बेंगलुरु में दलीप ट्रॉफी 2026-27 की शुरुआत रविवार (23 अगस्त) से हो रही है. जो भारत के घरेलू क्रिकेट सीजन की शुरुआत है. दलीप ट्रॉफी में फोकस में सबसे ज्यादा इस बार वैभव सूर्यवंशी रहेंगे, जो इस बार ईस्ट जोन के कप्तान बनाए गए हैं. वैभव का मैच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के बेंगलुरु में मौजूद CoE (Centre of Excellence) के ग्राउंड 2 में होना है.
वैभव की टीम का मुकाबला नॉर्थ ईस्ट जोन से रविवार सुबह 9:30 पर होगा. वैभव की टीम की कमान ईशान किशन के हाथों में है. वहीं वैभव के अलावा भी कई खिलाड़ी इस रेड बॉल टूर्नामेंट में अपना जौहर दिखाते हुए नजर आएंगे.
दलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट में इस बार कई खिलाड़ियों का सीधा कनेक्शन टीम इंडिया के भविष्य से जुड़ा हुआ है. 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के रेड-बॉल क्रिकेट की असली परीक्षा होगी, 35 साल के मोहम्मद शमी फिर से टीम इंडिया का दरवाजा खटखटाएंगे और जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी पहली बार नॉर्थ जोन में इतनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराएंगे.
दलीप ट्रॉफी पिछले कुछ सालों में कई बदलावों से गुजर चुकी है. 2024-25 में इसे 4 टीमों के फॉर्मेट में खेला गया था, लेकिन उस ढांचे में पहले जैसा कॉम्पिटिटिव माहौल और संदर्भ नहीं बन पाया. ऐसे में टूर्नामेंट लगातार दूसरे सीजन में अपने पारंपरिक इंटर-जोनल फॉर्मेट में खेला जाएगा.
यह घरेलू सीजन वैसे भी काफी अहम है. आने वाले महीनों में भारत का अगला वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल तक पहुंचने का रास्ता और साफ होगा. जनवरी-फरवरी में घरेलू मैदानों पर होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. ऐसे में दलीप ट्रॉफी के बाद ईरानी कप और रणजी ट्रॉफी में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों पर सेलेक्टर्स की नजर रहेगी.
वैभव सूर्यवंशी का असली रेड-बॉल टेस्ट
आईपीएल में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद इंग्लैंड दौरे पर टी20 इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले वैभव सूर्यवंशी अब बिल्कुल अलग चुनौती के सामने होंगे. ईस्ट जोन के लिए खेलते हुए 15 वर्षीय वैभव को यह साबित करना होगा कि वह सिर्फ सफेद गेंद के खिलाड़ी नहीं हैं.
रेड-बॉल क्रिकेट में उनके आंकड़े अभी बहुत प्रभावशाली नहीं हैं. रणजी ट्रॉफी प्लेट लीग के तीन अलग-अलग चरणों में उन्होंने 12 पारियों में 17.25 के एवरेज से रन बनाए हैं. अब दलीप ट्रॉफी वैभव के पास उन आंकड़ों को पीछे छोड़ने का मौका है.
जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज से लौटने के बाद वैभव ने राजस्थान रॉयल्स के तालेगांव स्थित हाई-परफॉर्मेंस सेंटर में दो हफ्ते का रेड-बॉल बूटकैंप किया. उनकी ट्रेनिंग पूर्व भारतीय बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौड़ की देखरेख में हुई.
वैभव के पूर्व कोच मनीष ओझा ने भी उनकी तैयारी में मदद की. विदर्भ की गर्मी और सूखी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग स्तर का टर्न देने वाली पिचें तैयार की गईं, ताकि वह स्पिन के खिलाफ अपने खेल को मजबूत कर सकें. रेड-सॉइल विकेट पर बाउंस के खिलाफ बैकफुट गेम की भी सिमुलेशन के जरिए तैयारी कराई गई.
जिम्बाब्वे में वैभव ने तीन पारियों में दो अर्धशतक लगाए थे और 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बने थे. अब सवाल यह है कि क्या वही प्रतिभा रेड-बॉल क्रिकेट में भी उतनी ही तेजी से असर दिखा पाएगी?
J&K के खिलाड़ी अब नॉर्थ जोन की ताकत
दलीप ट्रॉफी में इस बार जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों की मौजूदगी खास होगी. ऐतिहासिक रूप से नॉर्थ जोन की टीम में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के खिलाड़ियों का दबदबा रहा है. जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों के लिए जगह बनाना आसान नहीं रहा.
लेकिन मार्च में जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता और तस्वीर बदल गई. आकिब नबी की शानदार भूमिका वाली उस ऐतिहासिक जीत के बाद इस बार नॉर्थ जोन की टीम में जम्मू-कश्मीर के 6 खिलाड़ी शामिल हैं. इनमें टीम के कप्तान कन्हैया वाधवान भी शामिल हैं.
ओपनर कामरान इकबाल की कहानी भी काफी दिलचस्प है. वह रणजी ट्रॉफी फाइनल की सुबह तक जम्मू-कश्मीर की टीम का हिस्सा नहीं थे. शुभम खजूरिया के चोटिल होने के बाद उन्हें अंतिम समय पर बुलाया गया.
कर्नाटक के खिलाफ फाइनल में कामरान ने दूसरी पारी में नाबाद 160 रन बनाकर विपक्ष की वापसी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. एक समय भारत की अंडर-19 टीम में यशस्वी जायसवाल के ओपनिंग पार्टनर रह चुके कामरान अब दलीप ट्रॉफी में दिल्ली के सनत सांगवान के साथ नॉर्थ जोन की पारी की शुरुआत कर सकते हैं.
नॉर्थ जोन के तेज गेंदबाजी आक्रमण में भी जम्मू-कश्मीर का असर साफ दिखता है. सेलेक्टस फिलहाल भारत और श्रीलंका के बीच चल रही टेस्ट सीरीज खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद नबी की उपलब्धता पर फैसला होगा.
फिलहाल टीम के पास जम्मू-कश्मीर के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सुनील कुमार और लंबे कद के पेसर युद्धवीर सिंह मौजूद हैं. सुनील ने पिछले रणजी सीजन में 9 मैचों में 31 विकेट लिए थे. बंगाल के खिलाफ सेमीफाइनल में उनके चार विकेट भी जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक सफलता में अहम रहे थे.
35 साल के शमी ने अभी हार नहीं मानी
मोहम्मद शमी 35 साल के हो चुके हैं. हाल के वर्षों में उन्हें घुटने और टखने की अलग-अलग चोटों से जूझना पड़ा है. उन्होंने भारत के लिए आखिरी टेस्ट 2023 में खेला था और इसके बाद वह लंबे समय तक टेस्ट टीम की चयन चर्चा से बाहर रहे.
2025-26 रणजी सीजन में उन्होंने 7 मैचों में 37 विकेट लेकर दिखाया कि उनके अंदर अभी भी लंबी रेस की क्रिकेट बाकी है. पिछले एक साल में वह कई बार यह बात कह चुके हैं कि टीम इंडिया से बाहर होने की निराशा को उन्होंने अपनी तैयारी की ताकत बनाया है.
दलीप ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन उन्हें फिर से सेलेक्टर्स की चर्चा में ला सकता है. खासतौर पर ऐसे समय में जब चोटों के कारण भारत के कई तेज गेंदबाज उपलब्ध नहीं हैं.
अर्शदीप और नबी के पास भी बड़ा मौका
अर्शदीप सिंह के लिए भी दलीप ट्रॉफी रेड-बॉल क्रिकेट में अपनी दावेदारी मजबूत करने का मंच होगी. वह पिछले सीजन नॉर्थ जोन के अहम सदस्य थे, लेकिन टीम इंडिया के लिए उनका ज्यादातर इस्तेमाल सफेद गेंद के क्रिकेट में ही हुआ है.
स्विंग और सीम मूवमेंट का फायदा उठाने की उनकी क्षमता उन्हें टेस्ट क्रिकेट के लिए एक उपयोगी विकल्प बना सकती है. अक्टूबर-नवंबर में भारत को न्यूजीलैंड का दौरा करना है और दलीप ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन अर्शदीप को सेलेक्टर्स की नजर में बनाए रख सकता है.
आकिब नबी की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है. उन्होंने पिछले दो रणजी सीजन में कुल 104 विकेट लिए हैं. अगर नॉर्थ जोन सेमीफाइनल या उससे आगे पहुंचता है तो श्रीलंका दौरा खत्म होने के बाद नबी टीम से जुड़ सकते हैं.ऐसी स्थिति में उन्हें न्यूजीलैंड दौरे के लिए अपनी टेस्ट दावेदारी और मजबूत करने का एक और मौका मिलेगा.
भारत की अगली बल्लेबाजी लाइन क्या यहीं से निकलेगी?
दलीप ट्रॉफी सिर्फ मौजूदा दावेदारों की कहानी नहीं है. यहां भारत की भविष्य की बल्लेबाजी लाइन पर भी नजर रहेगी. कर्नाटक के आर स्मरण ने 2025-26 रणजी ट्रॉफी में 950 रन बनाकर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज के रूप में सीजन खत्म किया था. सिर्फ 23 साल की उम्र में उनकी कंटीन्यूटी और मैच्योरिटी ने उन्हें भारत-ए टीम की दहलीज तक पहुंचा दिया है.
कई लोग उन्हें भविष्य में कर्नाटक का कप्तान बनने का दावेदार भी मानते हैं. दलीप ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन यह तय करने में अहम हो सकता है कि वह इंडिया-ए और उससे आगे की रेस में कितनी तेजी से बढ़ते हैं.
पृथ्वी शॉ के लिए एक और वापसी का मौका
पृथ्वी शॉ लंबे समय से टीम इंडिया की रेस से बाहर हैं. उन्होंने आखिरी बार 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया टेस्ट दौरे के आसपास भारतीय टीम के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला था. इसके बाद फिटनेस और अनुशासन से जुड़े मुद्दों ने उनके करियर की रफ्तार पर असर डाला. महाराष्ट्र के लिए पिछले सीजन उन्होंने वापसी के संकेत दिए. चंडीगढ़ के खिलाफ पृथ्वी ने 156 गेंदों पर 222 रन की विस्फोटक पारी खेली थी. यह रणजी ट्रॉफी इतिहास का तीसरा सबसे तेज दोहरा शतक था. उनकी बल्लेबाजी की रफ्तार और आक्रामकता में अब भी कमी नहीं दिखी. लीप ट्रॉफी उनके लिए उस लय को आगे बढ़ाने और चयनकर्ताओं को यह याद दिलाने का मौका होगी कि वह अभी भी बड़े मंच पर वापसी कर सकते हैं.
सरफराज की टेस्ट टीम में वापसी, अब नियमित जगह की जंग
सरफराज खान की वापसी भी इस टूर्नामेंट की बड़ी कहानी है. वह दो साल बाद फिर से भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने में सफल हुए हैं. श्रीलंका दौरे के बाद सरफराज वेस्ट जोन की ओर से दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल चरण में टीम से जुड़ेंगे. ऐसे में उनके पास भारत की टेस्ट बल्लेबाजी में नियमित जगह के लिए अपना दावा और मजबूत करने का मौका होगा.
अगले साल की शुरुआत में भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 टेस्ट मैच खेलने हैं. ऐसे में सरफराज के प्रदर्शन पर खास नजर होगी. स्पिन के खिलाफ उनका खेल पहले से ही उनकी बड़ी ताकत माना जाता है और चयनकर्ता यह देखना चाहेंगे कि वह अलग परिस्थितियों में कितनी मजबूती से खुद को साबित करते हैं.
कुल मिलाकर, बेंगलुरु में शुरू हो रही दलीप ट्रॉफी सिर्फ घरेलू सीजन का पहला टूर्नामेंट नहीं है. यहां किसी के लिए रेड-बॉल क्रिकेट में खुद को साबित करने की चुनौती है, किसी के लिए टीम इंडिया में वापसी की उम्मीद और किसी के लिए पहली बार राष्ट्रीय चयन की दहलीज तक पहुंचने का मौका.
15 साल के वैभव सूर्यवंशी से लेकर 35 साल के मोहम्मद शमी तक, जम्मू-कश्मीर के 6 प्रतिनिधियों से लेकर आर स्मरण, पृथ्वी शॉ और सरफराज खान तक... दलीप ट्रॉफी में इस बार कई ऐसे नाम हैं, जिनका प्रदर्शन आने वाले महीनों में भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदल सकता है.
दलीप ट्रॉफी का शेड्यूल
क्वार्टर फाइनल: ईस्ट जोन बनाम नॉर्थ ईस्ट जोन, 23 अगस्त से, बेंगलुरु
क्वार्टर फाइनल: नॉर्थ जोन बनाम वेस्ट जोन, 23 अगस्त से, बेंगलुरु
पहला सेमीफाइनल: सेंट्रल जोन बनाम TBA, 30 अगस्त से, बेंगलुरु
दूसरा सेमीफाइनल: साउथ जोन बनाम TBA, 30 अगस्त से, बेंगलुरु
फाइनल: 6 सितंबर से, चेन्नई
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क