करीब चार साल बाद टीम इंडिया में भुवनेश्वर कुमार की वापसी हुई है. यह सिर्फ एक तेज गेंदबाज की वापसी नहीं है, बल्कि भारतीय क्रिकेट के पेस अटैक को लेकर कुछ पुराने सवालों की भी वापसी है.
करीब 36 साल के भुवनेश्वर कुमार एक बार फिर भारतीय पेस अटैक की दूसरे छोर से अगुवाई करते नजर आएंगे. 21 टेस्ट, 87 टी20 इंटरनेशनल और 121 वनडे खेल चुके भुवनेश्वर को न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए टीम में शामिल किया गया है.
दिलचस्प बात यह है कि भुवनेश्वर ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला भी 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था. यानी जिस टीम के खिलाफ करीब चार साल पहले उनका अंतरराष्ट्रीय सफर रुका था, उसी के खिलाफ अब उनकी वापसी हो रही है.
भुवनेश्वर हमेशा से लाइमलाइट से थोड़ा दूर रहने वाले क्रिकेटर रहे हैं. लेकिन पिछले दो आईपीएल सीजन उनके लिए शानदार रहे हैं. करीब 8 की इकॉनमी से 45 विकेट उनके प्रदर्शन की कहानी खुद बयां करते हैं. भुवनेश्वर की खासियत सिर्फ विकेट लेने की नहीं है. वह यॉर्कर डाल सकते हैं, नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते हैं और गेंद को सही जगह पर लगातार रख सकते हैं. नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की कला हर तेज गेंदबाज के पास नहीं होती.
शायद यही वजह है कि चार साल बाद भी जब टीम को एक अनुभवी तेज गेंदबाज की जरूरत महसूस हुई तो नजर फिर भुवनेश्वर कुमार पर जाकर ठहर गई. और यहीं से एक दिलचस्प सवाल पैदा होता है-भुवनेश्वर की वापसी मजबूरी है या जरूरत?
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भुवनेश्वर की वापसी ने नेहरा की याद दिला दी
भुवनेश्वर की वापसी ने मुझे आशीष नेहरा की याद दिला दी. 2011 की विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रहे नेहरा इसके बाद करीब पांच साल तक टीम से बाहर रहे. फिर 2016 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनकी टीम इंडिया में वापसी हुई. एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने टी20 इंटरनेशनल मैच खेला.
दिलचस्प बात यह है कि 2011 के बाद जब नेहरा की वापसी हुई, तब उनकी उम्र भी करीब 36 साल थी-लगभग उतनी ही जितनी आज भुवनेश्वर कुमार की है. नेहरा ने 2017 में 38 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा. यानी उम्र के इस पड़ाव पर वापसी भारतीय क्रिकेट में पहली बार नहीं हो रही है. लेकिन भुवनेश्वर की कहानी में एक फर्क जरूर है-आज उनकी वापसी सिर्फ उनके पर्सनल फॉर्म की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय तेज गेंदबाजी की मौजूदा स्थिति का आईना भी है.
सवाल भुवनेश्वर की वापसी पर नहीं है
भुवनेश्वर की वापसी क्रिकेट फैंस के लिए निश्चित तौर पर खुशी की बात है. लेकिन इसके साथ कुछ सवाल भी खड़े होते हैं. सवाल भुवनेश्वर कुमार पर नहीं है बल्कि सवाल भारतीय क्रिकेट मैनेजमेंट और बीसीसीआई पर है. जसप्रीत बुमराह को छोड़ दें तो आज हमारे पास ऐसा कौन सा तेज गेंदबाज है, जिसे आप तीनों फॉर्मेट में पूरे भरोसे के साथ खिला सकते हैं?
मोहम्मद शमी जरूर लंबे समय तक इस कसौटी पर खरे उतरते रहे हैं. घरेलू क्रिकेट में भी उन्होंने अपने प्रदर्शन से खुद को साबित किया है. लेकिन इसके बावजूद उन्हें लगातार मौके नहीं मिल पा रहे.मोहम्मद सिराज उम्मीद जरूर जगाते हैं. वनडे में वह 51 मैच खेल चुके हैं और कई मौकों पर उन्होंने अपनी उपयोगिता भी साबित की है. लेकिन वनडे और टी20 क्रिकेट में भी उन्हें वह निरंतरता और स्पष्ट भूमिका नहीं मिल पाई है, जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है.
इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में तेज गेंदबाजों की एक लंबी फेहरिस्त सामने आई. अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, हर्षित राणा, मयंक यादव से लेकर गुरनूर बरार तक... इनमें से कई गेंदबाजों ने शुरुआत में उम्मीद जगाई. किसी ने अपनी गति से प्रभावित किया, किसी ने स्विंग से और किसी ने अपनी लाइन-लेंथ से. लेकिन इनमें से अभी तक कोई ऐसा गेंदबाज नहीं बन पाया, जिसके बारे में आप पूरे भरोसे के साथ कह सकें कि यह तीनों फॉर्मेट में लंबे समय तक भारतीय तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी उठा सकता है. और शायद यही सबसे बड़ी चिंता है.
बुमराह के बाद कौन?
भुवनेश्वर कुमार की वापसी कहीं न कहीं इस बात की भी तस्दीक करती है कि भारतीय क्रिकेट के पास आज भी पेस अटैक में गहराई की कमी है. भारतीय तेज गेंदबाजी लंबे समय से हमारी कमजोरी रही है. जवागल श्रीनाथ, आशीष नेहरा, जहीर खान और इरफान पठान जैसे कुछ नाम जरूर रहे, जिन्होंने अलग-अलग दौर में भारतीय तेज गेंदबाजी की अगुवाई की. लेकिन इनके साथ अक्सर समस्या यह रही कि दूसरे छोर पर ऐसा गेंदबाज लगातार मौजूद नहीं रहा, जिस पर लंबे समय तक हर फॉर्मेट में भरोसा किया जा सके.
अजीत अगरकर, ईशांत शर्मा, आरपी सिंह और प्रवीण कुमार जैसे गेंदबाजों ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई, लेकिन चोट और दूसरी वजहों ने उनके करियर की निरंतरता को प्रभावित किया. यानी किसी न किसी दौर में एक तेज गेंदबाज की कमी हमेशा महसूस होती रही और आज भी कहानी बहुत अलग नहीं है.
बल्लेबाज तो मिलते हैं लेकिन गेंदबाज क्यों नहीं?
यहां एक सवाल और बड़ा हो जाता है. हमारे पास बुमराह जैसा दूसरा गेंदबाज क्यों नहीं आ पाया? आखिर हम दुनिया के सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड हैं. हमारे पास घरेलू क्रिकेट का इतना बड़ा ढांचा है, आईपीएल जैसा मंच है, तमाम सुविधाएं हैं और तेज गेंदबाजों की पहचान व उन्हें तैयार करने के लिए पहले से कहीं ज्यादा संसाधन भी हैं.फिर भी बल्लेबाजी और गेंदबाजी के बीच यह अंतर क्यों है?
बल्लेबाजी में भारत ने हमेशा अपनी अगली पीढ़ी तैयार की है. सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और सौरव गांगुली के जाने के बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे बल्लेबाज आए. अब रोहित और विराट का दौर भी पीछे छूट रहा है तो नई पीढ़ी जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार दिखाई देती है.
लेकिन तेज गेंदबाजी में ऐसा क्यों नहीं हुआ? भुवनेश्वर कुमार की वापसी इसी सवाल को और गहरा करती है. क्योंकि अगर चार साल बाद, 36 साल की उम्र में भी आपको एक ऐसे गेंदबाज की जरूरत पड़ रही है, जो कभी टीम की पहली पसंद हुआ करता था, तो इसका मतलब है कि हमने उसके बाद पर्याप्त विकल्प तैयार नहीं किए.
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चयनकर्ताओं की नहीं, पूरे सिस्टम का परीक्षा
अब सवाल यह नहीं होना चाहिए कि भुवनेश्वर को वापस क्यों बुलाया गया. सवाल यह होना चाहिए कि उनके बाद कौन? और उससे भी बड़ा सवाल-बुमराह के बाद कौन? बुमराह जैसा गेंदबाज मिलना आसान नहीं है. हर पीढ़ी में ऐसा खिलाड़ी नहीं आता. इसलिए किसी से यह उम्मीद करना भी गलत होगा कि वह बिल्कुल बुमराह की जगह ले लेगा.
लेकिन कम से कम ऐसा गेंदबाज तो तैयार किया जा सकता है जो उनकी गैर-मौजूदगी में टीम को उसी स्तर की टक्कर दे सके. अगर बुमराह चोटिल होते हैं, या भविष्य में संन्यास लेते हैं, तो क्या हमारे पास कोई ऐसा तेज गेंदबाज है जिसके बारे में हम पूरे भरोसे के साथ कह सकें कि वह तीनों फॉर्मेट में उनकी कमी को काफी हद तक पूरा कर सकता है?
ईमानदारी से कहूं तो मुझे अभी ऐसा कोई नाम साफ तौर पर नजर नहीं आता. और यही भारतीय क्रिकेट के लिए चिंता की बात है. आज टीम इंडिया का प्रदर्शन शानदार है. इसलिए हमारी कई कमियां छिप जाती हैं. जीत के बीच कमजोरियां अक्सर कमजोरियां लगती ही नहीं हैं. लेकिन क्रिकेट में बुरा दौर कब आ जाए, कोई नहीं जानता. कहते हैं ना-जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो तो आपकी कमियां भी आपकी अच्छाई का हिस्सा लगने लगती हैं. आज भारतीय क्रिकेट के साथ शायद यही हो रहा है.
भुवनेश्वर कुमार की वापसी इसलिए सिर्फ एक कमबैक नहीं है. यह भारतीय क्रिकेट के लिए एक आईना भी है और उस आईने में सबसे बड़ा सवाल शायद यही दिखाई देता है-बुमराह के बाद कौन?
किशोर जोशी