एशियन गेम्स में कबड्डी का अखाड़ा और भारत का ‘राजतिलक’...यह कहानी अब पुरानी जरूर है, लेकिन हर बार नया रोमांच लेकर आती है. नागोया में भी तस्वीर बदलने की बजाय इतिहास खुद को दोहरा रहा है. पुरुष और महिला, दोनों भारतीय टीमें फाइनल में पहुंच चुकी हैं और अब 11 गोल्ड के बाद 12वें स्वर्ण की हुंकार सुनाई दे रही है.
शुक्रवार को पहले भारतीय महिलाओं ने नेपाल को 48-24 से रौंदकर फाइनल का टिकट कटाया और फिर पुरुष टीम ने थाईलैंड को 66-28 से ध्वस्त कर खिताबी मुकाबले में जगह बना ली. दोनों डिफेंडिंग चैम्पियन हैं और नागोया में अब तक अजेय हैं. यानी कबड्डी में भारत के गोल्डन राज का अगला अध्याय लिखने के लिए मंच पूरी तरह तैयार है.
महिला टीम ने नेपाल को शुरुआत में ही दबोचा
महिलाओं के सेमीफाइनल में भारत ने पहले हाफ से ही नेपाल पर शिकंजा कस दिया. स्कोर 31-17 रहा और यहीं से मुकाबले की दिशा लगभग साफ हो गई. भारतीय टीम ने पहले हाफ में चार ऑलआउट और चार बोनस अंक जुटाकर अपनी बढ़त को मजबूत किया.
नेपाल के पास दूसरे हाफ में वापसी का मौका था, लेकिन भारतीय डिफेंस और रेडिंग के सामने उसकी चुनौती टिक नहीं सकी. दूसरे हाफ में नेपाल सिर्फ सात अंक ही जोड़ पाया. भारत ने मुकाबला 48-24 से अपने नाम कर फाइनल में प्रवेश कर लिया.
महिला कबड्डी को एशियन गेम्स में पहली बार 2010 में शामिल किया गया था.तब से भारत ने हर संस्करण में गोल्ड जीता है. नागोया से पहले भारतीय महिलाओं के नाम तीन स्वर्ण और एक रजत था. अब लगातार एक और खिताब जीतने का मौका सामने है.
पुरुषों ने थाईलैंड को 66-28 से धोया
महिलाओं के बाद पुरुष टीम भी उसी अंदाज में फाइनल में पहुंची. थाईलैंड के खिलाफ भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही मैच पर अपना नियंत्रण बनाए रखा. पहले हाफ में भारत 37-18 से आगे था.
दूसरे हाफ में भी कहानी नहीं बदली. भारतीय टीम ने थाईलैंड को वापसी का कोई मौका नहीं दिया और अंततः 66-28 के विशाल अंतर से मुकाबला जीत लिया.
भारत की आक्रामकता का अंदाजा बोनस अंकों से लगाया जा सकता है. भारतीय टीम ने मुकाबले में 15 बोनस अंक हासिल किए, जबकि थाईलैंड सिर्फ पांच बोनस अंक जुटा सका. स्कोरबोर्ड पर 38 अंकों का अंतर भारतीय टीम के दबदबे की पूरी कहानी कह रहा था.
पुरुष कबड्डी में 8 गोल्ड, 2018 ही अपवाद
एशियन गेम्स में पुरुष कबड्डी की शुरुआत 1990 में हुई थी और भारत ने अब तक आठ स्वर्ण पदक जीते हैं. नागोया से पहले पुरुष वर्ग में भारत के खाते में 8 गोल्ड और एक ब्रॉन्ज, यानी कुल नौ पदक थे.
इस रिकॉर्ड की सबसे खास बात यह है कि भारत के अलावा सिर्फ ईरान पुरुष कबड्डी में एशियन गेम्स चैम्पियन बना है. ईरान ने 2018 में स्वर्ण जीता था. उस संस्करण में भारत को अप्रत्याशित रूप से कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था.
2018 की वह तस्वीर भारतीय कबड्डी के लंबे गोल्डन राज में एकमात्र बड़ा अपवाद रही. इसके बाद भारत ने फिर खिताब पर कब्जा जमाया और अब नागोया में उसकी नजर अगले स्वर्ण पर है.
11 गोल्ड के बाद 12वें की हुंकार
नागोया से पहले पुरुष और महिला कबड्डी में भारत के नाम कुल 11 स्वर्ण थे- पुरुषों के 8 और महिलाओं के 3. अब दोनों टीमें फाइनल में हैं.
यानी भारत के पास एक ही एशियन गेम्स में अपने कबड्डी गोल्ड की संख्या बढ़ाने के दो मौके हैं. दोनों फाइनल जीतते हैं तो पुरुष वर्ग में भारत के स्वर्ण की संख्या 9 और महिला वर्ग में 4 हो जाएगी. कुल मिलाकर भारतीय कबड्डी के एशियन गेम्स गोल्ड की गिनती 13 तक पहुंच जाएगी.
हालांकि फाइनल में अभी चुनौती बाकी है. दोनों वर्गों में भारत का सामना ईरान और चीनी ताइपे के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से होगा.
कबड्डी में भारत का ‘राजतिलक’ क्यों खास?
एशियन गेम्स के इतिहास में पुरुष कबड्डी में भारत के आठ गोल्ड के सामने ईरान का एक स्वर्ण है. महिलाओं में भारत ने अब तक खेले गए हर संस्करण में शीर्ष स्थान हासिल किया है. यही वजह है कि कबड्डी में भारत की सफलता किसी एक टीम या एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रही.
नागोया में दोनों भारतीय टीमें अब उसी विरासत को आगे बढ़ाने की दहलीज पर खड़ी हैं. सेमीफाइनल में जीत ने काम आसान जरूर किया है, लेकिन असली ताज फाइनल में मिलेगा.
11 गोल्ड की चमक पहले से है. अब नागोया में सवाल सिर्फ पदक का नहीं, उस सुनहरी विरासत में एक और अध्याय जोड़ने का है. पुरुष और महिला दोनों फाइनल में हैं- यानी कबड्डी के अखाड़े में भारत के ‘राजतिलक’ का अगला मंच तैयार है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क