83: 'कप्तान हम करो या मरो की हालत में हैं... पर मरना नहीं है', जब किरमानी ने कपिल से ऐसा कहा

सैयद किरमानी का शुमार भारत के महानतम विकेटकीपर में होता है. किरमानी ऐसे भारतीय विकेटकीपर रहे, जिनकी चपलता एवं चतुराई का जवाब नहीं था. वह बेहद मुश्किल कैचों को भी आसानी से पकड़ लेते थे. भारत ने जब 1983 वर्ल्ड कप जीता तो उस जीत में सैयद किरमानी का भी अहम रोल रहा था. 

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Kapil-Kirmani (Getty) Kapil-Kirmani (Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 10:42 AM IST
  • किरमानी ने वर्ल्ड कप में की शानदार विकेटकीपिंग
  • आठ मुकाबलों में किरमानी ने किए 14 शिकार

83 Movie: कपिल देव की कप्तानी में 1983 वर्ल्ड कप की जीत ने भारत में क्रिकेट के खेल को एक नई राह प्रदान की थी. उस वर्ल्ड कप जीत के लम्हे को दोबारा याद दिलाने के लिए शुक्रवार को '83' मूवी रिलीज हो रही है. कबीर खान‌ के निर्देशन में बनी इस मूवी में सैयद किरमानी की भूमिका साहिल खट्टर निभा रहे हैं.

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सैयद किरमानी का शुमार भारत के महानतम विकेटकीपर में होता है. किरमानी ऐसे भारतीय विकेटकीपर रहे, जिनकी चपलता एवं चतुराई का जवाब नहीं था. वह बेहद मुश्किल कैचों को भी आसानी से पकड़ लेते थे. भारत ने जब 1983 वर्ल्ड कप जीता तो उस जीत में सैयद किरमानी का भी अहम रोल रहा था.

सैयद किरमानी ने जब क्रिकेट खेलना शुरू किया, तब उनके पास कीपिंग ग्लव्स नहीं थे. ऐसे में किरमानी ने विकेट के पीछे तेजी से आने वाली गेंदों को रोकने के लिए नई तरकीब खोज निकाली निकाली और दो ईंट उठाकर उन्हें अपने ग्लव्स बना लिए. विकेट के पीछे आती हुई गेंदों को वह इतनी सफाई से पकड़ते थे मानो कि वो क्रिकेट ग्लव्स पहने हों.

1983 क्रिकेट वर्ल्ड कप में किरमानी दूसरे सबसे ज्यादा शिकार करने वाले विकेटकीपर रहे. किरमानी ने 8 मैचों में कुल 14 शिकार किए थे, जिसमें 12 कैच और दो स्टंपिंग शामिल रहे. वेस्टइंडीज के जैफ डुजोन ने सबसे ज्यादा 16 शिकार किए थे. किरमानी ने 1983 वर्ल्ड कप में बल्ले से भी एक छोटी लेकिन यादगार पारी खेली थी.

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जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने 56 गेंदों पर नाबाद 24 रन बनाए थे. उसी मुकाबले में कपिल देव ने नाबाद 175 रनों की अविश्वसनीय पारी खेली थी. इस दौरान किरमानी और कपिल देव ने नौंवे विकेट के लिए रिकॉर्ड 126 रनों की नाबाद साझेदारी की, जिसके चलते भारत आठ विकेट पर 266 रनों के स्कोर तक पहुंच सका. बाद में भारत टीम उस महत्वपूर्ण मुकाबले को 31 रनों से जीतने में सफल रही थी.

जब कपिल का साथ देने मैदान पर उतरे किरमानी

उस पारी को याद करते हुए किरमानी कहते हैं, 'जब मैं कपिल का साथ देने मैदान पर गया, तो मैंने कपिल से कहा कि कप्तान, हम करो या मरो की हालत में हैं. हमें मरना नहीं है, हमको मार के मरना है. मैं एक गेंद खेलूंगा आप पांच बॉल खेलेंगे. मैं सिंगल लेकर स्ट्राइक दूंगा. आप हमारी टीम के बेस्ट हिटर हैं और पांचों गेंदों को आप ही ‌हिट करेंगे.'

किरमानी ने कहा, 'वहां से जिस तरह कपिल देव ने खेला वह अद्भुत था. उस परिस्थिति में आज तक किसी के बल्ले से ऐसी पारी नहीं देखी. गेंदबाजों को समझ ही नहीं आ रहा था कि गेंद कहां डाली जाए. कपिल देव को सलाम.'

सैयद किरमानी को 1983 वर्ल्ड कप का बेस्ट विकेटकीपर भी चुना गया था. इनाम के तौर पर उन्हें चांदी की गेंद से सुसज्जित गल्व्स मिला जिसके नीचे लिखा था- दुनिया का बेस्ट विकेटकीपर. जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले राउंड-रॉबिन मैच में किरमानी ने विकेट के पीछे पांच शिकार किए थे. ये उस समय किसी एक मुकाबले में किसी विकेटकीपर की ओर से सबसे अधिक कैच का वर्ल्ड रिकॉर्ड था.

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'... हमलोगों के पास खोने के लिए कुछ नहीं'

किरमानी कहते हैं, 'हमें प्रतियोगिता में चौथी सबसे कमजोर टीम माना जाता था और मेरा भी मानना कि यदि हम नॉकआउट में फहुंचते हैं तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. हमारा पहला मैच शक्तिशाली वेस्टइंडीज के खिलाफ था, जिसने दो दशकों तक खेल पर राज किया. चाहे उन्होंने पहले बल्लेबाजी की या दूसरी, वे विजयी हुए. कपिल देव ने कहा था कि हमलोगों के पास खोने के लिए कुछ नहीं है. हमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा.

किरमानी ने आगे कहा, 'हमने अपना पहला मुकाबला वेस्टइंडीज के खिलाफ 34 रनों से जीता. जीत के बाद जब हम ड्रेसिंग रूम में बैठे थे, हममें से एक जोर से चिल्लाया कि हमने विश्व चैम्पिनयन को हराया है. फिर हम सब उसी को दोहराने के लिए शामिल हुए. वेस्टइंडीज को हराने से हमारा आत्मविश्वास बढ़ा था. इसने हमें अपनी क्षमताओं पर विश्वास दिलाया. उस खेल के बाद हमने अपने आप से कहा, 'अब, हमें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं है. यह सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था. यह हमारे लिए मनोबल बढ़ाने वाला था.'

जनवरी 1976 में किरमानी ने अपना पहला टेस्ट मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड में खेला था. किरमानी एक चतुर विकेटकीपर माने जाते थे. पेस के सामने जहां वह दूर हटकर कीपिंग किया करते थे तो वहीं स्पिनर्स के सामने वह विकेट्स के पास खड़े हो जाया करते थे. आधुनिक जमाने के विकेटकीपर भी ऐसा करते हैं मगर उस समय किरमानी इस कला में माहिर थे.

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सैयद किरमानी ने 88 टेस्ट मैचों में दो शतकों और 12 अर्धशतकों के साथ 2759 रन बनाए. विकेटकीपर के तौर पर किरमानी ने टेस्ट में कुल 198 शिकार किए. इसके अलावा 49 वनडे में इंटरनेशनल में उन्होंने 373 रन बनाए, 27 कैच पकडे़ और 9 स्टंप भी किए. किरमानी में एक खूबी यह थी कि वह जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी भी कर लिया करते थे. वह उन चुनिंदा विकेटकीपर बल्लेबाजों में शामिल हैं जिनके नाम इंटरनेशनल मैच में विकेट लेने का रिकॉर्ड दर्ज है.

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