टेकऑफ से पहले पसीना, उड़ते ही ठंडक... आखिर जमीन पर विमान के साथ ऐसा क्यों होता है?

विमान उड़ने के बाद ठंडा और रनवे पर खड़ा होते ही गर्म क्यों हो जाता है? एसी चलने के बावजूद केबिन में गर्मी बढ़ने के पीछे है एक दिलचस्प साइंस. समझिए जमीन पर विमान की कूलिंग क्यों पड़ जाती है कमजोर.

Advertisement
क्यों विमान के अंदर अलग-अलग जगह पर तापमान एक जैसा नहीं होता. (Photo: ITG) क्यों विमान के अंदर अलग-अलग जगह पर तापमान एक जैसा नहीं होता. (Photo: ITG)

रदीफा कबीर

  • नई दिल्ली ,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:37 PM IST

दिल्ली से पुणे जा रही स्पाइसजेट की फ्लाइट SG 105 में 11 अगस्त को टेकऑफ से पहले यात्रियों को काफी गर्मी का सामना करना पड़ा. यात्रियों के मुताबिक, विमान के अंदर गर्मी इतनी बढ़ गई कि कुछ लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हुई. इसके बाद यात्रियों ने रनवे पर विरोध किया. एयरलाइन ने कहा कि विमान में आखिरी समय पर तकनीकी दिक्कत आई थी और दूसरे विमान की व्यवस्था की गई. एयरलाइन के मुताबिक, विमान का एसी भी चालू था.

Advertisement

इस घटना के बाद सवाल है कि आखिर जमीन पर खड़ा विमान इतना गर्म क्यों हो जाता है? वहीं, कुछ देर बाद टेकऑफ करते ही विमान ठंडा कैसे होने लगता है? इसकी वजह विमान का एसी, बाहर का तापमान, धूप और विमान की रफ्तार है. जमीन पर खड़े विमान के लिए अंदर की गर्मी बाहर निकालना उड़ान के मुकाबले मुश्किल होता है.

यह भी पढ़ें: प्रशांत महासागर में 7 साइक्लोन, क्या इनके चक्रव्यूह में फंसेगा भारत का मॉनसून

विमान की खिड़कियों से आने वाली धूप सीटों और दूसरी चीजों को गर्म करती है. नीचे का गर्म रनवे भी विमान के आसपास गर्मी बढ़ाता है. इसके अलावा विमान में बैठे यात्रियों के शरीर से भी गर्मी निकलती रहती है. एक इंसान आराम से बैठा हो तब भी उसके शरीर से करीब 70 से 100 वॉट तक गर्मी निकलती है. यानी 180 से ज्यादा यात्रियों वाले विमान के अंदर काफी गर्मी जमा हो सकती है.

Advertisement

जमीन पर विमान का AC कैसे काम करता है?

विमान का एसी घर के एसी जैसा नहीं होता. इसमें हवा को अलग तरीके से ठंडा किया जाता है. उड़ान के दौरान विमान की तेज रफ्तार से बाहर की हवा कूलिंग सिस्टम तक पहुंचती रहती है. इससे अंदर की गर्म हवा को बाहर निकालना आसान होता है.

जमीन पर विमान खड़ा होता है, इसलिए उसे तेज हवा नहीं मिलती. ऐसे में सिस्टम को हवा पहुंचाने के लिए पंखों की मदद लेनी पड़ती है. इंजन बंद होने पर विमान अपने APU यानी ऑक्सिलरी पावर यूनिट की मदद ले सकता है. कई बार एयरपोर्ट से पाइप के जरिए ठंडी हवा भी विमान के अंदर भेजी जाती है.

यह भी पढ़ें: राफेल के डर से PAK ने छुपा ली थी पूरी F-16 की फ्लीट, पूर्व अफसर का बड़ा खुलासा

खिड़की वाली सीट ज्यादा गर्म क्यों लगती है?

विमान के अंदर हर जगह गर्मी एक जैसी महसूस नहीं होती. अगर खिड़की पर सीधी धूप पड़ रही है तो वहां बैठे यात्री को ज्यादा गर्मी लग सकती है. यानी सिर्फ हवा का तापमान ही मायने नहीं रखता, धूप भी शरीर को गर्म करती है. हवा में नमी ज्यादा हो तो गर्मी और ज्यादा महसूस होती है. हमारा शरीर पसीने को सूखाकर खुद को ठंडा करता है. लेकिन नमी ज्यादा होने पर पसीना जल्दी नहीं सूखता. इसलिए गर्मी और घुटन ज्यादा लग सकती है.

Advertisement

टेकऑफ के बाद विमान ठंडा क्यों होता है?

टेकऑफ के बाद विमान की रफ्तार तेजी से बढ़ती है. इससे कूलिंग सिस्टम को बाहर की तेज हवा मिलने लगती है और गर्मी बाहर निकालना आसान हो जाता है. इंजन भी ज्यादा ताकत से काम करने लगते हैं. इसके साथ विमान जमीन से ऊपर चला जाता है, जहां बाहर का तापमान काफी कम होता है. इसलिए विमान के अंदर की गर्मी धीरे-धीरे कम होने लगती है और केबिन ठंडा होने लगता है.

सीधी बात यह है कि विमान का एसी जमीन पर भी काम करता है, लेकिन गर्म मौसम, धूप, यात्रियों की संख्या और विमान के खड़े रहने से उस पर ज्यादा दबाव पड़ता है. टेकऑफ के बाद तेज रफ्तार और ठंडी हवा कूलिंग सिस्टम का काम आसान कर देती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »