताए, लेकिन हैडली का प्रभाव इसलिए अलग था क्योंकि उन्होंने अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाने वाली कीवी टीम को विश्व क्रिकेट में सम्मान दिलाया. 1990 में इंग्लैंड के खिलाफ ट्रेंट ब्रिज टेस्ट मैच के बाद हैडली ने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहा. खास बात यह रही कि उन्होंने अपने करियर की आखिरी गेंद पर भी विकेट लिया. तब दूसरी पारी में उन्होंने 5/53 का शानदार प्रदर्शन किया और विजयी अंदाज में संन्यास लिया.
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रिचर्ड हैडली ने 86 टेस्ट मैचों में 22.29 के एवरेज से 431 विकेट झटके, जिसमें 36 पांच विकेट हॉल रहे. हेडली ने टेस्ट मैचों में 27.16 की औसत से 3124 रन भी बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से 2 शतक और 15 अर्धशतक निकले. हैडली ने न्यूजीलैंड के लिए 115 ओडीआई मुकाबले भी खेले, जिसमें उनके नाम पर 21.56 की औसत से 158 विकेट दर्ज हैं. हैडली ने ओडीआई मैचों में 21.61 के एवरेज और 4 अर्धशतकों की मदद से 1751 रन बनाए.
क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद भी रिचर्ड हैडली इस खेल से जुड़े रहे हैं. उन्होंने कमेंटेटर, विश्लेषक और न्यूजीलैंड क्रिकेट के मुख्य चयनकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. क्रिकेट में हैडली के असाधारण योगदान के लिए उन्हें नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया गया.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क