इस टी20 लीग पर अचानक लगा ब्रेक... दो साल में हुआ करोड़ों का नुकसान, विवादों ने भी बढ़ाई मुश्किल

बीसीबी बांग्लादेश प्रीमियर लीग को भविष्य में वापस ट्रैक पर लाना चाहता है. फिलहाल बोर्ड का फोकस फ्रेंचाइजी मॉडल, आर्थिक व्यवस्था और टूर्नामेंट के संचालन में मौजूद खामियों को दूर करने पर है, ताकि वापसी के बाद बीपीएल को ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनाया जा सके.

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बांग्लादेश प्रीमियर लीग पर लगा ताला, तमीम इकबाल का बड़ा ऐलान. (Photo: Chittagong Kings) बांग्लादेश प्रीमियर लीग पर लगा ताला, तमीम इकबाल का बड़ा ऐलान. (Photo: Chittagong Kings)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • ढाका,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने अपने सबसे बड़े घरेलू टी20 टूर्नामेंट BPL (बांग्लादेश प्रीमियर लीग) को लेकर बड़ा फैसला किया है. इस साल बीपीएल का आयोजन नहीं किया जाएगा. बीसीबी अध्यक्ष तमीम इकबाल ने गुरुवार (20 अगस्त) को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि लगातार आर्थिक नुकसान, फ्रेंचाइजीज की ओर से नियमों का पालन नहीं करने और प्रशासनिक समस्याओं के कारण बोर्ड ने टूर्नामेंट को फिलहाल रोकने का फैसला किया है.

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2012 में शुरू हुई बीपीएल बांग्लादेश की प्रमुख फ्रेंचाइजी क्रिकेट लीग है. हालांकि पिछले कुछ सीजन से टूर्नामेंट आर्थिक और प्रशासनिक विवादों में घिरा रहा है. अब बीसीबी इसे पुराने तरीके से जारी रखने के बजाय इसके पूरे मॉडल में सुधार करना चाहता है. तमीम इकबाल ने बताया कि पिछले दो वर्षों में बीपीएल से बोर्ड को करीब 3.3 मिलियन डॉलर (लगभग 31.58 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है. बांग्लादेशी अखबार 'प्रोथोम आलो' के मुताबिक यह रकम करीब 400 मिलियन बांग्लादेशी टका है.

BCB प्रेसिडेंट ने क्या कहा?
तमीम इकबाल ने कहा, 'बीपीएल एक शानदार प्रोडक्ट है और इसमें काफी दिलचस्पी है. अगर हम इसे सही तरीके से आयोजित करें तो यह और बढ़ेगी. फ्रेंचाइजी क्रिकेट से बीसीबी को मुनाफा होना चाहिए, नुकसान नहीं. जब तक हम इसे ठीक नहीं कर लेते, घाटे में टूर्नामेंट आयोजित करना जरूरी नहीं है.'

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बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को कई फ्रेंचाइजीज से बकाया भुगतान हासिल करने में परेशानी हुई है. इसके अलावा बैंक गारंटी और लीग के नियमों का पालन नहीं किए जाने जैसे मुद्दे भी सामने आए. इन्हीं समस्याओं ने बीसीबी को टूर्नामेंट के मौजूदा ढांचे पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया.

मैच फिक्सिंग विवाद का भी असर
लीग की परेशानियां सिर्फ वित्तीय नहीं हैं. मई में बीसीबी की एंटी-करप्शन जांच के बाद सट्टेबाजी से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले में एक खिलाड़ी और कई टीम अधिकारियों को निलंबित किया गया था. इससे टूर्नामेंट की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े हुए. पिछले सीजन में खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच विवाद का असर सीधे मुकाबलों पर पड़ा था. बीसीबी अधिकारी नजमुल इस्लाम की खिलाड़ियों और उनकी आर्थिक अहमियत को लेकर की गई टिप्पणियों के विरोध में घरेलू क्रिकेटरों ने मैचों का बॉयकॉट किया. इसके कारण कई मुकाबलों को दोबारा शेड्यूल करना पड़ा था.

इस साल लीग नहीं होने का सबसे ज्यादा असर घरेलू क्रिकेटरों पर पड़ सकता है. तमीम इकबाल ने उनकी निराशा को जायज माना, लेकिन साथ ही सुधार को प्राथमिकता देने की बात कही. उन्होंने कहा, 'अगर मैं खिलाड़ी होता तो मैं भी निराश होता. लेकिन यह टूर्नामेंट ऐसे आयोजित होना चाहिए, जिस पर बीसीबी गर्व कर सके. पिछले कुछ वर्षों में जो हुआ, क्या हमें उस पर गर्व है? शायद नहीं.'

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