कपड़ों पर सिलवट पड़ना और आयरन करते ही उनका सीधा हो जाना हम रोज देखते हैं. लेकिन इसके पीछे कपड़े के रेशों में होने वाला एक छोटा सा बदलाव काम करता है. खासकर कॉटन और लिनेन के कपड़ों में सेल्यूलोज नाम का पदार्थ होता है. इसके रेशों के बीच हाइड्रोजन बॉन्ड बने होते हैं.
पानी, गर्मी और दबाव मिलने पर इन बॉन्ड की स्थिति बदल सकती है, जिससे कपड़े के रेशे भी अपनी जगह बदल लेते हैं. जब कपड़ा धोया जाता है तो वह पानी सोख लेता है. पानी कपड़े के रेशों के अंदर जाकर हाइड्रोजन बॉन्ड को कुछ समय के लिए कमजोर कर देता है.
इससे रेशे थोड़ा खिसक सकते हैं. अगर उस समय कपड़ा मुड़ा या दबा हुआ है तो रेशे उसी स्थिति में आ जाते हैं. जब कपड़ा सूखता है तो बॉन्ड फिर से बन जाते हैं. रेशे उसी नई स्थिति में टिक जाते हैं. यही सिलवट का कारण बनता है.
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कॉटन में सिलवट ज्यादा क्यों पड़ती है?
कॉटन का ज्यादातर हिस्सा सेल्यूलोज से बना होता है. सेल्यूलोज बहुत लंबी चेन से बना एक पॉलीमर है. इन चेन के बीच हाइड्रोजन बॉन्ड होते हैं, जो रेशों को एक साथ रखने में मदद करते हैं. कॉटन की खास बात यह है कि यह नमी को आसानी से सोख लेता है. पानी मिलने पर इसके रेशे थोड़े फूलते हैं.
उनके बीच हलचल होने लगती है. इसी दौरान अगर कपड़े पर दबाव पड़ता है तो रेशे अपनी जगह से थोड़ा खिसक सकते हैं. उदाहरण के लिए, वॉशिंग मशीन में कपड़े लगातार घूमते और दबते हैं. कपड़े को गीला होने के बाद मोड़कर रखने पर भी रेशे उसी आकार में आ सकते हैं. बाद में जब कपड़ा सूखता है तो रेशे उसी स्थिति में टिक जाते हैं और सिलवट दिखाई देने लगती है.
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पहनने से भी पड़ती हैं सिलवटें
सिर्फ कपड़े धोने से ही सिलवटें नहीं पड़तीं. कपड़े पहनने के दौरान भी ऐसा होता है. शरीर की गर्मी, पसीने की नमी और शरीर का दबाव कपड़े के रेशों को प्रभावित कर सकता है. जैसे लंबे समय तक बैठने पर पैंट के घुटनों के पास या शर्ट की कोहनी के पास सिलवट पड़ जाती है.
इसकी वजह यह है कि इन जगहों पर कपड़ा बार-बार मुड़ता और दबता है. नमी होने पर रेशों का अपनी पुरानी स्थिति में लौटना और मुश्किल हो जाता है. कपड़ा सूखने के बाद वही सिलवट ज्यादा साफ दिखाई देती है.
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आयरन करते ही सिलवट कैसे हटती है?
अब सवाल है कि आयरन करते ही कपड़ा सीधा कैसे हो जाता है. इसके पीछे गर्मी, नमी और दबाव, तीनों का काम होता है. आयरन की गर्मी और भाप कपड़े के रेशों के बीच मौजूद हाइड्रोजन बॉन्ड को कुछ समय के लिए कमजोर करती है. इससे रेशों को अपनी जगह बदलने में आसानी होती है.
जब हम आयरन को कपड़े पर दबाते हैं तो रेशे फैलकर सीधी और सपाट स्थिति में आ जाते हैं. इसके बाद जब कपड़ा ठंडा और सूखता है तो हाइड्रोजन बॉन्ड फिर से बनते हैं. इस बार रेशे सीधी स्थिति में होते हैं. इसलिए कपड़ा भी सीधा बना रहता है.
भाप वाला आयरन ज्यादा असरदार क्यों?
कॉटन जैसे कपड़ों पर भाप वाला आयरन इसलिए ज्यादा काम आता है क्योंकि इसमें गर्मी के साथ नमी भी मिलती है. भाप कपड़े के रेशों तक पहुंचती है और उन्हें थोड़ी देर के लिए आसानी से बदलने वाली स्थिति में ले आती है. इसके बाद आयरन का दबाव रेशों को सीधा करने में मदद करता है. जब कपड़ा ठंडा और सूखता है तो रेशे अपनी नई स्थिति में टिक जाते हैं. इसलिए गहरी सिलवट भी काफी हद तक हट जाती है.
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हर कपड़े पर एक जैसी सिलवट क्यों नहीं पड़ती?
हर कपड़े का फाइबर एक जैसा नहीं होता. उसकी बनावट, रेशों का प्रकार और कपड़े को बनाने के तरीके से भी तय होता है कि उसमें कितनी जल्दी सिलवट पड़ेगी. कॉटन और लिनेन जैसे कपड़ों में नमी का असर ज्यादा दिखाई देता है, इसलिए इनमें सिलवट जल्दी पड़ सकती है. वहीं कुछ दूसरे कपड़े अपनी बनावट की वजह से ज्यादा आसानी से सीधा आकार बनाए रखते हैं.
यानी कपड़े की सिलवट सिर्फ बाहर से दिखाई देने वाला मोड़ नहीं है. इसके पीछे कपड़े के रेशों में होने वाला बदलाव है. पानी और नमी रेशों को अपनी जगह बदलने में मदद करते हैं, दबाव उन्हें मोड़ सकता है और सूखने के बाद रेशे उसी स्थिति में टिक जाते हैं. आयरन की गर्मी, भाप और दबाव इस प्रक्रिया को फिर बदल देते हैं और कपड़े को सीधा कर देते हैं.
आजतक साइंस डेस्क