IND vs NZ: 'अगर बेंच पर ही बिठाना है तो घर भेज दो...', वैभव सूर्यवंशी को बाहर करने पर फूटा दिग्गज का गुस्सा

वैभव सूर्यवंशी ने तीसरे टी20 मैच में बतौर ओपनर टीम के लिए ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की थी. लेकिन चौथे मैच में उन्हें एक बार फिर प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया. वैभव के साथ हो रहे इस बर्ताव पर क्रिकेट के दिग्गज लगातार सवाल उठा रहे हैं.

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वैभव के साथ ऐसा क्यों हो रहा है? (PHOTO: PTI) वैभव के साथ ऐसा क्यों हो रहा है? (PHOTO: PTI)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 31 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:41 PM IST

न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में टीम इंडिया की हार से ज्यादा चर्चा वैभव सूर्यवंशी के प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठने की हो रही है. इस मैच से पहले भारतीय टीम शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुकी थी. 

सीरीज जीतने का बाद यह मुकाबला एक तरह से 'डेड रबर' था. इसके बावजूद युवा वैभव को बेंच पर बैठाए जाने पर पूर्व भारतीय ओपनर आकाश चोपड़ा भड़क उठे हैं. उन्होंने टीम मैनेजमेंट की चयन नीति पर तीखा तंज कसते हुए बड़ा सवाल उठाया है.

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ईशान किशन की चोट के बाद टीम में बतौर रिप्लेसमेंट आए युवा वैभव सूर्यवंशी ने दूसरे और तीसरे टी20 में 4 और 45 रनों की पारियां खेलकर अपनी काबिलियत की झलक दिखाई थी. हालांकि, जैसे ही ईशान किशन फिट होकर वापस लौटे, चौथे मैच में वैभव को प्लेइंग इलेवन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए आकाश चोपड़ा ने कहा कि अगर आप बहुत ज्यादा फिलॉसॉफिकल होकर सोचें तो नियम यही कहता है कि वैभव किसी के चोटिल होने पर आए थे, इसलिए ईशान के फिट होने पर उन्हें ही बाहर बैठना होगा. लेकिन जरा सोचिए, यह एक डेड रबर मुकाबला था.

टीम मैनेजमेंट की सोच पर उठे सवाल

आकाश चोपड़ा ने टीम मैनेजमेंट को आड़े हाथों लेते हुए सीधा और तीखा सवाल दागा कि क्या इस युवा खिलाड़ी को सिर्फ तभी मौका मिलेगा जब टीम का कोई खिलाड़ी चोटिल होगा? उन्होंने कहा कि अगर यही नीति है तो फिर इस युवा खिलाड़ी को बेंच पर बैठाए रखने का कोई तुक नहीं बनता.

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चोपड़ा ने दो टूक शब्दों में कहा कि क्या आप वैभव सूर्यवंशी को सिर्फ तब खिलाएंगे जब कोई इंजर्ड हो जाएगा? या जब कोई उपलब्ध नहीं होगा? अगर ऐसा ही है तो फिर आप उन्हें घर वापस भेज दीजिए. उन्हें कहिए कि जाकर फर्स्ट-क्लास क्रिकेट खेलें. 

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि ड्रेसिंग रूम में बड़े खिलाड़ियों के साथ रहने से भी काफी कुछ सीखने को मिलता है, लेकिन अगर लंबे समय तक उन्हें मैदान पर खेलने का मौका ही नहीं मिलेगा तो बेंच पर बैठने का क्या फायदा?

कड़ी आलोचना करते हुए चोपड़ा ने अंत में कहा कि टीम मैनेजमेंट को यह साफ-साफ बताना चाहिए कि भविष्य के लिए वैभव को लेकर उनका रोडमैप और प्लान क्या है, क्योंकि इस तरह से युवा खिलाड़ी को नजरअंदाज करना बेहद निराशाजनक है.
 

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