धरती के ऊपर हजारों स्टारलिंक सैटेलाइट घूम रहे हैं. लेकिन इन सैटेलाइट्स के लिए एक बड़ा खतरा सूरज से आता है. सूरज पर जब तेज गतिविधियां होती हैं और सोलर स्टॉर्म आते हैं, तो इसका असर धरती के ऊपरी वायुमंडल पर पड़ता है. वायुमंडल गर्म होकर फैल जाता है. इससे सैटेलाइट्स पर एटमॉस्फेरिक ड्रैग बढ़ जाता है और उनकी ऊंचाई कम होने लगती है.
इसका असर फरवरी 2022 में साफ दिखा था. स्पेसएक्स ने 49 स्टारलिंक सैटेलाइट लॉन्च किए थे. इसके बाद एक जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म आया. उस समय ये सैटेलाइट करीब 210 किलोमीटर की ऊंचाई पर थे. स्टॉर्म के कारण वहां वायुमंडल ज्यादा घना हो गया. इससे सैटेलाइट्स पर खिंचाव बढ़ा और 38 सैटेलाइट अपनी कक्षा में टिक नहीं पाए. कुछ दिनों बाद वे धरती के वायुमंडल में वापस आकर जल गए. यह जानकारी 2023 में प्रकाशित एक रिसर्च में सामने आई थी.
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सूरज से लगातार एनर्जी निकलती रहती है. कई बार सूरज पर तेज विस्फोट होते हैं. इनका असर धरती तक पहुंच सकता है और जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म आ सकता है. इस दौरान धरती का ऊपरी वायुमंडल ज्यादा गर्म हो जाता है और फैलने लगता है. इससे सैटेलाइट के रास्ते में मौजूद गैस के कण बढ़ जाते हैं.
सैटेलाइट जब बहुत तेज रफ्तार से आगे बढ़ता है तो इन कणों से टकराता है. इससे सैटेलाइट पर खिंचाव बढ़ता है. इसी खिंचाव को एटमॉस्फेरिक ड्रैग कहते हैं. ड्रैग बढ़ने पर सैटेलाइट धीरे-धीरे अपनी ऊंचाई खोने लगता है. अगर उसे दोबारा ऊपर नहीं उठाया जाए तो वह और नीचे आता रहता है. धरती के वायुमंडल में पहुंच जाता है.
2022 में 38 स्टारलिंक सैटेलाइट क्यों गिर गए?
फरवरी 2022 में लॉन्च किए गए 49 स्टारलिंक सैटेलाइट्स को शुरुआत में करीब 210 किलोमीटर की ऊंचाई पर रखा गया था. बाद में इन्हें करीब 550 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाना था. लेकिन लॉन्च के तुरंत बाद जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म आ गया.
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रिसर्च के मुताबिक, उस समय 210 किलोमीटर की ऊंचाई पर वायुमंडल का घनत्व सामान्य से करीब 20 से 30 फीसदी बढ़ गया था. इससे सैटेलाइट्स पर ज्यादा खिंचाव पड़ा. SpaceX ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन 49 में से 38 सैटेलाइट धरती की ओर वापस आने लगे. कुछ दिनों बाद वे वायुमंडल में प्रवेश कर गए और तेज गर्मी की वजह से जल गए.
लो अर्थ ऑर्बिट में ज्यादा खतरा क्यों?
स्टारलिंक जैसे कई सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट में काम करते हैं. यहां धरती का वायुमंडल बहुत पतला होता है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होता. इसलिए सैटेलाइट्स पर थोड़ा बहुत ड्रैग हमेशा रहता है. सामान्य दिनों में यह ड्रैग बहुत कम होता है. लेकिन सोलर स्टॉर्म के दौरान वायुमंडल फैलने से ड्रैग बढ़ जाता है. इससे सैटेलाइट की ऊंचाई तेजी से कम हो सकती है. अगर सैटेलाइट को वापस ऊपर नहीं उठाया गया तो वह लगातार नीचे आता रहेगा. आखिर में वह धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर जाएगा और जल जाएगा.
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बढ़ते स्टारलिंक नेटवर्क के साथ चुनौती भी बढ़ी
स्टारलिंक नेटवर्क लगातार बड़ा हो रहा है. इसका मतलब है कि लो अर्थ ऑर्बिट में सैटेलाइट्स की संख्या भी बढ़ रही है. इससे उन्हें सुरक्षित तरीके से चलाना और अंतरिक्ष में टक्कर से बचाना और जरूरी हो जाता है. रिसर्च में बताया गया है कि अगर भविष्य में इससे ज्यादा ताकतवर जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म आता है तो कम ऊंचाई पर मौजूद सैटेलाइट्स पर इसका असर और ज्यादा हो सकता है.
इसी वजह से सोलर एक्टिविटी और स्पेस वेदर पर नजर रखना जरूरी है. फरवरी 2022 की घटना ने दिखाया कि सूरज की गतिविधि धरती से लाखों किलोमीटर दूर मौजूद सैटेलाइट्स को भी नुकसान पहुंचा सकती है. खासकर लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट्स के लिए बढ़ता एटमॉस्फेरिक ड्रैग बड़ा खतरा बन सकता है.
आजतक साइंस डेस्क