अंतरिक्ष से आए एक रहस्यमयी रेडियो सिग्नल ने वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है. यह सिग्नल पृथ्वी से करीब 63.4 प्रकाश वर्ष दूर मौजूद एक बड़े ग्रह बीटा पिक्टोरिस बी से आया है. वैज्ञानिकों ने पहली बार किसी एक्सोप्लैनेट यानी सौर मंडल के बाहर मौजूद ग्रह से आने वाले रेडियो सिग्नल को सीधे उसी ग्रह से जोड़ने में कामयाबी हासिल की है. यह खोज दक्षिण अफ्रीका में लगे मीरकैट रेडियो टेलीस्कोप ऐरे से की गई है.
वैज्ञानिकों की टीम ने 2025 और 2026 में चार बार बीटा पिक्टोरिस नाम के स्टार सिस्टम को देखा. इस दौरान उन्हें 0.85 से 3.5 गीगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी पर छोटे-छोटे रेडियो सिग्नल बार-बार मिले. सबसे खास बात यह थी कि सिग्नल की जगह बीटा पिक्टोरिस बी ग्रह से मिल रही थी, न कि उसके स्टार से. वैज्ञानिकों के मुताबिक ये सिग्नल ग्रह के ऑरोरा से निकल रहे हैं.
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पहली बार सीधे ग्रह से मिला रेडियो सिग्नल
पहले भी ऐसे स्टार सिस्टम से रेडियो सिग्नल मिल चुके हैं, जिनके आसपास ग्रह मौजूद हैं. लेकिन तब यह पक्का नहीं हो पाया था कि सिग्नल ग्रह से आया है या उसके स्टार से. इस बार वैज्ञानिकों ने सिग्नल की जगह को बहुत सटीक तरीके से जांचा.
इसके लिए टीम ने अंतरिक्ष में मौजूद दूर के क्वासार को रेफरेंस पॉइंट की तरह इस्तेमाल किया. इससे सिग्नल की सही जगह पता लगाने में मदद मिली. जांच में सिग्नल की लोकेशन बीटा पिक्टोरिस बी से मिली. इसी वजह से वैज्ञानिक इसे किसी एक्सोप्लैनेट से सीधे मिला पहला रेडियो सिग्नल बता रहे हैं.
ग्रह के ऑरोरा से जुड़ा है सिग्नल
वैज्ञानिकों के मुताबिक बीटा पिक्टोरिस बी से मिले रेडियो सिग्नल उसके ऑरोरा से जुड़े हैं. पृथ्वी पर भी ऑरोरा दिखाई देता है. इसे नॉर्दर्न लाइट्स और सदर्न लाइट्स के नाम से जाना जाता है. यह तब बनता है जब चार्ज्ड पार्टिकल्स ग्रह के मैग्नेटिक फील्ड के साथ मिलते हैं.
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बीटा पिक्टोरिस बी से मिले सिग्नल में सर्कुलर पोलराइजेशन भी देखी गई. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह इलेक्ट्रॉन साइक्लोट्रॉन मेजर इंस्टेबिलिटी यानी ईसीएमआई नाम की प्रक्रिया से जुड़ा हो सकता है. इसी प्रक्रिया से पृथ्वी और जूपिटर के ऑरोरा से जुड़े रेडियो सिग्नल भी बनते हैं.
पृथ्वी से हजारों गुना मजबूत मैग्नेटिक फील्ड
इस सिग्नल से ग्रह के मैग्नेटिक फील्ड के बारे में भी जानकारी मिली है. रिसर्च के मुताबिक जिस जगह से रेडियो सिग्नल निकल रहा है, वहां मैग्नेटिक फील्ड की ताकत कम से कम 1.25 किलो-गॉस यानी करीब 1,250 गॉस है. यह पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से हजारों गुना ज्यादा मजबूत है.
बीटा पिक्टोरिस बी एक युवा और बहुत बड़ा गैस जायंट है. इसका वजन करीब 10 जूपिटर के बराबर है. यह अपनी धुरी पर भी बहुत तेजी से घूमता है. इसे एक चक्कर पूरा करने में सिर्फ 8 से 9 घंटे लगते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक ग्रह की तेज रोटेशन और मजबूत मैग्नेटिक फील्ड उसके ऑरोरा से जुड़े रेडियो सिग्नल में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
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अभी रिसर्च की समीक्षा बाकी
इस खोज से जुड़ी रिसर्च अभी किसी पीयर-रिव्यूड साइंस जर्नल में प्रकाशित नहीं हुई है. इसे फिलहाल आर्क्सिव पर प्रीप्रिंट के तौर पर जारी किया गया है. यानी दूसरे वैज्ञानिकों की तरफ से इसकी जांच और समीक्षा अभी बाकी है. वैज्ञानिक अब दूसरे बड़े एक्सोप्लैनेट्स में भी ऐसे रेडियो सिग्नल खोजना चाहते हैं. आने वाले समय में ज्यादा संवेदनशील रेडियो टेलीस्कोप की मदद से ऐसे और ग्रहों का पता लगाया जा सकता है.
आजतक साइंस डेस्क